पगडंडी के सहारे आते और जाते हैं ग्रामीण

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 24 Apr 2015 8:08 AM

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आज तक नहीं पहुंची बिजली, अंधेरे में रहने की है विवशता देहाती एंबुलेंस (खटिया) पर लिटा कर मरीजों को तीन किलोमीटर दूर ले जाते हैं कुर्था बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं ग्रामीण कुर्था (अरवल) : भले ही राज्य सरकार सूबे के सभी गांवों में बिजली पहुंचाने की बात कहती हो, परंतु हकीकत यह है कि […]

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आज तक नहीं पहुंची बिजली, अंधेरे में रहने की है विवशता
देहाती एंबुलेंस (खटिया) पर लिटा कर मरीजों को तीन किलोमीटर दूर ले जाते हैं कुर्था
बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं ग्रामीण
कुर्था (अरवल) : भले ही राज्य सरकार सूबे के सभी गांवों में बिजली पहुंचाने की बात कहती हो, परंतु हकीकत यह है कि आज भी कुर्था प्रखंड के मेरोगंज गांव लालटेन युग में जीने को विवश है. वहीं उक्त गांव बुनियादी सुविधाओं से भी वंचित है.
उक्त गांव में जाने के लिए पगडंडी ही एकमात्र सहारा है. उक्त गांव में स्वास्थ्य सुविधाएं भी नगण्य है. मजबूरन रात्रि में भी गांव के लोग जब बीमार पड़ते है, तो देहाती एंबुलेंस (खटिया) पर लिटा कर मरीजों को तीन किलोमीटर की दूरी तक कर कुर्था प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लाया जाता है. उक्त गांव में स्वास्थ्य की सुविधा न रहने से जब कभी मरीज कुर्था पीएचसी आते रास्ते में भी दम तोड़ देता है. इस बाबत मेरोगज गांव निवासी राजेंद्र यादव ने बताया कि उक्त गांव आजादी के 67 वर्षो के बाद भी बुनियादी सुविधा से वंचित है.
उक्त गांव में जाने को न सड़क है, न स्वास्थ्य की सुविधा और तो और ये गांव आज भी लालटेन युग में जीने को विवश लोगों को मोबाइल चार्ज भी कराने के लिए कुर्था जाना पड़ता है. वहीं मेरोगज गांव निवासी सह कुर्था पूर्व प्रखंड प्रमुख बालेश्वर सिंह ने बताया कि उक्त गांव के विकास से अब तक महरूम है. उक्त गांव में न बिजली की सुविधा है और न ही गांव में जाने के लिए सड़क. स्वास्थ्य की बात की जाये, तो रात में भी रोगी को इलाज के लिए कुर्था जाना पड़ता है. वहीं ग्रामीण अजीत सिंह ने बताया कि उक्त गांव विकास के मामले में अब तक पिछड़ा है.
बावजूद अब तक किसी भी जनप्रतिनिधि का ध्यान इस ओर आकृष्ट नहीं हो सका है. वहीं उमा पंडित ने बताया कि चुनाव के दौरान उक्त गांव में जानेवाले जनप्रतिनिधि घोषणओं की झड़ी लगाते हैं परंतु निर्वाचन के बाद क्षेत्र की तरफ मुड़ कर भी देखना मुनासिब नहीं समझते हैं. आखिर कब तक यह गांव बुनियादी सुविधा से लैस होगा.
उक्त गांव की आबादी लगभग 100 घरों की है. ऐसे में इनकी संख्या भी लगभग काफी है, बावजूद अब तक उक्त गांव में बुनियादी सुविधा से वंचित है.
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