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संघर्ष करनेवालों को जेल भेज रही है सरकार

Updated at : 14 Apr 2015 6:45 AM (IST)
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संघर्ष करनेवालों को जेल भेज रही है सरकार

अरवल : जिला मुख्यालय के सदर प्रखंड में मुंबई ट्रेड यूनियन के नेता राजेंद्र यादव के नेतृत्व में जन आंदोलन समिति के बैनर तले आमरण अनशन का शुभारंभ सैक ड़ों कार्यकर्ताओं के साथ शुरू किया गया. अनशन पर बैठने के पूर्व यादव के नेतृत्व में अनशन कारियों ने डॉ भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण […]

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अरवल : जिला मुख्यालय के सदर प्रखंड में मुंबई ट्रेड यूनियन के नेता राजेंद्र यादव के नेतृत्व में जन आंदोलन समिति के बैनर तले आमरण अनशन का शुभारंभ सैक ड़ों कार्यकर्ताओं के साथ शुरू किया गया.
अनशन पर बैठने के पूर्व यादव के नेतृत्व में अनशन कारियों ने डॉ भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया.अनशन सभा को संबोधित करते हुए डॉ यादव ने कहा कि जन आंदोलन के माध्यम से सरकार द्वारा कानून के दुरुपयोग के खिलाफ लोगों में आक्रोश है. 12 मार्च को करपी थाना अंतर्गत बहारा निवासी रघुवंश सिंह की मृत्यु ट्रैक्टर से कुचल कर हो गयी थी.
मृत्यु के बाद परिजनों द्वारा मुआवजा की मांग की गयी थी. मृत्यु के बाद परिजनों द्वारा मुआवजे की मांग की गयी थी. सैकड़ों लोगों के बीच प्रशासन के लोग विभिन्न मद से मुआवजा देने का आश्वासन दिया था. चार दिन बाद पता चला कि करपी थाना प्रभारी द्वारा मृतक के परिजन सहित 20 लोगों पर धारा 353, 149 एवं 147 के तहत मुकदमा किया गया है. मैं पूूछना चाहता हूं कि क्या अपने मौलिक अधिकारों की सुरक्षा के लिए सड़क पर उतरना गैर कानूनी है.
भारतीय संविधान द्वारा हमें अधिकार दिया गया है कि हम अधिकार के लिए सड़क से सांसद तक संघर्ष कर सकते हैं, लेकिन मुआवजा देने के बजाय संघर्ष करनेवाले लोगों को सरकार जेल भेजने का काम कर रही है. सरकार मौलिक अधिकारों का हनन कर राज्य तंत्र स्थापित करना चाहती है.
इसे हम लोग बरदाश्त नहीं कर सकते. अगर हमारी मांगें शीघ्र पूरी नहीं की गयी तो प्रशासन के खिलाफ संघर्ष और तेज किया जायेगा. मुख्य मांगों में करपी बहारा दुर्घटना में निदरेष लोगों पर किये गये मुकदमा वापस लेना, करपी थाना प्रभारी को बरखास्त करना, जन आंदोलन करने पर किये गये मुकदमा को वापस लेना, दुर्घटना में मारे गये सभी लोगों के परिजनों को मुआवजा के शीघ्र भुगतान के अलावा अन्य मांगे शामिल हैं.
धरना को विनोद राय ,रंजय कुमार के अलावा अन्य लोगों ने संबोधित करते हुए धारा 353 के दुरुपयोग को रोकने की मांग की.
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