प्रारंभिक अवस्था में समुचित इलाज से बचायी जा सकती है चमकी बुखार से जान

Updated at : 22 Jun 2019 8:18 AM (IST)
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प्रारंभिक अवस्था में समुचित इलाज से बचायी जा सकती है चमकी बुखार से जान

अररिया : चमकी बुखार यानी एइएस को लेकर शुक्रवार का आयोजित कार्यशाला में जहां उपस्थित डाक्टरों को रोग के लक्षणों की पहचान व आवश्यक उपचार की जानकारी दी गयी. वहीं बताया गया कि हालांकि जिले में अब तक ऐसा एक भी केस सामने नहीं आया है. पर जिला स्वास्थ्य विभाग किसी भी स्थिति से निपटने […]

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अररिया : चमकी बुखार यानी एइएस को लेकर शुक्रवार का आयोजित कार्यशाला में जहां उपस्थित डाक्टरों को रोग के लक्षणों की पहचान व आवश्यक उपचार की जानकारी दी गयी. वहीं बताया गया कि हालांकि जिले में अब तक ऐसा एक भी केस सामने नहीं आया है. पर जिला स्वास्थ्य विभाग किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है. सदर अस्पताल के साथ साथ पीएचसी में भी आवश्यक दवाओं का पूरा स्टॉक उपलब्ध है.

अच्छी बात ये है कि जिले में जापानी इंसेफलाइटिस से बचाव का टीका कई सालों से बच्चों को लगाया जा रहा है. कार्यशाला का आयोजन जिला स्वास्थ्य विभाग द्वारा जिला स्वास्थ्य समिति के सभागार में किया गया था. इसी क्रम में तकनीकी जानकारी देते हुए एसीएमओ डॉ एमपी गुप्ता व जिला वीडीआर पदाधिकारी डॉ अजय कुमार सिंह ने बताया कि ये बीमारी अमूमन अधिक गर्मी के मौसम में अप्रैल से जून के बीच फैलती है.
बरसात शुरू होने के साथ ही रोग का फैलाव घटने लगता है. एक से 15 वर्ष तक के कुपोषित बच्चे अधिक प्रभावित होते हैं. लक्षणों की जानकारी देते हुए बताया गया कि रोग की शुरूआत सिर दर्द, तेज बुखार से होती है. शरीर में चमकी या थरथराहट, व ऐंठन के साथ-साथ शरीर के कुछ भाग में लकवा भी मार सकता है. रोगी बच्चे में पहचानने की क्षमता कम हो सकती है. बच्चे बेहोश हो सकते हैं. रक्त में चीनी की मात्रा खतरनाक स्तर तक अचानक कम हो जाती है.
विशेषज्ञों ने बताया कि रोग के लक्षण नजर आने पर बच्चे को तुरंत अस्पताल ले जाना चाहिए. ताकि समय पर उपचार हो सके. शुरूआती दो घंटे बहुत महत्वपूर्ण होते हैं. धन्वाद ज्ञापन जिला स्वास्थ्य समिति के डीपीएम रेहान अशरफ ने किया. इस अवसर पर सीएस डॉ सुरेश प्रसाद सिन्हा, जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ केके कश्यप, सदर अस्पताल के अधीक्षक डॉ आरएएन सिंह, उपाधीक्षक डॉ जेएन माथुर के अलावा डॉ जीमल अहमद, डॉ उमर अकबर, डॉ राजेंद्र कुमार, डॉ योगेंद्र चौधरी सहित अन्य चिकित्सा पदाधिकारी, पीरामल फाउंडेशन के परिमल झा, केयर इंडिया के सौरभ तिवारी, युनिसेफ के मुश्ताक आजम व यूएनडीपी के सालिक आजम सहित अन्य उपस्थित थे.
रोग के लक्षण
पांच से सात दिनों का तेज बुखार, सिर दर्द
पचान की क्षमता घटना, शरीर में चमकी, हाथ पैर में थरथराहट
पूरे शरीर या किसी अंग में लकवा या अकड़न
शरीरिक संतुलन का बिगड़ना, बेहोशी
आवश्यक सावधानियां
गर्मी के मौसम में बच्चों को भरपेट खाना व पानी पिलाकर ही बाहर निकलने दें
तेज बुखार होने पर पानी से बदन पोछें
चमकी हो तो करवट लिटाकर अस्पताल ले जायें.
बेहोशी व झटके की स्थित में रोगी बच्चे के मुंह में कुछ न डालें
बच्चे की गर्दन झुकी न रहे, नाक बंद न करें
ओझा, गुणी के चक्कर में न पड़े
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