अरवल में मनरेगा योजना पूरी तरह विफल

* मनरेगा में काम मिलता, तो नगला मुसहरी के छह लोगों की मौत नहीं होतीअरवल (सदर) : कामगार मजदूरों को सौ दिन काम मुहैया कराने एवं घर से बाहर काम के लिए पलायन करनेवाले मजदूरों को पलायन रोकने के लिए सरकार द्वारा शुरू की गयी कल्याणकारी योजना मनरेगा अरवल जिला में पूरी तरह विफल साबित […]
* मनरेगा में काम मिलता, तो नगला मुसहरी के छह लोगों की मौत नहीं होती
अरवल (सदर) : कामगार मजदूरों को सौ दिन काम मुहैया कराने एवं घर से बाहर काम के लिए पलायन करनेवाले मजदूरों को पलायन रोकने के लिए सरकार द्वारा शुरू की गयी कल्याणकारी योजना मनरेगा अरवल जिला में पूरी तरह विफल साबित होते दिख रहा है.
मनरेगा के तहत मजदूरों को काम देने के लिए जॉब कार्ड मिला है लेकिन इन जॉब कार्ड पर मजदूरों को काम देने के लिए शासन प्रशासन और जनप्रतिनिधि के पास कोई ठोस योजना नहीं है. इसके चलते आज भी अरवल जिले के मजदूर अपने परिवार के भरण-पोषण करने के लिए ईंट भट्ठा, जोतनी, कोड़नी कर के किसी तरह परिवार को दो वक्त की रोटी का जुगाड़ कर रहे हैं.
कई ऐसे परिवार हैं, जो काम के अभाव में आज भी राज्य में पलायन कर रहे हैं. दिन भर मजदूरी कर और सुअर पाल कर अपने परिवार को जीविका चलानेवाले जॉब कार्डधारी मजदूरों ने बताया कि काम नहीं मिलता है, जिसके कारण हमलोग इधर-उधर काम के लिए मारे फिरते हैं. गौरीचक में छह लोगों की मौत हुई वह भी काम करने के लिए घर से बाहर गये थे लेकिन इन मृतक परिवार को सुधि लेने के लिए स्थानीय वरीय पदाधिकारी द्वारा अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है.
इस संबंध में एसडीओ ने संपर्क करने पर बताया कि लेवर इंस्पेक्टर, बीडीओ एवं अन्य पदाधिकारी को गांव जाने का निर्देश दिया है. सरकारी नियमानुसार संगठित मजदूरों को जो लाभ मिलता है सभी मृतक परिवार को दिलाने का पूरा-पूरा प्रयास किया जायेगा.
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