सहरसा के मत्स्यगंधा के रक्तकाली चौसठ योगिनी मंदिर में उमड़ी श्रद्धा, मां के दरबार में भक्तों ने टेका माथा
Published by : Pratyush Prashant Updated At : 12 Jun 2026 9:18 AM
सहरसा के मत्स्यगंधा स्थित रक्तकाली चौसठ योगिनी मंदिर
Aaj Ka Darshan: सहरसा के मत्स्यगंधा स्थित रक्तकाली चौसठ योगिनी मंदिर में शुक्रवार को सुबह से ही श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा. मां रक्तकाली के दर्शन और आशीर्वाद के लिए बड़ी संख्या में भक्त मंदिर पहुंचे, जहां पूरे दिन भक्ति और शक्ति उपासना का माहौल बना रहा.
Aaj Ka Darshan: कोसी क्षेत्र के प्रमुख शक्तिपीठों में शामिल मत्स्यगंधा स्थित रक्तकाली चौसठ योगिनी मंदिर में आज श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली. सुबह की आरती के साथ मंदिर के कपाट खुलते ही भक्तों का आगमन शुरू हो गया. मां रक्तकाली और चौसठ योगिनियों के दर्शन कर श्रद्धालुओं ने परिवार की सुख-समृद्धि, शांति और मंगलमय जीवन की कामना की.
मां रक्तकाली के दरबार में उमड़ी आस्था
मंदिर परिसर में दिनभर श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रही. भक्तों ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर मां का आशीर्वाद प्राप्त किया. कई श्रद्धालुओं ने विशेष पूजा कर अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति की प्रार्थना भी की.
चौसठ योगिनियों की प्रतिमाएं बनती हैं आकर्षण का केंद्र
मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यहां स्थापित चौसठ योगिनियों की प्रतिमाएं हैं. श्रद्धालु मां रक्तकाली के साथ योगिनियों के दर्शन कर आध्यात्मिक ऊर्जा और शक्ति का अनुभव करते हैं. यही वजह है कि यह मंदिर तंत्र साधना और शक्ति उपासना का प्रमुख केंद्र माना जाता है.
भजन-कीर्तन से भक्तिमय रहा वातावरण
मंदिर परिसर में दिनभर मंत्रोच्चार, पूजा-पाठ और भजन-कीर्तन का माहौल बना रहा. घंटियों की गूंज और जयकारों से पूरा परिसर भक्तिमय वातावरण में डूबा रहा. श्रद्धालुओं ने दीप जलाकर मां के चरणों में अपनी श्रद्धा अर्पित की.
दूर-दराज से पहुंचे श्रद्धालु
सहरसा के अलावा सुपौल, मधेपुरा, पूर्णिया और आसपास के जिलों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे. स्थानीय लोगों का मानना है कि मां रक्तकाली के दरबार में सच्चे मन से मांगी गई हर मुराद पूरी होती है.
धार्मिक पर्यटन का भी प्रमुख केंद्र
मत्स्यगंधा स्थित रक्तकाली चौसठ योगिनी मंदिर न केवल आस्था का केंद्र है, बल्कि धार्मिक पर्यटन के लिहाज से भी महत्वपूर्ण स्थान रखता है. मंदिर का शांत वातावरण, आकर्षक परिसर और आध्यात्मिक ऊर्जा श्रद्धालुओं को बार-बार यहां आने के लिए प्रेरित करती है.
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लेखक के बारे में
By Pratyush Prashant
महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.
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