#RIPWadekar : मैदान पर करिश्माई कप्तान और मैदान के बाहर ‘परफेक्ट जेंटलमैन'' थे वाडेकर

Updated at : 16 Aug 2018 4:04 PM (IST)
विज्ञापन
#RIPWadekar : मैदान पर करिश्माई कप्तान और मैदान के बाहर ‘परफेक्ट जेंटलमैन'' थे वाडेकर

नयी दिल्ली : अजित वाडेकर भले ही मंसूर अली खान पटौदी की तरह नवाबी शख्सियत के मालिक नहीं रहे हो लेकिन मध्यमवर्गीय दृढता और व्यावहारिक सोच से उन्होंने भारतीय क्रिकेट के इतिहास के सबसे सुनहरे अध्यायों में से एक लिखा. वाडेकर ने ‘बंबई के बल्लेबाजों ‘ के तेवर को अपने उन्मुक्त खेल से जोड़ा जिसमें […]

विज्ञापन

नयी दिल्ली : अजित वाडेकर भले ही मंसूर अली खान पटौदी की तरह नवाबी शख्सियत के मालिक नहीं रहे हो लेकिन मध्यमवर्गीय दृढता और व्यावहारिक सोच से उन्होंने भारतीय क्रिकेट के इतिहास के सबसे सुनहरे अध्यायों में से एक लिखा.

वाडेकर ने ‘बंबई के बल्लेबाजों ‘ के तेवर को अपने उन्मुक्त खेल से जोड़ा जिसमें दमदार पूल और दर्शनीय हुक शाट शामिल थे. उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि इंग्लैंड और वेस्टइंडीज में 1971 में शृंखलायें जीतना रही लेकिन उनका योगदान इससे कहीं अधिक रहा. बुधवार देर राज मुंबई में आखिरी सांस लेने वाले वाडेकर ने 37 टेस्ट खेले और एक ही शतक जमाया लेकिन आंकड़े उनके हुनर की बानगी नहीं देते.

इसे भी पढ़ें…

#RIPWadekar : वाडेकर के निधन से शोक में डूबा क्रिकेट जगत, सचिन-कुंबले और अजहर ने ऐसे किया याद

दिवंगत विजय मर्चेंट ने जब उन्हें कप्तानी सौंपी तो किसी ने नहीं सोचा होगा कि वह इंग्लैंड और वेस्टइंडीज में शृंखलायें जीतकर इतिहास रच देंगे. उनके दौर में ही भारत में बिशन सिंह बेदी, भागवत चंद्रशेखर, ईरापल्ली प्रसन्ना और श्रीनिवासन वेंकटराघव की स्पिन चौकड़ी चरम पर थी.

वेस्टइंडीज दौरे पर सुनील गावस्कर हीरो रहे तो इंग्लैंड में चंद्रशेखर चमके. वाडेकर उस दौर के थे जब शिक्षा को सबसे ज्यादा तरजीह दी जाती थी और यूनिवर्सिटी क्रिकेट से ही धाकड़ खिलाड़ी निकलते थे. वह इंजीनियर बनना चाहते थे लेकिन क्रिकेट के शौक ने उनकी राह बदल दी. मुंबई के पुराने खिलाड़ियों का कहना है कि एलफिंस्टन कालेज में वह बहुत अच्छे छात्र थे और कालेज मैच में 12वां खिलाड़ी रहने पर उन्हें तीन रुपये टिफिन भत्ता मिलता था.

कॉलेज के प्रिंसिपल ने उन्हें क्रिकेट खेलने से मना किया क्योंकि वह विज्ञान के छात्र थे लेकिन होनी को कुछ और मंजूर था. सौरव गांगुली से पहले वह भारत के सबसे शानदार खब्बू बल्लेबाज थे. सत्तर के दशक में रणजी ट्रॉफी के एक मैच के दौरान शतक जमाने के बाद उनका बल्ला टूट गया था और स्थानापन्न फील्डर गावस्कर दूसरे बल्लों के साथ मैदान पर आये.

इसे भी पढ़ें…

BCCI ने वाडेकर के निधन पर शोक जताया, भारतीय क्रिकेट का ‘पुनरोद्धारक’ बताया

वाडेकर ने चार चौके जड़े और आउट हो गये. ड्रेसिंग रूम में आने के बाद उन्होंने पूछा कि वह बल्ला किसका था तो गावस्कर ने कहा कि उनका. गावस्कर ने कहा , वह आपके लिये मनहूस रहा. लेकिन वाडेकर ने जवाब में कहा , लेकिन वे चार चौके पारी के सर्वश्रेष्ठ शाट थे.

वाडेकर ने 1974 के इंग्लैंड दौरे पर नाकामी के बाद कप्तानी गंवा दी. चयनकर्ताओं ने उन्हें पश्चिम क्षेत्र और मुंबई की टीमों से भी हटा दिया. वाडेकर ने क्रिकेट से संन्यास लेकर अपने बैंकिंग कैरियर पर फोकस किया.

इसे भी पढ़ें…

पूर्व भारतीय क्रिकेट कप्तान अजीत वाडेकर नहीं रहे

उन्हें 90 के दशक में भारतीय टीम का मैनेजर बनाया गया और मोहम्मद अजहरुद्दीन की कप्तानी में टीम ने अगले चार साल बेहतरीन प्रदर्शन किया. सचिन तेंदुलकर से पारी की शुरुआत कराने का श्रेय भी उन्हें ही जाता है.

विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola