लारी सती माई की महिमा है अपरंपार
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 06 Nov 2015 5:47 AM
कुर्था (अरवल) : अरवल के लारी सत्ती माई मंदिर आसपास के क्षेत्र में श्रद्धा व आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है. इस स्थान की ऐतिहासिकता के बारे में बताया जाता है कि उक्त स्थान पर सोनामती नाम की महिला अपने पति के शव के साथ सती हो गयीं थी. इसके बाद उस स्थान पर […]
कुर्था (अरवल) : अरवल के लारी सत्ती माई मंदिर आसपास के क्षेत्र में श्रद्धा व आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है. इस स्थान की ऐतिहासिकता के बारे में बताया जाता है कि उक्त स्थान पर सोनामती नाम की महिला अपने पति के शव के साथ सती हो गयीं थी. इसके बाद उस स्थान पर एक मंदिर का निर्माण किया गया .
जिसे लारी सती माई मंदिर के नाम से जाना जाता है. बताया जाता है कि जलने वाली नारी सोनामती वर्तमान जहानाबाद जिले के शकुराबाद थानान्तर्गत नौघड़ ग्राम के रामशरण सिंह के पुत्री थी . जिसकी शादी मात्र 16 वर्ष की अवस्था में लारी ग्राम के वसंत सिंह के पुत्र नबाव सिंंह से हुई थी. शादी के कुछ ही दिन बाद नबाव सिंह गया शहर में अतिसार से पीड़ित हो गये थे और उनकी मौत हो गयी थी. इसके बाद सोनामती ने सती होने का संकल्प लिया. आसपास के क्षेत्र में ऐसी मान्यता है कि यहां आने वाले लोगों के मन की मुरादें पूरी होती है.
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