दिल्ली कैपिटल्स को हराने के बाद बोले ईशान किशन, मैच जीतने के लिए पाॅजिटिव माइंडसेट तुरुप का इक्का
Published by : Rajneesh Anand Updated At : 22 Apr 2026 1:58 PM
हैदराबाद और दिल्ली के मैच में सनराइजर्स की माइंडसेट जीती
SRH vs DC 2026 : सनराइजर्स हैदराबाद के हीरो रहे अभिषेक शर्मा ने अपनी टीम की जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. अब हैदराबाद ने प्वाइंट टेबल में अपनी जगह नंबर 3 पर बना ली है और उसने 7 मैच में से 4 जीते हैं और तीन हारे हैं. युवा टीम के कप्तान ईशान किशन ने अपनी टीम की सफलता पर कहा कि हमने अपने माइंडसेट से मैच को जीता.
SRH vs DC 2026 : सनराइजर्स हैदराबाद ने अपने होम ग्राउंड पर मंगलवार की रात दिल्ली कैपिटल्स को 47 रन से हरा दिया. सनराइजर्स ने बेहतरीन खेल दिखाया और अपनी रणनीति की बदौलत मैच को अपने नाम कर लिया. मैच के सनराइजर्स हैदराबाद के कप्तान ईशान किशन ने कहा कि टी-20 क्रिकेट में मेंटल ताकत और सोच की स्पष्टता बहुत महत्वपूर्ण है. ईशान किशन ने कहा कि किसी भी खेल में दिमागी सोच बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि आप उसी की ताकत से अपना लक्ष्य साधते हैं और उसे पूरा भी करते हैं.
माइंडसेट को मैनेज करना बहुत जरूरी
मैच के बाद जियो हाॅट स्टार से बात करते हुए ईशान ने कहा कि खिलाड़ियों के बीच स्किल लेवल एक जैसा ही होता है, लेकिन वे अपने खेल को किस तरह अपने माइंडसेट से मैनेज करते हैं, यह खिलाड़ियों के बीच अंतर पैदा करता है.माइंडसेट ही विनर और लूजर बनाता है. उन्होंने कहा कि हर खिलाड़ी को यह कोशिश करनी चाहिए कि वह जीत के बारे में सोचे. हार के बारे में सोचना गलत है, जब आप पाॅजिटिव सोच हैं, तो रिजल्ट खुद ब खुद उसी के अनुसार आता है. प्रेशर के वक्त खुद को पाॅजिटिव रखना बहुत जरूरी है, तब ही आप सफल होंगे अन्यथा आप कभी सफल नहीं हो पाएंगे.
गलतियों से सीखें उसे दोहराएं नहीं
ईशान ने कहा कि वही व्यक्ति सफल होता है और मैच विनर बनता है, जो अपनी गलतियों से सीखता है. अगर आप गलतियों से सीखते नहीं हैं, तो आपका सफल होना मुश्किल है. युवा बॉलर्स को सपोर्ट करने के अपने अप्रोच के बारे में भी ईशान ने बात की. उन्होंने कहा कि मैं गेंदबाज को प्रेशर में नहीं रखता हूं. उनके साथ कम्युनिकेशन को सिंपल और एनकरेजिंग बनाए रखता हूं, ताकि प्रेशर सिचुएशन में भी गेंदबाज रिलेक्स महसूस करे ताकि उनका प्रदर्शन अच्छा हो.
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By Rajneesh Anand
रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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