IND vs WI: रोहित शर्मा और यशस्वी जायसवाल के अर्धशतक से भारत मजबूत, वेस्टइंडीज पर बनायी बढ़त

वेस्टइंडीज के खिलाफ पहले टेस्ट में भारत ने शानदार शुरुआत की है. कप्तान रोहित शर्मा और युवा यशस्वी जायसवाल की सलामी जोड़ी ने टीम को बढ़त दिला दी है. दूसरे दिन लंच तक दोनों सलामी बल्लेबाजों ने अपना अर्धशतक पूरा कर लिया था.
डेब्यू कर रहे सलामी बल्लेबाज यशस्वी जायसवाल और कप्तान रोहित शर्मा ने नाबाद अर्धशतक जड़े जिससे भारत ने वेस्टइंडीज के खिलाफ पहले क्रिकेट टेस्ट के दूसरे दिन गुरुवार को यहां लंच तक पहली पारी में बिना विकेट खोए 146 रन बनाकर अपना पलड़ा भारी रखा. लंच के बाद भी दोनों लय में दिखे और टीम के स्कोर को वेस्टइंडीज की पहली पारी के 150 के स्कोर के पार पहुंचा दिया. दोनों के बीच 150 से अधिक रनों की साझेदारी हो चुकी है. लंच के समय रोहित 68 जबकि जायसवाल 62 रन बनाकर खेल रहे थे. रोहित ने अपने 15वें अर्धशतक के दौरान अब तक 163 गेंद का सामना करते हुए छह चौके और दो छक्के मारे. जायसवाल लंच तक 167 गेंद का सामना कर चुके थे और उन्होंने सात चौके मारे.
विंडसर पार्क की पिच और धीमी हो गयी है और अधिक गेंद रुककर बल्ले पर आ रही हैं. भारतीय बल्लेबाजों ने सुबह के सत्र में कोई गैरजरूरी जोखिम नहीं उठाया. टीम ने इस दौरान कोई विकेट नहीं गंवाया लेकिन रन भी सिर्फ 66 ही बनाये. ऑफ स्पिनर राहकीम कोर्नवाल (बिना विकेट के 22 रन) और बाएं हाथ के स्पिनर जोमेल वारिकन (बिना विकेट के 34 रन) ने भारतीय बल्लेबाजों को खुलकर बल्लेबाजी करने का मौका नहीं दिया लेकिन विकेट चटकाने में नाकाम रहे. पिच से गेंद के धीमे आने के कारण भारत के सलामी बल्लेबाजों को रक्षात्मक बल्लेबाजी करने में कोई परेशानी नहीं हुई.
दिन की शुरुआत 40 रन से करने वाले जायसवाल ने सुबह के सत्र में अपने पहले चौके के साथ अर्धशतक पूरा किया. उन्होंने तेज गेंदबाज अल्जारी जोसेफ पर पुल शॉट से चार रन बटोरे. सुबह के सत्र का सर्वश्रेष्ठ शॉट रोहित शर्मा के बल्ले से निकला जिन्होंने जोसेफ पर मिड विकेट पर के ऊपर से छक्का जड़ा. उन्होंने वारिकन पर स्क्वायर कट से चौका जड़ने के बाद उनकी फुलटॉस को भी बाउंड्री के दर्शन कराये. पहले दिन भारतीय गेंदबाजों का दबदबा रहा. रफ्तार और स्पिन की तालमेल ने कैरिबियाई बल्लेबाजों को संभलने का मौका नहीं दिया और पहले ही दिन पूरी टीम 150 के कुल स्कोर पर ढेर हो गयी.
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रविचंद्रन अश्विन को उनके अनुभव का भरपूर लाभ मिला और उन्होंने अपने करियर का 700वां विकेट चटकाया. उन्होंने पांच बल्लेबाजों को आउट किया. अश्विन का टेस्ट करियर में यह 33वां पांच विकेट है. इसके साथ ही उन्होंने एक और बड़ा रिकॉर्ड अपने नाम किया. अश्विन एक मात्र ऐसे भारतीय गेंदबाज हैं जिन्होंने किसी देश के पिता और पुत्र दोनों का विकेट चटकाया. वेस्टइंडीज के पूर्व दिग्गज शिवनारायण चंद्रपॉल के बेटे टैगेनारिन चंद्रपॉल इस सीजन में कैरिबियाई टीम के सलामी बल्लेबाज हैं. अश्विन ने उन्हें बोल्ड कर दिया. इससे पहले दिल्ली में एक मुकाबले में अश्विन ने शिवनारायण चद्रपॉल का विकेट भी चटकाया था.
अपनी उपलब्ध पर बात करते हुए भारतीय टीम के स्टार ऑफ स्पिनर का कहना है कि लगातार बेहतर करने की ललक ने उन्हें नयी ऊंचाईयों तक पहुंचाया है लेकिन यह सफर उनके लिए काफी थकाने वाला रहा है. पहले दिन का खेल समाप्त होने के बाद अश्विन से जब अंतरराष्ट्रीय क्रिेकट की लंबी यात्रा और इस दौरान हुए उतार चढ़ाव के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, ‘इस दुनिया में कोई भी क्रिकेटर या इंसान ऐसा नहीं है जो इस तरह के उतार चढ़ाव से नहीं गुजरा हो. जब आप असफलता के दौर से गुजरते हो तो आपके पास दो विकल्प होते हैं, या तो उदास हो जाओ, इसके बारे में बात करो और फिर शिकायत करते हुए निराश हो जाओ. या फिर इससे सीख हासिल करो. इसलिए मैं ऐसा व्यक्ति हूं जो लगातार इन चीजों से सीख लेता रहता है.’ उन्होंने कहा, ‘बल्कि आज (अपने अच्छे प्रदर्शन पर) मैं अपने अच्छे दिन पर सबसे अच्छी चीज यही करूंगा कि मैं अच्छा खाना खाऊंगा, अच्छी बातें करूंगा, अपने परिवार से बात करूंगा, बिस्तर पर जाऊंगा और इन सबके बारे में भूल जाऊंगा.’
अश्विन ने कहा, ‘जब आपका अच्छा दिन होता है तो आप जानते हो कि आपके लिए दिन अच्छा रहा लेकिन ऐसी भी चीजें होती हैं जिन पर आप काम कर सकते हो और कल इन्हें बेहतर कर सकते हो. उत्कृष्टता की लगातार खोज करने ने ही मुझे अच्छी लय में बनाये रखा हुआ है, लेकिन यह काफी थकाने वाला भी रहा है.’ उन्होंने कहा, ‘यह सफर इतना आसान भी नहीं रहा है. मेरे लिए यह यात्रा काफी थकाने वाली रही है लेकिन मैं उन सभी असफलताओं का बहुत बहुत शुक्रगुजार हूं क्योंकि इनके बिना सफलता नहीं मिल पाती.’ हाल में आस्ट्रेलिया के खिलाफ विश्व टेस्ट चैम्पियनशिप (डब्ल्यूटीसी) फाइनल में उन्हें अंतिम एकादश में नहीं रखा गया था, जिससे वह काफी निराश थे. उन्होंने कहा, ‘मैंने इसके बारे में बात की है. यह किसी भी क्रिकेटर के लिए काफी मुश्किल होता है जब आपके पास डब्ल्यूटीसी फाइनल में खेलने का मौका हो लेकिन अंत में बाहर बैठना पड़े. लेकिन अगर मैं ड्रेसिंग रूम में निराशा में बैठा रहूं तो मुझमें और एक अन्य व्यक्ति में क्या अंतर होगा.’
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