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एएनएम कर रहीं कुपोषितों का इलाज, नहीं आते डॉक्टर

Updated at : 25 May 2018 4:30 AM (IST)
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एएनएम कर रहीं कुपोषितों का इलाज, नहीं आते डॉक्टर

साफ-सफाई की व्यवस्था भी ठीक नहीं बेड पर नहीं बिछायी जाती चादर अरवल : बिहार सरकार द्वारा वर्ष 2011 में सदर अस्पताल परिसर में कुपोषित बच्चों के इलाज के लिए 20 बेड का पोषण पुनर्वास केंद्र का शुभारंभ किया गया था. इसका उद्देश्य था कि जिले के कुपोषित बच्चों को चिह्नित कर पुनर्वास केंद्र में […]

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साफ-सफाई की व्यवस्था भी ठीक नहीं

बेड पर नहीं बिछायी जाती चादर
अरवल : बिहार सरकार द्वारा वर्ष 2011 में सदर अस्पताल परिसर में कुपोषित बच्चों के इलाज के लिए 20 बेड का पोषण पुनर्वास केंद्र का शुभारंभ किया गया था. इसका उद्देश्य था कि जिले के कुपोषित बच्चों को चिह्नित कर पुनर्वास केंद्र में रखकर स्वस्थ बनाना. इस पोषण पुनर्वास केंद्र के संचालन में लाखों रुपये प्रतिमाह खर्च किये जा रहे हैं. केंद्र के सफल संचालन का जिम्मा नारी कल्याण संस्थान पटना को दिया गया, लेकिन संचालन सही तरीके से नहीं किया जा रहा है. संस्थान ने पुनर्वास केंद्र में एक डॉक्टर, एएनएम व अन्य कर्मी को तैनात किया है, लेकिन चिकित्सक न के बराबर आते हैं व कुपोषित बच्चों का इलाज एएनएम के सहारे चल रहा है. जबकि पुनर्वास केंद्र में कुपोषित बच्चों को 14 से 21 दिनों तक रखकर इलाज कर व प्रोटीनयुक्त खाना देकर स्वस्थ बनाना है. केंद्र में तैनात डॉक्टर भगवान शर्मा कभी-कभार ही आते हैं और एक-दो घंटे बाद चले जाते हैं.
मरीज के परिजनों की व्यथा
पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती मरीज की मां बलवंती देवी ने बताया कि हम अपने बच्चे को लेकर 18 दिनों से पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती हैं, लेकिन चिकित्सक मात्र दो बार हमारे बच्चे को देखे हैं. इससे स्पष्ट होता है कि पोषण पुनर्वास केंद्र में चिकित्सक कुपोषित बच्चों को किस तरह इलाज कर रहे हैं. इसी तरह प्रमीला देवी ने बताया कि हम अपने बच्चों को लेकर 13 दिनों से केंद्र में भर्ती हैं, लेकिन 13 दिन के अंदर मात्र एक बार चिकित्सक द्वारा देखा गया है. केंद्र में साफ-सफाई की व्यवस्था भी ठीक नहीं है. बिना चादर के बेड पर पर बच्चों के साथ परिजन रहने को मजबूर हैं.
पुनर्वास केंद्र का निरीक्षण किया जाता है. चिकित्सक के कभी-कभी आने की जानकारी मिली है. चिकित्सक घंटा दो घंटा रह कर चले जाते हैं. कार्रवाई के लिए प्रतिवेदन सीएस के पास भेजा है. वर्ष 2016-17 में 255 व वर्ष 2017-18 में 234 कुपोषित बच्चों का इलाज किया गया है.
रोहित कुमार, प्रभारी जिला योजना समन्वयक, जिला स्वास्थ्य समिति
पोषण पुनर्वास केंद्र के बारे में अन्य लोगों से भी शिकायत मिली है. मामले की जांच करायी जायेगी व नहीं आनेवाले चिकित्सक पर कार्रवाई की जायेगी. पोषण पुनर्वास केंद्र को हर हाल में सही ढंग से संचालन कराया जायेगा.
डॉ राजकुमार शर्मा, सिविल सर्जन
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