अफजल गुरु को शहीद बताने का किया विरोध

Published at :13 Feb 2016 7:57 AM (IST)
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अफजल गुरु को शहीद बताने का किया विरोध

औरंगाबाद (सदर) : देशद्रोही अफजल गुरु को शहीद बताने व सरस्वती प्रतिमा से छेड़छाड़ किये जाने के विरोध में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं ने शुक्रवार को जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू), दिल्ली के कुलपति का पुतला फूंका. इससे पहले विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं ने शहर में जुलूस निकाला. विद्यार्थी परिषद के सदस्यों ने कहा […]

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औरंगाबाद (सदर) : देशद्रोही अफजल गुरु को शहीद बताने व सरस्वती प्रतिमा से छेड़छाड़ किये जाने के विरोध में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं ने शुक्रवार को जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू), दिल्ली के कुलपति का पुतला फूंका. इससे पहले विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं ने शहर में जुलूस निकाला.
विद्यार्थी परिषद के सदस्यों ने कहा कि जेएनयू में गत नौ फरवरी की शाम आयोजित सांस्कृतिक संध्या में कुछ लोगों द्वारा देश की अखंडता के खिलाफ नारे लगाये गये और आतंकी अफजल गुरु को शहीद बताया गया, जो देशवासियों के लिए शर्म की बात है. मां सरस्वती की प्रतिमा से छेड़छाड़ करनेवाले धर्म विरोधी हैं, जिसे बरदाश्त नहीं किया जायेगा.
विद्यार्थी परिषद के प्रदेश मंत्री दीपक कुमार ने कहा कि जेएनयू में कुछ कथित बुद्धिजीवियों द्वारा आतंकी अफजल गुरु को शहीद बता कर हनमनथप्पा जैसे शहीदों को अपमान किया गया है.
सांस्कृतिक संध्या का आयोजन करनेवाले छात्र संगठन आइसा, एसएफआइ एवं एआइएसएफ ने यह साबित कर दिया कि ये देशद्रोहियों के संगठन हैं. जिला संयोजक राहुल कुमार ने कहा कि पहले भी जेएनयू, टीआइएसएस, हैदराबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय जैसे संस्थानो में कभी अफजल गुरु, तो कभी याकूब मेमन के समर्थन में इस तरह की गतिविधियों का आयोजन किया जा चुका है.
इस तरह के कार्यक्रमों पर पूरी तरह रोक लगनी चाहिए. इस मौके पर शशि कुमार, अमरेंद्र कुमार, राजेश, मिथुन, दिनेश, अभिषेक, सतीश, हिमांशु, विक्की, सूरज, छोटू, सौरभ, परमजीत व सुमित आदि उपस्थित थे.
‘फैशन के नाम पर सरस्वती प्रतिमा के वास्तविक रूप से छेड़छाड़ बरदाश्त नहीं’
बाहर से आये कलाकारों द्वारा मां सरस्वती को प्रतिमाओं को विभिन्न मॉडलों में पेश करने का भी विद्यार्थी परिषद ने विरोध किया है. परिषद के प्रदेश मंत्री दीपक कुमार, जिला संयोजक राहुल कुमार, नगर मंत्री अमित गुप्ता व विवेक सिंह आदि ने कहा कि मां सरस्वती की प्रतिमा को आकर्षक बना कर बेचने के लिए कलाकार इसे फैशन के साथ जोड़ रहे हैं. मूर्तियों के उनके वास्तविक स्वरूप के साथ छेड़छाड़ कर धार्मिक सौहार्द बिगाड़ने का प्रयास किया जा रहा हैं.
मां सरस्वती की वास्तविक सवारी हंस है, लेकिन कलाकार हंस को हटा कर विभिन्न पशुओं को मां सरस्वती की सवारी बना दी हैं, जिसका कोई भी विरोध करेगा. राहुल कुमार ने कहा कि बाहर से आये मूर्ति कलाकार खुद को बंगाल व मद्रास का बताते हैं, लेकिन वे सभी बांग्लादेशी हैं. प्रशासन को इस पर प्रतिबंध लगानी चाहिये.
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