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न बोर्ड, न बेंच, कैसे होगी पढ़ाई

Updated at : 14 Jul 2015 1:25 AM (IST)
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न बोर्ड, न बेंच, कैसे होगी पढ़ाई

सामुदायिक भवन के बरामदे में पढ़ते हैं बच्चे, भवन निर्माण की राशि वापस हाल नवसृजित प्राथमिक विद्यालय, रामापुर मुसहरी का भवन निर्माण के लिए सैकड़ों ग्रामीणों ने डीएम को दिया था आवेदन स्थापना काल के नौ साल बाद भी नहीं बना भवन बरामदे में ही बनता है मध्याह्न् भोजन 2006 में धूमधाम से हुई थी […]

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सामुदायिक भवन के बरामदे में पढ़ते हैं बच्चे, भवन निर्माण की राशि वापस
हाल नवसृजित प्राथमिक विद्यालय, रामापुर मुसहरी का
भवन निर्माण के लिए सैकड़ों ग्रामीणों ने डीएम को दिया था आवेदन
स्थापना काल के नौ साल बाद भी नहीं बना भवन
बरामदे में ही बनता है मध्याह्न् भोजन
2006 में धूमधाम से हुई थी स्थापना
वंशी (अरवल) : स्थापना काल के नौ साल बाद भी नवसृजित प्राथमिक विद्यालय, रामापुर मुसहरी का अपना भवन नहीं है. भवन के अभाव में स्कूल के छात्र-छात्राओं की पढ़ाई स्थापना काल से आज तक सामुदायिक भवन के बरामदे में होती है.
वर्ष 2006 में रामापुर मुसहरी में नवसृजित विद्यालय का स्थापना बड़ी धूमधाम से की गयी थी. करपी इमामगंज मुख्य पथ में बसे रामापुर मुसहरी गांव की आबादी लगभग दो हजार से ऊपर है. इस गांव में रहनेवाले महादलित (मुसहर) जाती के लोग शिक्षा से हमेशा वंचित रहे हैं. ये लोग मजदूरी कर अपना घर-परिवार चलाते हैं. यह गांव आदर्श पंचायत खजुरी के अंतर्गत आता है.
पूर्व जिलाधिकारी विमल नंद ने जब गांव स्थित मध्य विद्यालय के प्रांगण में जनता दरबार लगाया था, तब रामापुर मुसहरी के सैकड़ों महिलाएं व पुरुषों ने डीएम को लिखित आवेदन देकर विद्यालय के भवन निर्माण की मांग की थी. डीएम ने भी लोगों को शिक्षा के प्रति झुकाव देख कर आश्वासन दिया था कि विद्यालय का भव्य भवन बनाया जायेगा, लेकिन वर्षो बीत जाने के बाद भी आज तक विद्यालय का भवन नहीं बना. स्थानीय लोगों का कहना है कि विद्यालय के भवन निर्माण की लाखों की राशि बैंक के खाते की शोभा बढ़ा रही है, परंतु निर्माण कार्य शुरू नहीं कराया जा रहा है.
कपिल मांझी, सुख मांझी, लालती देवी, सुगवा देवी ने बताया कि स्कूली बच्चे पढ़ने के बजाय रोड निहारते हैं, क्योंकि भवन के अभाव में सामुदायिक भवन के बरामदे में वर्ग एक से लेकर वर्ग पांच तक के बच्चे पढ़ते हैं. बच्चों को पढ़ाने के लिए एक अदद बोर्ड तक नहीं है, न ही बैठने के लिए बेंच है.
बच्चे बरामदे में फर्श पर बैठ कर पढ़ाई करते हैं, जबकि इसी बरामदे में बच्चों का एमडीएम भी बनता है, जिससे बच्चों को काफी परेशानी होती है. गरमी के दिनों में तो किसी तरह से बच्चों को बैठाया जाता है, परंतु बरसात के दिनों में बैठने की भी जगह नहीं रहती है.
प्रभारी प्रधानाध्यापक मीना कुमारी ने बताया कि विद्यालय में 224 छात्र-छात्राएं नामांकित हैं. उन्होंने बताया कि विद्यालय भवन के लिए 25 डिसमिल जमीन का एनओसी मिला है, परंतु मिट्टी की कटाई होने से उस जमीन में बड़े गड्ढे हो गये है, जिसके कारण विद्यालय का भवन नहीं बन सका. विद्यालय भवन की राशि के संबंध में उन्होंने बताया कि भवन निर्माण के लिए पांच लाख रुपये मिले थे, जो फिलहाल लौटा दिया गया है.
उन्होंने बताया कि सामुदायिक भवन में एक कमरा होने के कारण बच्चों की पढ़ाई बरामदे में की जाती है. कमरे में मध्याह्न् भोजन का चावल, दाल, जलावन सहित अन्य सामग्री भरा है. विद्यालय के छात्र व अभिभावकों ने डीएम से तत्काल भवन निर्माण कराने की मांग की है. अभिभावकों ने कहा है कि अगर शीघ्र ही भवन का निर्माण नहीं कराया गया, तो ग्रामीण संगठित होकर करपी-इमामगंज मुख्य पथ पर धरना-प्रदर्शन देंगे.
जलजमाव से पढ़ाई बाधित
कलेर. लगातार हो रही बारिश से कोमल भूपत ग्राम स्थित प्राथमिक विद्यालय के बच्चों की पढ़ाई बाधित है. इस्लामपुर कोमल के पूर्व मुखिया अजय कुमार ने बताया कि प्राथमिक विद्यालय का प्रांगण काफी नीचा है, जिससे जलजमाव हो गया है.
विद्यालय में छोटे-छोटे बच्चे पढ़ते हैं, जो जिन्हें जलजमाव से होकर गुजरना पड़ता है. भूतपूर्व मुखिया अजय कुमार ने बताया कि विद्यालय के अलावा ग्राम में भी पानी जमा हो गया है, जिससे घर से निकलना काफी मुश्किल हो गया है. उन्होंने बताया कि जलजमाव के कारण करीब एक हजार बीघे जमीन में डूबे हुए हैं.
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