काला कानून है शराबबंदी

करपी : प्रखंड कार्यालय के प्रांगण में भाकपा-माले व खेत मजदूर सभा द्वारा शनिवार को शराबबंदी को काले कानून की संज्ञा देते हुए इसके विरोध में एक दिवसीय धरने का आयोजन किया गया. धरनार्थियों को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि शराबबंदी एक काला कानून है इसके माध्यम से पुलिस द्वारा गरीबों पर अत्याचार […]
करपी : प्रखंड कार्यालय के प्रांगण में भाकपा-माले व खेत मजदूर सभा द्वारा शनिवार को शराबबंदी को काले कानून की संज्ञा देते हुए इसके विरोध में एक दिवसीय धरने का आयोजन किया गया. धरनार्थियों को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि शराबबंदी एक काला कानून है इसके माध्यम से पुलिस द्वारा गरीबों पर अत्याचार किया जा रहा है. वक्ताओं ने कहा कि शराब व ताड़ी का सेवन एक खाद्य सामग्री का रूप धारण कर लिया है. इससे छुटकारा पाना आसान नहीं है.
हम सभी जानते हैं कि शराब और ताड़ी का सेवन एक सामाजिक बुराई है. एक लंबी प्रक्रिया के तहत ही शराब व ताड़ी के सेवन से छुटकारा पाया जा सकता है. सभी जानते हैं कि गरीब दलित मजदूर दिन भर काम करने के बाद शराब व ताड़ी का सेवन कर अपनी थकान मिटाते हैं, लेकिन दो वर्षों में नीतीश सरकार ने इसे अपराध की श्रेणी में रखते हुए शराब का सेवन व बिक्री करने वालों के खिलाफ कड़े कानून बनाये हैं. इसे सर्वाधिक गरीब लोग प्रभावित हो रहे हैं. हाल ही में जहानाबाद में दो सहोदर भाई मस्तान मांझी व पेंटर मांझी को पुलिस ने शराब सेवन के जुर्म में गिरफ्तार कर जेल में बंद कर दिया और मात्र 40 दिनों की सुनवाई के बाद न्यायालय ने दोनों भाइयों को पांच वर्ष का कारावास एवं एक लाख रुपये का जुर्माना लगा दिया. जबकि जहानाबाद-अरवल जिले का बहुचर्चित बाथे नरसंहार के आरोपियों की
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By Prabhat Khabar Digital Desk
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