काम के लिए यूपी के बाद दिल्ली सबसे ज्यादा पहुंच रहे बिहार के लोग, एम्स में भी बिहारियों की सबसे अधिक भीड़

देश का शायद ही कोई ऐसा जिला हो, जिसके लोग कामकाजी सपनों को लेकर राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली (नेशनल कैपिटल टेरिटेरी) न पहुंचते हों. राष्ट्रीय राजधानी में अपने सपने पूरा करने पहुंचने वाले 25 प्रतिशत लोग केवल 14 जिलों के हैं.
राजदेव पांडेय4 पटना. देश का शायद ही कोई ऐसा जिला हो, जिसके लोग कामकाजी सपनों को लेकर राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली (नेशनल कैपिटल टेरिटेरी) न पहुंचते हों. राष्ट्रीय राजधानी में अपने सपने पूरा करने पहुंचने वाले 25 प्रतिशत लोग केवल 14 जिलों के हैं. इनमें चार जिले बिहार के हैं. इन चार जिलों मसलन पटना, मधुबनी,दरभंगा और समस्तीपुर से दिल्ली पहुंचे विस्थापितों की हिस्सेदारी 6.62 फीसदी से अधिक है.
नेशनल कैपिटल रीजन प्लानिंग बोर्ड (एनसीआरपीबी) की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक मुताबिक वर्ष 2019-20 के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में दिल्ली में पहुंचने वाले शीर्ष 14 जिलों में बिहार के चार जिलों के अलावा उत्तराखंड और झारखंड का एक-एक और शेष आठ जिले उत्तर प्रदेश के हैं. दिल्ली पहुंचे कुल अप्रवासी या विस्थापितों में पटना जिले की हिस्सेदारी केवल 1.47 प्रतिशत है.
मधुबनी व दरभंगा की हिस्सेदारी क्रमश:1.95 और 1.79 प्रतिशत है. समस्तीपुर की भागीदारी 1.31 प्रतिशत है. इस तरह कुल 6.52 प्रतिशत की हिस्सेदारी इन चारों जिलों की है.हालांकि, दिल्ली जाने वाले कुल विस्थापितों में उत्तर प्रदेश के तीन जिलों मसलन बुलंदशहर, अलीगढ़ व मेरठ की हिस्सेदारी क्रमश: 2.96, 2.30 और 2.04 फीसदी है.
जानकारी के मुताबिक पटना का उच्च शिक्षित वर्ग दिल्ली में अपने कामकाजी सपनों को पूरा करने के लिए ज्यादा पहुंच रहा है. दरअसल प्रदेश की राजधानी पर आबादी का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है. इसलिए इनका आकर्षण दिल्ली की तरफ काफी बढ़ गया है. बिहार के शेष तीन जिलों की हिस्सेदारी घटने की अपेक्षा बढ़ ही रही है.
इन जिलों के अधिकतर लोगों ने अपनी कामकाजी कुशलता से वहां अपनी जगह बनायी है. यह आबादी विस्थापित होने वाले दिहाड़ी मजदूरों की तरह नहीं है. यहां यह ध्यान रखने योग्य बात है कि दिल्ली के पड़ोसी राज्यों मसलन पंजाब,हरियाणा,राजस्थान और मध्य प्रदेश की दिल्ली में विस्थापन दर उल्लेखनीय नहीं है.
एम्स नयी दिल्ली में उत्तर प्रदेश के बाद सर्वाधिक मरीज बिहार के पहुंच रहे हैं. बिहार से पहुंचने वाले मरीजों की संख्या लाखों में है. स्वास्थ्य मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली एम्स में इलाज के लिए रजिस्ट्रेशन कराने वाले राज्यों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है. वर्ष 2019-20 में रजिस्ट्रेशन कराने में बिहार दूसरे पायदान पर है. बिहार से यहां 3. 68 लाख मरीज पहुंचे.
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दिल्ली 1357685
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उत्तर प्रदेश 669140
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बिहार 368459
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हरियाणा 267480
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उत्तराखंड 96048
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एमपी 54728
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राजस्थान 52147
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झारखंड 28526
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हिमाचल 19430
एएन सिन्हा सामाजिक अध्ययन संस्थान के सहायक प्रोफेसर डॉ विद्यार्थी विकास ने कहा कि पटना एम्स पर बोझ अधिक है. शेष बिहार में चिकित्सा व्यवस्था लचर है. यहां इलाज की मनमाना महंगा है. लिहाजा लोग दिल्ली एम्स की ओर शिफ्ट हो रहे हैं.
रोजगार हेतु पलायन स्वाभाविक है, लेकिन शिक्षा एवं स्वास्थ्य के लिए इतनी बड़ी मात्रा में क्यों ? एक और सवाल यह है कि बिहार से होने वाला विस्थापन ज्यादातर पटना, मधुबनी, दरभंगा और समस्तीपुर से है , जो कि शोध का विषय है.
Posted by Ashish Jha
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By Prabhat Khabar News Desk
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