न्यू सेंट्रल पब्लिक स्कूल के प्रिंसिपल ने ही किया था छात्रा से दुष्कर्म, पीड़िता व आरोपितों का लिया डीएनए सैंपल, छात्रा का कराया गर्भपात
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 29 Sep 2018 3:22 AM
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पटना : फुलवारीशरीफ के किसान कॉलोनी में स्थित न्यू सेंट्रल पब्लिक स्कूल की दुष्कर्म पीड़िता, प्रिंसिपल राज सिंघानिया उर्फ अरविंद व एकाउंटेंट अशोक कुमार का डीएनए सैंपल शुक्रवार को लिया गया. सैंपल को जांच के लिए एफएसएल भेज दिया गया है. चिकित्सकों के साथ ही पुलिस की एक टीम फुलवारीशरीफ में दुष्कर्म पीड़िता का डीएनए […]
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पटना : फुलवारीशरीफ के किसान कॉलोनी में स्थित न्यू सेंट्रल पब्लिक स्कूल की दुष्कर्म पीड़िता, प्रिंसिपल राज सिंघानिया उर्फ अरविंद व एकाउंटेंट अशोक कुमार का डीएनए सैंपल शुक्रवार को लिया गया. सैंपल को जांच के लिए एफएसएल भेज दिया गया है. चिकित्सकों के साथ ही पुलिस की एक टीम फुलवारीशरीफ में दुष्कर्म पीड़िता का डीएनए सैंपल लेने के काम में शुक्रवार को जुटी थी, वहीं दूसरी टीम बेऊर जेल पहुंची. यहां प्रिंसिपल राज सिंघानिया उर्फ अरविंद व एकाउंटेंट अशाेक कुमार का डीएनए सैंपल लिया गया. अब एफएसएल से रिपोर्ट आने का इंतजार है. इसके बाद इस मामले में चार्जशीट भी दायर कर दी जायेगी.
कराया गया गर्भपात : बताया जाता है कि शुक्रवार को टीम ने डीएनए सैंपल लेने के बाद गर्भपात के संबंध में भी निर्णय ले लिया और परिजनों पर छोड़ दिया. इसके बाद परिजन भी तैयार हो गये. पहले पीड़िता का सैंपल लिया गया और फिर गर्भपात करा दिया गया. इसके बाद पीएमसीएच में पीड़िता काे रखा गया है. इस प्रक्रिया को पीएमसीएच के वरीय चिकित्सकों की निगरानी में संपन्न कराया गया. इस दौरान महिला थाने की थानाध्यक्ष रवि रंजना भी मौजूद थी. पीएमसीएच के अधीक्षक ने गर्भपात कराये जाने की पुष्टि की.
सुरक्षित गर्भपात के लिए डॉक्टरों ने लगा दी जान
बलात्कार के बाद गर्भवती हुई फुलवारीशरीफ की पांचवीं की छात्रा का शुक्रवार की रात पीएमसीएच में गर्भपात करने का निर्णय लिया गया. पीएमसीएच का गायनी वार्ड का यह पहला केस था जहां महज 10 साल की बच्ची का गर्भपात कराया गया. इसके लिए अलग से स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ की महिला डॉक्टरों की टीम गठित. सीनियर डॉक्टरों की देखरेख में रात आठ बजे से ही गर्भपात के लिए काम शुरू हो गया.
डिलिवरी रूम के आसपास सुरक्षा के कड़े इंतजाम किये गये थे और विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम लगायी गयी. डॉक्टरों की माने तो बच्ची काफी कम उम्र की है इसके लिए गर्भपात में पांच से छह घंटे तक का समय लग सकता है. डॉक्टरों का दावा था कि रात तीन बजे तक बच्ची का गर्भपात चलेगा.
क्या है कानून : कानूनी जानकार इस विषय में बताते हैं कि गर्भपात उसी स्थिति में कराया जा सकता है, जब गर्भ के कारण महिला की जिंदगी खतरे में हो. 1971 में इसके लिए एक अलग कानून बनाया गया और इसका नाम रखा गया मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेगनेंसी ऐक्ट, इस एक्ट के तहत तमाम प्रावधान किये गये हैं. इस कानून के तहत 20 हफ्ते तक के भ्रूण को महिला के वेलफेयर को देखते हुए डॉक्टर की सलाह से गर्भपात किया जा सकता है. अगर इसकी वजह से महिला की जान खतरे में हो, तो उसके बाद भी कोर्ट की इजाजत से प्रेग्नेंसी को टर्मिनेट किया जा सकता है.
एक माह से कर रहा था दुष्कर्म
पांचवी कक्षा की छात्रा के साथ स्कूल के प्रिंसिपल राज सिंघानिया उर्फ अरविंद द्वारा करीब एक माह से दुष्कर्म किया जा रहा था. इस मामले का खुलासा होने के बाद प्रिंसिपल राज सिंघानिया उर्फ अरविंद के साथ ही उसके सहयोगी एकाउंटेंट अशोक कुमार को गिरफ्तार कर लिया गया था.
फिलहाल दोनों जेल में है. प्रिंसिपल के परिजन पुलिस विभाग में है. जिसके कारण पुलिस को यह भी शक था कि वे लोग साक्ष्य को मिटाने की कोशिश करेंगे. इसके लिए पीड़िता के साथ ही प्रिंसिपल व एकाउंटेंट का भी डीएनए सैंपल लिया गया. ताकि वह रिपोर्ट उन दोनों को सजा दिलाने में अहम भूमिका निभायेगा.
क्या कहते हैं मनोचिकित्सक
18 साल के बाद ही महिलाओं का शरीर प्रजनन क्षमता के तैयार होता है. अगर नाबालिग बच्चियों व 10 साल जैसे कम उम्र में गर्भधारण कराने पर बच्चियों के मानसिक व शारीरिक दोनों रूप असर पड़ता है. कई बार पोस्ट ट्रोमेटिक स्ट्रेस सिंड्रोम नाम की बीमारी होने की आशंका होती है.
इस बीमारी से लंबे समय तक एक डर बना रहता है, लेकिन इस तरह के केस में माता व पिता को संयम रखते हुए बच्ची पर ध्यान देने की जरूरत है. ताकि उसको आगे चलकर किसी तरह की कोई परेशानी नहीं हो.
डॉ विवेक विशाल,मनोचिकित्सक हितैषी होम
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