सदर अस्पताल को तो मॉडल अस्पताल का दर्जा सरकार द्वारा

औरंगाबाद नगर : सदर अस्पताल को तो मॉडल अस्पताल का दर्जा सरकार द्वारा दे दिया गया है, लेकिन इस अस्पताल की चिकित्सकीय व्यवस्था बदतर है. वैसे तो बाहर से दिखने में यह अस्पताल काफी खूबसूरत दिखता है, लेकिन अंदर की हालात काफी खराब है. यहां पर दर्द व बुखार के अलावा अन्य किसी प्रकार का […]
औरंगाबाद नगर : सदर अस्पताल को तो मॉडल अस्पताल का दर्जा सरकार द्वारा दे दिया गया है, लेकिन इस अस्पताल की चिकित्सकीय व्यवस्था बदतर है. वैसे तो बाहर से दिखने में यह अस्पताल काफी खूबसूरत दिखता है, लेकिन अंदर की हालात काफी खराब है. यहां पर दर्द व बुखार के अलावा अन्य किसी प्रकार का इलाज हो पाना संभव नहीं है. इसके पीछे कारण यही है कि चिकित्सकों की घोर कमी है. सबसे खराब हालत प्रसव कक्ष का है. वहां पहुंचने वाली गर्भवती महिलाओं का प्रसव एएनएम (नर्स) द्वारा कराया जाता है. जब प्रसूता की हालत बिगड़ जाती है तो कॉल पर एंबुलेंस भेज कर महिला चिकित्सक को बुलाया जाता है.
कभी-कभी महिला चिकित्सक कॉल पर आती है और मरीज को बहाना बना कर रेफर कर देती हैं. रात के समय में महिला चिकित्सक कॉल पर आने से कतराती हैं. यही कारण है कि चार जून की अहले सुबह एक महिला की मौत चिकित्सक की लापरवाही के कारण हो गयी. पता चला है कि दाउदनगर प्रखंड के सिपहा गांव निवासी सिकंदर राम की पत्नी गीता देवी (24) प्रसव पीड़ा से पीड़ित थीं. परिजनों ने प्रसव कराने के लिए रात्रि में सदर अस्पताल के प्रसव कक्ष में पहुंचाया. इसी बीच महिला की हालत बिगड़ने लगी. डयूटी पर कार्यरत एएनएम ने कॉल कर डयूटी में कार्यरत महिला चिकित्सक को आकर मरीज की हालत देखने के लिए कहा. यहां तक कि उन्हें लाने के लिए सरकारी एंबुलेंस को भी भेजा गया, लेकिन महिला चिकित्सक ने आने से साफ इन्कार कर गयी, जिसका परिणाम हुआ कि कुछ ही देर बाद महिला गीता देवी की मौत हो गयी.
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