बरखास्त पीआरएस ने किया आत्मदाह का प्रयास
Updated at : 07 Jul 2015 7:25 AM (IST)
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अरवल : जिले में कार्यरत 41 पंचायत रोजगार सेवक बरखास्त किये जाने के विरोध में पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत समाहरणालय के समक्ष आत्मदाह करने की कोशिश की, लेकिन पुलिस की तत्परता के कारण उनका प्रयास विफल हो गया. इस दौरान पुलिस व पंचायत रोजगार सेवकों के बीच हल्की नोक-झोंक भी हुई. आंदोलनकारी पंचायत रोजगार […]
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अरवल : जिले में कार्यरत 41 पंचायत रोजगार सेवक बरखास्त किये जाने के विरोध में पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत समाहरणालय के समक्ष आत्मदाह करने की कोशिश की, लेकिन पुलिस की तत्परता के कारण उनका प्रयास विफल हो गया.
इस दौरान पुलिस व पंचायत रोजगार सेवकों के बीच हल्की नोक-झोंक भी हुई.
आंदोलनकारी पंचायत रोजगार सेवक जिला प्रशासन व नीतीश कुमार के विरोध में जम कर नारे भी लगा रहे थे. बताते चलें कि अपनी मांगों के समर्थन में जिले में कार्यरत सभी पंचायत रोजगार सेवक पिछले दिनों से हड़ताल पर चल रहे थे, जिसके कारण 41 पंचायत रोजगार सेवकों को सरकार ने बरखास्त करने का आदेश दिया था.
इसके बाद रोजगार सेवक संघ द्वारा आत्मदाह करने की घोषणा की गयी थी. पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत सोमवार को मनरेगा भवन से समाहरणालय के मुख्य द्वार तक जगरनाथ प्रसाद की अध्यक्षता में प्रतिरोध मार्च निकाला गया. इस दौरान आक्रोशित कर्मियों द्वारा नारे भी लगाये जा रहे थे. समाहरणालय के मुख्य द्वार पर पहुंचते ही पुलिस के साथ प्रवेश करने के सवाल पर नोक-झोंक शुरू हो गयी.
रोजगार सेवकों ने इस दौरान अपने शरीर के ऊपर तेल डाल कर आत्मदाह करने की कोशिश भी की, लेकिन फायर ब्रिगेड व स्थानीय पुलिस के सहयोग से असफल कर दिया गया. इस दौरान एनएच 110 एक घंटे तक बाधित रहा. प्रशासनिक पदाधिकारियों के प्रयास के बाद आक्रोशित कर्मियों को शांत करा कर डीएम से वार्ता भी करायी गयी. वार्ता में प्रदेश महामंत्री रंजीत कुमार, सासाराम जिलाध्यक्ष मनोज कुमार, आरा जिलाध्यक्ष सुनील कुमार, राजीव कुमार, विनोद कुमार, निर्मल कुमार शामिल थे.
सरकार का तानाशाही रवैया : माले
अरवल : हड़ताल पर गये पंचायत रोजगार सेवकों (पीआरएस) को बरखास्त करना सरकार के तानाशाही रवैया का परिचय देता है. पंचायत रोजगार सेवकों के साथ सरकार के जनविरोधी रवैया के खिलाफ आगे आना होगा. उक्त बातें भाकपा माले के जिला सचिव महानंद ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कही.
उन्होंने कहा कि सरकार पंचायत रोजगार सेवकों की समस्या को सुने बगैर कार्रवाई कर रही है. अपने संवैधानिक अधिकार के तहत अपनी मांग को मांगने क ा अधिकार सभी कर्मियों को है.
लेकिन, इस प्रकार से संवैधानिक अधिकार के तहत लड़ाई करनेवाले लोगों को पद से बरखास्त किया जा रहा है. जो बिल्कुल अन्याय है. उन्होंने सरकार से मांग की कि जिन पंचायत रोजगार सेवक पर कार्रवाई की गयी है, उसे फौरन वापस ले. इस अवसर पर कार्यालय सचिव प्रकाश, विजय यादव के अलावा अन्य लोग उपस्थित थे.
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