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l36 घंटे के उपवास के बाद भी व्रतियों में दिखा मतदान के लिए जज्बा, एक साथ किया सूर्योपासना व लोकतंत्र का महापर्व

Updated at : 12 Apr 2019 12:49 AM (IST)
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l36 घंटे के उपवास के बाद भी व्रतियों में दिखा मतदान के लिए जज्बा, एक साथ किया सूर्योपासना व लोकतंत्र का महापर्व

औरंगाबाद सदर : 36 घंटे का कठिन निर्जला व्रत व भगवान सूर्य में असीम आस्था के बीच सशक्त राष्ट्र के निर्माण को लेकर व्रतियों ने सूर्योपासना व लोकतंत्र के महापर्व में एक साथ अपनी भागीदारी निभायी. छठ पर्व व मतदान एक ही दिन होने के बावजूद मतदाताओं में अपने मताधिकार के प्रयोग को लेकर खासा […]

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औरंगाबाद सदर : 36 घंटे का कठिन निर्जला व्रत व भगवान सूर्य में असीम आस्था के बीच सशक्त राष्ट्र के निर्माण को लेकर व्रतियों ने सूर्योपासना व लोकतंत्र के महापर्व में एक साथ अपनी भागीदारी निभायी. छठ पर्व व मतदान एक ही दिन होने के बावजूद मतदाताओं में अपने मताधिकार के प्रयोग को लेकर खासा उत्साह दिखा.

सुबह छह बजते ही छठव्रती अपने-अपने मतदान केन्द्र पर पहुंचे और लंबी कतार में लगकर निष्पक्ष वोटिंग की. उसके बाद व्रती अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देने की तैयारी में जुट गए. शाम को महिला व पुरुष छठव्रतियों ने अपने आस-पास के नदी, तालाब सहित अन्य जलाशयों पर पहुंचकर डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया. व्रतियों ने सृष्टी के एकमात्र प्रत्यक्षदेव की आराधना कर देश की प्रगति व उन्नति की कामना की.
शहर के शाहपुर अखाड़ा निवासी मोहन सिंह का पूरा परिवार इन दोनों महापर्वों का गवाह बना. मोहन सिंह की पत्नी गीता सिंह, विनय सिंह व उनकी पत्नी राखी सिंह, संजय सिंह व उनकी पत्नी सविता सिंह व शहर के शाहपुर वार्ड 26 के पार्षद रजली देवी के पूरे परिवार ने छठव्रत करने के बावजूद गुरुवार की सुबह पहले देश गढ़ने के लिए मतदान किया .
38 डिग्री तापमान में भी कम नहीं पड़ा जोश
गुरुवार को औरंगाबाद का तापमान 38डिग्री सेल्सियस रहा. इसके बावजूद भी व्रतियों का मतदान को लेकर उत्साह फीका नहीं पड़ा और उन्होंने पूरे जोश व खरोश के साथ वोटिंग कर देश के प्रति अपना फर्ज अदा किया. चैत महीने में तपती धूप व भीषण गर्मी के कारण कार्तिक महीने में होने वाले छठ के तुलना में कम व्रती उपवास रखते हैं.
चैती छठ काफी कठिन और दुर्गम माना जाता है. ऐसे में कई व्रती घर से नहीं निकले पर कुछ लोगों ने खुद को सौभाग्यशाली समझते हुए इस दुर्लभ समय का लाभ उठाया और लोकतंत्र व सूर्योपासना का महापर्व एक साथ कर खुद को इतिहास का गवाह बनाया.
कोलकाता व ओमान से पहुंचे विनय व ज्योति
इतिहास में पहली बार ऐसा संयोग बना जब सूर्योपासना का महापर्व छठ व लोकसभा चुनाव को लेकर मतदान एक साथ हुआ. ये अपने आप में दो महापर्वों का संगम था. एक साथ इन दोनों महापर्वों का गवाह बनने के लिए शाहपुर अखाड़ा निवासी मोहन सिंह की बेटी ज्योति सिंह व दामाद निशांत सिंह कोलकाता से तो बेटे विनय सिंह ओमान से चल कर औरंगाबाद पहुंचे.
निर्जला व्रत के बीच सुबह उठ कर मतदान केंद्र पर पहुंचे और सबसे पहले देश के निर्माण के लिए वोटिंग कर अपनी दिन की शुरुआत की. वोटिंग के बाद उत्साहित पूरा परिवार ने अर्घ्य की तैयारी की और शहर के अदरी नदी स्थित सूर्यमंदिर घाट पर आदित्यमल को अर्घ दिया.
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