शहर से गांव तक पानी के लिए मचा हाहाकार

Published at :14 Apr 2016 8:33 AM (IST)
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शहर से गांव तक पानी के लिए मचा हाहाकार

समस्या. चापाकल पर करना पड़ता है घंटों इंतजार भीषण गरमी के कारण जल स्तर काफी नीचे चला गया है. इसके कारण शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक में पानी के हाहाकार मचा है. जिन चापाकलों से पानी निकल रहा है, उन चापाकलों से पानी लेने के लिए लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ता है. इससे […]

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समस्या. चापाकल पर करना पड़ता है घंटों इंतजार
भीषण गरमी के कारण जल स्तर काफी नीचे चला गया है. इसके कारण शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक में पानी के हाहाकार मचा है. जिन चापाकलों से पानी निकल रहा है, उन चापाकलों से पानी लेने के लिए लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ता है. इससे लोगों को भारी परेशानी होती है.
टिकरी मुहल्ला बिराटपुर, न्यू एरिया शाहपुर, जसोइया व कथरूआ में अधिकतर चापाकलों ने दे दिया जवाब
औरंगाबाद(नगर) : जिले में भीषण गरमी के कारण जल स्तर काफी नीचे चला गया है. इसके कारण पूरे जिले में पानी के लिए हाहाकार मचा है. सिर्फ औरंगाबाद शहर की बात की जाये, तो अधिकांश चापाकल व बिजली से चलनेवाले मोटरों से पानी निकलना बंद हो गया है. यही हाल ग्रामीण इलाकों का भी है. खासकर देव, मदनपुर, रफीगंज, कुटुंबा, नवीनगर प्रखंड के ग्रामीण इलाकों की स्थिति भयावह हो चुकी है. जिन चापाकल के बोर 50-80 फुट के बीच थे, वह अब जवाब दे चुके हैं. कुटुंबा, नवीनगर, रफीगंज व मदनपुर के शहरी व ग्रामीण इलाकों में पानी के लिए हाहाकार मच गया है. अब सिर्फ लोगों की उम्मीद ऊपर वाले पर ही टिकी हुई है.
मदनपुर व देव के दक्षिणी इलाके में सबसे अधिक परेशानी लोगों को हो रही है. जंगलतटीय व पहाड़ी इलाकों में गरमी और तेजी से बढ़ी है. सिर्फ औरंगाबाद जिला मुख्यालय की बात की जाये, तो अधिकांश मुहल्ले में पानी का लेयर काफी नीचे जा चुका है. टिकरी मुहल्ला, बिराटपुर, न्यू एरिया, शाहपुर, जसोइया व कथरूआ में अधिकतर चापाकल सूख चुके हैं. कुरैशी मुहल्ला व पठानटोली की स्थिति बेहद खराब है. यहां एक-एक चापाकल पर दर्जनों लोग हाथ में डब्बा लिये पानी लेने का इंतजार करते हैं. ऐसा नहीं कि इन दोनों मुहल्लों में पेयजल की स्थिति इस बार खराब हुई है. पहले भी गरमी के मौसम में यहां पानी के लिए हाहाकार मचा है.
22 हजार चापाकलों में पांच हजार खराब
जिले में पेयजल समस्या के समाधान के लिए पीएचइडी द्वारा 22 हजार चापाकल लगवाये गये थे. जिनमें अधिकांश चापाकल खराब पड़े हैं. लेकिन, विभाग के कार्यपालक अभियंता बिंदु भूषण का कहना है कि पांच हजार के आसपास चापाकल अभी पूर्ण रूप से खराब है, जो बनाने लायक नहीं है. यानी की 16 हजार चापाकल विभाग के अनुसार ठीक-ठाक चल रहे हैं.
कुछ चापाकल वैसे हैं, जिनकी मरम्मत करायी गयी है. सवाल यह उठता है कि 1850 गांवों में 16 हजार चापाकल से स्थिति क्या होगी. 1850 गांवों के अलावा कई टोला भी हैं, जहां भी चापाकल लगाये हैं. ग्रामीण इलाकों में खराब पड़े चापाकलों की मरम्मत की दिशा में कोई काम नहीं हो पा रहा है. अधिकतर चापाकल जानवरों को बांधने के काम में आ रहे हैं.
पीएचइडी के कार्यपालक अभियंता बिंदु भूषण ने बताया कि जिले में लगातार घट रहे जल स्तर के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई है. विभाग ने जिन जगहों पर चापाकल लगाये गये हैं, उसकी मरम्मत करायी जा रहा है, ताकि लोगों को पेयजल के लिए परेशानी का सामना नहीं करना पड़े. विशेष परिस्थिति में टैंकर से भी पानी पहुंचाया जायेगा.
जिल के 11 गांवों को चिह्नित किया गया है, जहां पानी नहीं है. उन गांवों में टैंकर से पानी पहुंचाने की व्यवस्था की जा रही है. इसके अलावा मास्टर प्लान भी बनाया गया है, ताकि पेयजल की समस्या से निजात मिल सके.
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