युद्ध का टेंशन और महंगाई का डर, जानें RBI ने क्यों नहीं बदला ब्याज दर

Published by :Soumya Shahdeo
Published at :23 Apr 2026 11:30 AM (IST)
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RBI Monetary Policy 2026

RBI ने ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया (Photo: ANI & Freepik)

RBI Monetary Policy 2026: मिडिल ईस्ट संकट के कारण डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर हो रहा है और महंगाई का खतरा बढ़ गया है. जानें क्यों आरबीआई गवर्नर ने इस बार ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया.

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RBI Monetary Policy 2026: हाल ही में हुई रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की बैठक के नतीजे सामने आए हैं. गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता वाले इस पैनल ने साफ कर दिया है कि मिडिल ईस्ट में बढ़ता युद्ध का तनाव भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सिरदर्द बन सकता है. इसी अनिश्चितता को देखते हुए आरबीआई ने अपनी मुख्य ब्याज दर (रेपो रेट) को 5.25% पर बरकरार रखा है. 

क्या तेल की कीमतें बिगाड़ देंगी आपके घर का बजट?

मीटिंग में इस बात पर सबसे ज्यादा चिंता जताई गई कि युद्ध के कारण कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतें आसमान छू रही हैं. भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए मिडल ईस्ट पर काफी निर्भर है. पैनल के सदस्य प्रोफेसर राम सिंह ने बताया कि पिछले कुछ हफ्तों में कच्चे तेल के दाम 40% तक बढ़ चुके हैं. अगर तेल महंगा होता है, तो माल ढुलाई महंगी होगी, जिससे फल, सब्जी और अन्य जरूरी सामानों की कीमतें बढ़ सकती हैं. अनुमान है कि साल 2026-27 में महंगाई की दर 4.6% तक जा सकती है. 

क्या देश की तरक्की की रफ्तार सुस्त पड़ने वाली है?

दुनियाभर में चल रही उथल-पुथल का असर भारत की जीडीपी (GDP) ग्रोथ पर भी दिखने लगा है. आरबीआई ने अगले वित्त वर्ष (2026-27) के लिए विकास दर का अनुमान घटाकर 6.9% कर दिया है, जो पिछले साल 7.6% था. इसका बड़ा कारण स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज जैसे अहम समुद्री रास्तों में पैदा हुआ संकट है. इससे न सिर्फ सप्लाई चेन टूटी है, बल्कि भारत के एक्सपोर्ट पर भी बुरा असर पड़ा है. सीधे शब्दों में कहें तो बाहरी रुकावटें भारत की रफ्तार को लगभग 0.60% तक कम कर सकती हैं. 

ब्याज दरों में बदलाव क्यों नहीं किया गया?

आरबीआई ने अपनी नीति को न्यूट्रल रखा है. मेंबर सौगत भट्टाचार्य के अनुसार, इस समय न तो ब्याज दरें बढ़ाना सही है और न ही घटाना. अगर दरें बढ़ाई जाती हैं तो लोन महंगे होंगे और ग्रोथ रुकेगी, और अगर घटाई जाती हैं तो महंगाई बेकाबू हो सकती है. डिप्टी गवर्नर पूनम गुप्ता और कार्यकारी निदेशक इंद्रनील भट्टाचार्य का मानना है कि फिलहाल महंगाई सप्लाई की कमी की वजह से है, जिसे केवल ब्याज दरें बढ़ाकर कंट्रोल नहीं किया जा सकता. इसलिए, वेट एण्ड वॉच  की नीति अपनाना ही समझदारी है. 

रुपये की गिरती कीमत से क्या होगा नुकसान?

डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर हो रहा है, जिससे हमारा करंट अकाउंट डेफिसिट (CAD) यानी व्यापार घाटा बढ़ने का डर है. गवर्नर मल्होत्रा ने चेतावनी दी है कि अगर यह युद्ध लंबा खिंचा, तो केंद्रीय बैंकों के लिए महंगाई को काबू करना और विकास को बचाए रखना बहुत मुश्किल हो जाएगा. फिलहाल, आरबीआई हर बदलाव पर पैनी नजर रखे हुए है ताकि देश की अर्थव्यवस्था को बाहरी झटकों से बचाया जा सके. 

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Soumya Shahdeo

लेखक के बारे में

By Soumya Shahdeo

सौम्या शाहदेव ने बैचलर ऑफ़ आर्ट्स इन इंग्लिश लिटरेचर में ग्रेजुएशन किया है और वह इस समय प्रभात खबर डिजिटल के बिजनेस सेक्शन में कॉन्टेंट राइटर के रूप में काम कर रही हैं. वह ज़्यादातर पर्सनल फाइनेंस से जुड़ी खबरें लिखती हैं, जैसे बचत, निवेश, बैंकिंग, लोन और आम लोगों से जुड़े पैसे के फैसलों के बारे में. इसके अलावा, वह बुक रिव्यू भी करती हैं और नई किताबों व लेखकों को पढ़ना-समझना पसंद करती हैं. खाली समय में उन्हें नोवेल्स पढ़ना और ऐसी कहानियाँ पसंद हैं जो लोगों को आगे बढ़ने की प्रेरणा देती हैं.

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