टीचर्स ट्रेनिंग कॉलेज में प्राध्यापकों की कमी
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :02 Feb 2016 7:20 AM (IST)
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प्रशिक्षण में अभ्यर्थियों को हो रही परेशानी औरंगाबाद (नगर) : शहर के प्राथमिक शिक्षक शिक्षा महाविद्यालय की स्थिति दिन-प्रतिदिन खराब होते जा रही है. शहर के शाहपुर मुहल्ले स्थित वर्ष 1903 में शिक्षा के क्षेत्र में अलख जगाने की उम्मीद के साथ इस महाविद्यालय की स्थापना की गयी थी, लेकिन आज व्याख्यताओं की कमी के […]
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प्रशिक्षण में अभ्यर्थियों को हो रही परेशानी
औरंगाबाद (नगर) : शहर के प्राथमिक शिक्षक शिक्षा महाविद्यालय की स्थिति दिन-प्रतिदिन खराब होते जा रही है. शहर के शाहपुर मुहल्ले स्थित वर्ष 1903 में शिक्षा के क्षेत्र में अलख जगाने की उम्मीद के साथ इस महाविद्यालय की स्थापना की गयी थी, लेकिन आज व्याख्यताओं की कमी के कारण अभ्यर्थियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.
इस महाविद्यालय में जिले के ही नहीं बल्कि पूरे राज्य से सैकड़ों अभ्यर्थी प्रशिक्षण पाने के लिए इस महाविद्यालय में पहुंचते हैं, पर व्याख्यताओं के अभाव में किसी तरह टीचिंग व नन टीचिंग का प्रशिक्षण दिया जा रहा है. टीचिंग व नन टीचिंग अभ्यर्थियों को यहां दो साल का ट्रेनिंग दिया जाता हैं. मात्र तीन व्याख्याताओं के भरोसे सैकड़ों अभ्यर्थियों को ट्रेनिंग दिया जा रहा है.
टीचर्स ट्रेनिंग कॉलेज के प्राचार्या सुषमा जायसवाल ने बताया कि यहां प्राध्यापकों के साथ-साथ भवन की भी कमी थी. विभाग द्वारा कुछ कमरे का निर्माण कराया गया है. लेकिन पुराने भवन दिन प्रतिदिन और जर्जर होते जा रहे हैं, इस पर किसी का ध्यान नहीं है. प्राध्यापकों की कमी से प्रशिक्षण के दौरान काफी परेशानी होती है. प्राध्यापकों की कमी के कारण एक विषय के व्याख्याता कई विषयों का प्रशिक्षण देते हैं. इससे शिक्षा की गुणवत्ता पर भी खासा असर पड़ता है.
जब प्रशिक्षण के दौरान अभ्यर्थियों को गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण नहीं मिलेगा तो वे विद्यालयों में बच्चों को किस तरह से पढ़ा पायेंगे. उन्होंने बताया कि इस महाविद्यालय में प्राध्यापकों का पद नौ है, लेकिन अभी तीन ही नियुक्त हैं. छह पद खाली है
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