आस्था, परंपरा व ज्ञान का संगम बना श्री राम ठक्कूर बाबा स्थान

Published by :MRIGENDRA MANI SINGH
Published at :30 Apr 2026 6:47 PM (IST)
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आस्था, परंपरा व ज्ञान का संगम बना श्री राम ठक्कूर बाबा स्थान

डेढ़ सौ वर्षों से निभ रही है परंपरा

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सच्चे मन से मांगने वालों की मुरादें होती हैं पूरी

भरगामा. भरगामा प्रखंड क्षेत्र के सिरसिया कला पंचायत अंतर्गत वार्ड संख्या 05 ब्राह्मण टोला स्थित ग्राम देवता श्री राम ठक्कूर बाबा स्थान इन दिनों न केवल ग्रामीणों की अटूट आस्था का केंद्र बना हुआ है. बल्कि यह स्थल ज्ञान, संस्कार व सामाजिक एकता का भी प्रतीक बनता जा रहा है. मान्यता है कि यहां सच्चे मन से पूजा-अर्चना करने वाले श्रद्धालुओं की हर मुराद पूरी होती हैं व बाबा की कृपा से जीवन में सफलता, सुख-समृद्धि व ज्ञान का मार्ग प्रशस्त होता है.

वार्षिक पूजा में शामिल होने हर वर्ष पहुंचते हैं श्रद्धालु

ग्रामीणों का कहना है कि ग्राम देवता श्री राम ठक्कूर बाबा के आशीर्वाद से गांव के दर्जनों युवक-युवतियां आज जिले, प्रदेश हीं नहीं बल्कि देश-विदेश में भी अच्छे पदों पर कार्यरत हैं. यही कारण है कि गांव से बाहर रहने वाले लोग भी हर वर्ष बैशाख मास के शुक्ल पक्ष में आयोजित होने वाली वार्षिक पूजा में शामिल होने के लिए अपने गांव लौटते हैं.

वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हुआ भव्य वार्षिक पूजन

श्री राम ठक्कूर बाबा स्थान पर आयोजित दो दिवसीय वार्षिक महोत्सव मंगलवार को विधिवत आरंभ हुआ, जिसका समापन बुधवार को हुआ. इस दौरान विद्वान पंडितों द्वारा सभी ग्रामीण परिवारों के नाम से संकल्प लेकर सवा लाख पार्थिव महादेव पूजन व नौ आवृत्ति दुर्गा पाठ कराया गया. पूरे परिसर में वैदिक मंत्रोच्चार, घंटा-घड़ियाल व शंखध्वनि से वातावरण पूरी तरह भक्तिमय बना रहा. पूजा-अर्चना के उपरांत परंपरा के अनुसार 108 कुंवारी कन्याओं व 108 ब्राह्मणों को आदरपूर्वक खीर भोजन कराया गया.वहीं उपस्थित सैकड़ों श्रद्धालु भक्तों के बीच महाप्रसाद का वितरण भी किया गया. ग्रामवासियों ने सामूहिक रूप से अपने परिवार, समाज, जिला व समस्त देशवासियों की सुख-शांति, समृद्धि व मंगलकामना के लिए ग्राम देवता के समक्ष प्रार्थना की.

डेढ़ सौ वर्षों से निभ रही है परंपरा

मंदिर के प्रधान पुजारी पंडित माधव झा ने बताया कि यह धार्मिक परंपरा लगभग डेढ़ सौ वर्ष पुरानी है. गांव में किसी भी शुभ कार्य चाहे विवाह हो, यज्ञ हो, गृह प्रवेश हो या अन्य मांगलिक आयोजन की शुरुआत से पूर्व राम ठक्कूर बाबा के दरबार में दंडवत प्रणाम कर उन्हें निमंत्रण दिया जाता है व आशीर्वाद स्वरूप आदेश लेने के बाद ही कार्य प्रारंभ किया जाता है. यह परंपरा आज भी पूरी श्रद्धा व नियम के साथ निभाई जा रही है.

आस्था के साथ सामाजिक एकता का संदेश

वार्षिक पूजन के अवसर पर गांव सहित देश-विदेश में रह रहे प्रवासी ग्रामीण भी बड़ी संख्या में उपस्थित हुए. सभी ने एकजुट होकर पूजा-अर्चना की व ग्राम देवता से गांव की उन्नति, परिवार की खुशहाली व समाज में भाईचारा बनाए रखने की कामना की. आयोजन को सफल बनाने में गांव के नवयुवकों ने बढ़-चढ़कर जिम्मेदारी निभाई. पूजा व्यवस्था, प्रसाद वितरण, श्रद्धालुओं की सेवा व साफ-सफाई से लेकर हर व्यवस्था में युवाओं की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली.

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