ePaper

लोगों ने श्रद्धापूर्वक की गोवर्धन पूजा

Updated at : 22 Oct 2025 6:41 PM (IST)
विज्ञापन
लोगों ने श्रद्धापूर्वक की गोवर्धन पूजा

पूजा को लेकर माहोल हुआ भक्तिमय

विज्ञापन

अररिया. जिले में गोवर्धन पूजा श्रद्धापूर्वक की गयी. यह पर्व कार्तिक शुक्ल पक्ष प्रतिपदा के दिन अन्नकूट के नाम से भी जाना जाता है. हिंदू लोक जीवन में इस पर्व का विशेष महत्व है. जो प्रकृति व मानव के सीधे संबंध को दर्शाता है. गोवर्धन पूजा में गोधन यानी गायों की पूजा की जाती है. शास्त्रों के अनुसार, गायों को गंगा नदी के समान पवित्र व देवी लक्ष्मी का स्वरूप माना गया है. गौ माता अपने दूध से स्वास्थ प्रदान करती है. साथ हीं उनके बछड़े वंश वृद्धि व खेतों में अनाज उगाने में सहायक होते हैं. इस पर्व के पीछे एक लोककथा है. जिसके अनुसार भगवान कृष्ण ने ब्रजवासियों को मूसलाधार बारिश से बचाने के लिए सात दिनों तक गोवर्धन पर्वत को अपनी सबसे छोटी उंगली तर्जनी पर उठाकर रखा था. ब्रजवासी उसकी छाया में सात दिन तक सुरक्षित रहें. सातवें दिन भगवान कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को नीचे रखा था. वहीं प्रतिवर्ष गोवर्धन पूजा व अन्नकूट उत्सव मनाने का लोगों से आग्रह किया तभी से यह उत्सव अन्नकूट के नाम से मनाया जाने लगा.

गोवर्धन पूजा शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न

कुर्साकांटा. बुधवार को प्रखंड क्षेत्र में गोवर्धन पूजा हर्षोल्लास के साथ मनाया गया. मान्यता है कि गोवर्धन पूजा के दिन महिलाएं जहां गौशाला की साफ सफाई के साथ लिपाई पुताई किया जाता है. इसके साथ ही पशुपालक अपने अपने पशुओं को स्नान कराकर उसे नयी डोरी, घंटी सहित मवेशियों को पहनाने वाले वस्तुओं से तैयार कर उसकी पूजा की जाती है. इस पर्व पर अलग-अलग जगहों पर मान्यता है कि इस दिन मवेशियों का रेस का भी आयोजन किया जाता है. जिसमें सफल प्रतिभागियों को पुरस्कृत करने का भी विधान है.9

——–

श्रद्धालुओं ने की गोवर्धन की पूजा-अर्चना

पलासी. गोवर्धन पर्व बुधवार को धूमधाम से मनाया गया. मंदिरों व घरों में गाय के गोबर से गोवर्धन महाराज की आकृति बनाकर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गयी. कई मंदिरों में अन्नकूट प्रसाद के भंडारे का भी आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया. श्रद्धालुओं ने बताया कि गोवर्धन पूजा भगवान श्रीकृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत को अपनी उंगली पर उठाकर भक्तों की इंद्रदेव के प्रकोप से रक्षा करने की स्मृति में की जाती है. भगवान इंद्रदेव ने भारी वर्षा की थी, लेकिन श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत उठाकर गोकुलवासियों को बचाया था. इस दिन भगवान श्रीकृष्ण को छप्पन भोग भी अर्पित किए जाते हैं. परंपरागत रूप से गोवर्धन पूजा दीपावली के अगले दिन की जाती है. 10

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

विज्ञापन
PRAPHULL BHARTI

लेखक के बारे में

By PRAPHULL BHARTI

PRAPHULL BHARTI is a contributor at Prabhat Khabar.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन