महाराष्ट्र के मदरसे से 80 बच्चों का रेस्क्यू, आज पहुंचेंगे पटना

Edited by PRAPHULL BHARTI
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बच्चे मदरसा में रुकने को तैयार नहीं हुए

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अररिया. महाराष्ट्र के कोल्हापुर से 80 बच्चों को रेस्क्यू कर पटना लाया जा रहा है. जहां से सभी बच्चों को उनके परिजनों को सौंप दिया जायेगा. इसकी जानकारी देते हुए जिला बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष दीपक कुमार वर्मा उर्फ रिंकू वर्मा ने बताया कि सभी बच्चे पूर्णिया व अररिया निवासी हैं. उन्होंने आगे बताया कि कोल्हापुर के स्थानीय प्रशासन द्वारा स्थानीय मदरसों की विशेष जांच के दौरान करीब सात दर्जन बच्चों को रेस्क्यू कर बरामद किया गया है. जिसमें जांच के दौरान मदरसा अलाटे कोल्हापुर में बिना माता-पिता के 81 बच्चे पाये गये. उनमें से 01 बच्चे को उसके माता-पिता को सौंप दिया गया है व शेष 80 बच्चे मदरसा आलेट में रहने के लिए तैयार नहीं हुए. उक्त मदरसा उन्हें असुरक्षित महसूस हो रहा था. बच्चों ने अपने मूल स्थान वापस जाने की इच्छा व्यक्त की. वे मदरसे में रुकने को तैयार नहीं हुए. बच्चों के हितों को ध्यान में रखते हुए, सीडब्ल्यूसी कोल्हापुर ने जेजे एक्ट 2(14) बनाम के तहत 80 बच्चों को देखभाल व संरक्षण की आवश्यकता घोषित की. जिसमें सभी बच्चे अररिया व पूर्णिया जिले के पाये गये हैं. इसलिए उन्हें एस्कॉर्ट की देख रेख में समाज कल्याण निदेशालय, समाज कल्याण विभाग, पटना के निदेशक को पत्र भेजकर स्थानांतरित किया गया है. जिला बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष दीपक कुमार वर्मा ने बताया कि सभी बच्चों को किशोर न्याय अधिनियम 2015 की धारा 95(1) के अनुसार स्थानांतरण किया गया है. जिसमें 80 बच्चों को 29 सितंबर 2025 को ट्रेन द्वारा कोल्हापुर से पटना भेजा जा रहा है. सभी बच्चे 29 सितंबर की संध्या 08 बजे पटना (दानापुर) पहुंचेंगे. भेजे गये पत्र में डीसीपीयू कोल्हापुर की टीम व पुलिस विभाग के अधिकारियों का विवरण व 80 बच्चों के माता पिता घर व मोबाइल नंबर की सूची संलग्न की गयी है. जिला बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष ने बताया कि बच्चों के संरक्षण मामले में माननीय उच्च न्यायालय व न्यायमंडल अररिया के प्रधान जिला व सत्र न्यायाधीश गुंजन पांडेय बेहद संवेदनशील है. किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम, 2015 (2021 में संशोधित) व यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम, 2012 व अन्य बाल संबंधी कानूनों के प्रभावी कार्यान्वयन पर कई बार समन्वय बैठक बुलाकर समीक्षा की गयी है. साथ ही बाल संरक्षण को लेकर कई निर्देश दिये गये हैं. इधर समाज कल्याण विभाग सह निदेशालय ने बाल कल्याण समिति, कोल्हापुर (महिला एवं बाल विकास विभाग) द्वारा भेजे पत्र पर संज्ञान लेते हुए कार्यालय आदेश दिया है कि उक्त सभी बिंदुओं पर विचार करते हुए संबंधित सभी जिला बाल संरक्षण इकाई बच्चों की काउन्सिलिंग सुनिश्चित करेंगे.

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