प्रोजेक्ट जयप्रभा कन्या हाइस्कूल की छात्राओं का भवष्यि भगवान भरोसे

Published at :31 Oct 2015 6:52 PM (IST)
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प्रोजेक्ट जयप्रभा कन्या हाइस्कूल की छात्राओं का भवष्यि भगवान भरोसे

प्रोजेक्ट जयप्रभा कन्या हाइस्कूल की छात्राओं का भविष्य भगवान भरोसे1500 छात्राओं को पढ़ाने के लिए मात्र आठ शिक्षक बिना लाइब्रेरिन के है लाइब्रेरी, कई विषय के शिक्षक नहीं(फोटो नंबर-13) कैप्शन- 1984 में स्थापित प्रोजेक्ट जयप्रभा कन्या हाई स्कूल(पेज चार की लीड) औरंगाबाद (नगर)मदनपुर प्रखंड मुख्यालय स्थित प्रोजेक्ट जयप्रभा कन्या हाइस्कूल की स्थापना 1984 में सुदूर […]

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प्रोजेक्ट जयप्रभा कन्या हाइस्कूल की छात्राओं का भविष्य भगवान भरोसे1500 छात्राओं को पढ़ाने के लिए मात्र आठ शिक्षक बिना लाइब्रेरिन के है लाइब्रेरी, कई विषय के शिक्षक नहीं(फोटो नंबर-13) कैप्शन- 1984 में स्थापित प्रोजेक्ट जयप्रभा कन्या हाई स्कूल(पेज चार की लीड) औरंगाबाद (नगर)मदनपुर प्रखंड मुख्यालय स्थित प्रोजेक्ट जयप्रभा कन्या हाइस्कूल की स्थापना 1984 में सुदूर इलाके की छात्राओं को शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ने व समुचित लाभ दिलाने के उद्देश्य से किया गया था, लेकिन आज स्थिति काफी खराब है. दिन प्रतिदिन छात्राओं की संख्या तो बढ़ रही है, लेकिन उसके मुताबिक संसाधनों का घोर अभाव है. इस इलाके में छात्राओं की पढ़ाई के लिए यह एक मात्र इकलौता विद्यालय है. यहां नौंवी से इंटर तक की पढ़ाई होती है. इस विद्यालय की आज स्थिति यह है कि न तो छात्राओं के अनुसार कमरें है और ना ही पढ़ाने के लिए पर्याप्त मात्रा में शिक्षक. इस विद्यालय में प्रखंड मुख्यालय से लगभग 15 किलोमीटर दूरी तक की छात्राएं पढ़ने के लिए आती हैं. विद्यालय में कमरों की कमी के कारण छात्राओं को दो पाली में पढ़ाई करायी जाती है. इससे छात्राओं की परेशानी होती है. वहीं लाइब्रेरियन की बात की जाये तो स्थिति यह है कि क्लास रूम में ही लाइब्रेरी है, वह भी बिना लाइब्रेरियन के. छात्राओं को किसी तरह लाइब्रेरी का लाभ मिलता है. प्राचार्य उमेश प्रसाद सिंह ने बताया कि इस विद्यालय में औरंगाबाद जिले के साथ-साथ गया जिले की भी छात्राएं पढ़ने के लिए आती हैं. (पश्चिमी छोर) रानी कुंआ, से लेकर गया जिले के बुधौल गांव व दक्षिणी जंगल तटीय इलाके से उत्तरी छोर सलैया, बेला, प्राणपुर गांव के आस-पास की छात्राएं पढ़ाई करने के लिए इस विद्यालय में आती हैं. इस विद्यालय में भवन की घोर कमी है. शिक्षकों का भी अभाव है. नौंवी से इंटर तक की पढ़ाई तो होती है, लेकिन विभाग द्वारा सुविधाएं उपलब्ध नहीं होने से प्रबंधन को काफी परेशानी हो रही है. प्राचार्य ने बताया कि नौंवी में लगभग 726 छात्राएं, 10वीं में 614 व इंटर कला में 112 व साइंस में 34 छात्राओं का नामांकन है. कमरों के अभाव में छात्राओं की पढ़ाई दो पाली में करायी जाती है. इससे काफी कठिनाई होती है. आठ शिक्षकों के सहारे किसी तरह लगभग डेढ़ हजार छात्राओं को पठन-पाठन कराया जाता है. इन दिनों नौवीं व 10वीं की छात्राओं की सावधिक परीक्षा भी दो पाली में ली जा रही है.

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