मांझी ने बनायी नयी "हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा" पार्टी, JDU को सीधी चुनौती
Updated at : 28 Feb 2015 8:35 PM (IST)
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पटनाः बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने शनिवार को अपनी नयी राजनीतिक पार्टी की घोषणा कर दी. मांझी की नयी पार्टी का नाम हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा रखा है. जिसे हम के नाम से जाना जायेगा. इस मोर्चे की घोषणा के बाद मांझी ने कहा कि हमारी जिम्मेदारी है कि हम नीतीश कुमार के […]
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पटनाः बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने शनिवार को अपनी नयी राजनीतिक पार्टी की घोषणा कर दी. मांझी की नयी पार्टी का नाम हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा रखा है. जिसे हम के नाम से जाना जायेगा. इस मोर्चे की घोषणा के बाद मांझी ने कहा कि हमारी जिम्मेदारी है कि हम नीतीश कुमार के असली चेहरे को जनता के सामने लाएं. हमारी पार्टी नीतीश कुमार और जेडी(यू) को सीधी चुनौती देगी.
मांझी ने कहा, हमने कई बैठकों के बाद नयी पार्टी बनाने का फैसला लिया है. बैठकों में हमने अपने समर्थक, और नेताओं से गंभीर चर्चा की इसके बाद हमलोग इस फैसले पर पहुंचे. ज्ञात हो कि मांझी और उनके समर्थक मंत्रियों, विधायकों को जेडी(यू) ने पार्टी से निकाल दिया था. पार्टी से बाहर होने के बाद मांझी कौन से कदम उठायेगा इसका सबको इंतजार था. मांझी ने कम वक्त में यह फैसला इसलिए भी लिया क्योंकि इस साल के अंत में बिहार में विधानसभा का चुनाव होना है. ऐसे में उन्हें राजनीति के मैदान में बने रहने के लिए एक नयी टीम की जरूरत थी. अंततः उन्होंने अपनी टीम का एलान कर दिया. मांझी दलित कार्ड खेलकर ज्यादा से ज्यादा वोट अपनी तरफ करने की कोशिश करेंगे और शायद इससे उन्हें फायदा भी मिले क्योंकि मांझी के ज्यादातर समर्थक महादलित कैटिगरी से ताल्लुक रखते हैं. पार्टी लॉन्च करने के मौके पर मांझी ने अपने मुख्यमंत्री के कार्यकाल में किये हुए कामों को गिनाया और कहा, मैंने 9 महीने के शासनकाल में महज 12 दिन काम किए हैं. ज्यादातर वक्त मौखिक संघर्ष में ही गुजरा. मैं भले 9 महीने तक सीएम की कुर्सी पर रहा लेकिन असली काम मैंने 7 से 19 फरवरी के बीच महज 12 दिनों तक किए.’
मांझी ने नीतीश कुमार पर एक बार फिर आरोपों की बौझार करते हुए कहा , वह चाहते थे कि हम सिर्फ रबर स्टांप के रूप में पद पर बने रहें लेकिन हमारा स्वाभिमान इसकी गवाही नहीं दे रहा था. उनकी दी हुई लिस्ट के मुताबिक ट्रांसफर और पोस्टिंग करता रहा. इसमें मेरी भूमिका केवल हस्ताक्षर भर रहती थी. मुझे यह भी पता नहीं होता था कि मंत्री कौन होगा. ‘फिर मुझे अहसास हुआ कि यदि इसी तरह अपने आत्मसम्मान से समझौता करता रहा तो समस्या गंभीर हो जाएगी. मुझे लगा कि चाहे जो भी कीमत चुकानी पड़े आत्मसम्मान से समझौता नहीं करूंगा.’
अब नीतीश को बिहार की राजनीति में एक नयी पार्टी से भी लड़ाई की तैयारी करनी होगी. गौरतलब है कि नीतीश कुमार ने लोकसभा चुनाव में हार के बाद नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था. इसके बाद मई 2014 में मांझी को सीएम बनाया गया था.लेकिन पार्टी के अंदर हुए विवाद के बाद मांझी ने 20 फरवरी को इस्तीफा दे दिया था.
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