विश्व कप से पहले अंतिम एकादश की पहचान जरुरी : धौनी
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 29 Jan 2015 3:18 PM
पर्थ : भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने आज कहा कि विश्व कप से पहले अंतिम एकादश को पहचानने के लिये हर मैच जीतना जरुरी है. उन्होंने कहा, ‘यदि आप दो मैच जीत भी लेते हैं लेकिन विश्व कप के लिये अंतिम एकादश को लेकर निश्चिंत नहीं है तो इससे आपके प्रदर्शन पर असर पड […]
पर्थ : भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने आज कहा कि विश्व कप से पहले अंतिम एकादश को पहचानने के लिये हर मैच जीतना जरुरी है. उन्होंने कहा, ‘यदि आप दो मैच जीत भी लेते हैं लेकिन विश्व कप के लिये अंतिम एकादश को लेकर निश्चिंत नहीं है तो इससे आपके प्रदर्शन पर असर पड सकता है. यदि सभी फिट हैं तो आपके दिमाग में पहली एकादश का खाका होना चाहिये और हालात को देखते हुए दूसरी एकादश भी पता होनी चाहिये क्योंकि विकेट अलग अलग होंगे.’
इंग्लैंड के खिलाफ वाका पर कल होने वाले मैच से पहले उन्होंने कहा, ‘आखिर में हमें उन 15 खिलाडियों को उतारना हैं जो फिट हैं और फार्म में हैं.’ त्रिकोणीय एक दिवसीय श्रृंखला में अभी तक एक भी मैच जीतने में नाकाम रही भारतीय टीम को आस्ट्रेलिया के खिलाफ सिडनी में बारिश के कारण ड्रा रहे मैच से दो अंक मिले. अब उसे फाइनल में पहुंचने के लिये कल इंग्लैंड को हर हालत में हराना होगा.
धोनी ने कहा, ‘हमारे लिये हर मैच महत्वपूर्ण है. हमें रन बनाना होगा और विकेट लेने होंगे. पिछले कुछ मैचों में हम ऐसा नहीं कर सके. हमने साझेदारियां बनायी लेकिन उनका फायदा नहीं उठा सके.’ उन्होंने कहा, ‘हमें आखिरी 10.12 ओवरों में अच्छी बल्लेबाजी करनी होगी.’ इंग्लैंड ने पिछले मैच में भारत पर एक बोनस अंक के साथ जीत दर्ज की थी और धोनी का मानना है कि इंग्लैंड को मनोवैज्ञानिक फायदा होगा लेकिन यह नया मैच है.
धोनी ने कहा, ‘उन्हें इंग्लैंड में वनडे में भी मनोवैज्ञानिक बढत हासिल थी लेकिन हमने अभ्यास सत्रों का पूरा फायदा उठाया. ऐसा नहीं है कि वाका पर गेंद 15 या 20 किलोमीटर और तेजी से आती है. यदि आप 140 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से गेंदबाजी करेंगे तो वह उसी गति से आयेगी लेकिन यहां दूसरी आस्ट्रेलियाई विकेटों की तुलना में उछाल अधिक है.’ पहले मैच में भारत 267 रन बनाने के बाद भी हार गया लेकिन दूसरे मैच में टीम 153 रन पर आउट हो गयी.
धोनी ने हालांकि अपने बल्लेबाजों का बचाव किया. उन्होंने कहा, ‘यदि आप ब्रिसबेन में वनडे विकेट को देखें तो वह टेस्ट विकेट से अलग थी. उसमें उछाल थी लेकिन गति नहीं थी. इसके अलावा वनडे क्रिकेट में बल्लेबाजों के लिये अपने स्ट्रोक्स खेलना जरुरी है. यह जोखिम कई बार अनुकूल रहता है तो कई बार नहीं.’
शीर्षक्रम पर रोहित शर्मा की गैर मौजूदगी और शिखर धवन का खराब फार्म चिंता का सबब रहा है लेकिन धोनी ने कहा कि मध्यक्रम को भी अपनी भूमिका निभानी होगी. उन्होंने कहा, ‘शीर्षक्रम का फार्म चिंता का सबब नहीं है. हमने मध्यक्रम में भी कई विकेट गंवाये हैं जिससे टीम को अच्छी शुरुआत नहीं मिल सकी है.’
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