विजया एकादशी 2026 कब हैं? जानें सहीं तिथि, शुभ मुर्हूत, पूजा की विधि, महत्व
Published by : Neha Kumari Updated At : 06 Feb 2026 12:45 PM
विजया एकादशी 2026
Vijaya Ekadashi 2026: विजया एकादशी भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने के लिए सबसे शुभ दिनों में से एक मानी जाती है. आइए जानते हैं कि साल 2026 में विजया एकादशी का व्रत कब रखा जाएगा और इस दिन भगवान नारायण की पूजा की विधि समेत सभी जरूरी बातों को आसान भाषा में.
Vijaya Ekadashi 2026: विजया एकादशी व्रत भगवान विष्णु को समर्पित एक बेहद पवित्र व्रत है. एक साल में 24 एकादशी व्रत आते हैं, यानी हर महीने 2 एकादशी व्रत पड़ते हैं. फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि में पड़ने वाले व्रत को विजया एकादशी कहा जाता है. साल 2026 में यह व्रत 13 फरवरी को किया जाएगा. जीवन की समस्याओं और बाधाओं के नाश तथा शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने के लिए यह व्रत किया जाता है.
विजया एकादशी शुभ मुहूर्त
विजया एकादशी 13 फरवरी 2026, दिन शुक्रवार को है.
- एकादशी तिथि प्रारम्भ: 12 फरवरी 2026 को सुबह 11:33 मिनट पर
- एकादशी तिथि समाप्त: 13 फरवरी 2026 को दोपहर 01:30 मिनट पर
- पूजा का शुभ समय: 13 फरवरी को सुबह 06:26 से 09:15 मिनट तक
- पारण का शुभ समय: 14 फरवरी को सुबह 07:50 से 09:15 मिनट तक
विजया एकादशी पूजा विधि
- संकल्प: पूजा के दिन सुबह जल्दी उठकर ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करें और साफ कपड़े पहनें. पूजा स्थल पर बैठकर भगवान नारायण के सामने व्रत का संकल्प लें.
- कलश स्थापना: विजया एकादशी के दिन वेदी बनाकर कलश स्थापना कर पूजा की जाती है. कलश में सप्तधान (सात प्रकार के अनाज) डालें.
- पूजन: कलश के ऊपर भगवान विष्णु की मूर्ति या तस्वीर रखें. उन्हें पीले फूल, ऋतु फल, धूप, दीप और तुलसी दल अर्पित करें.
- मंत्र जप: भगवान विष्णु के मंत्र ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ का जाप करें और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें.
- जागरण: एकादशी की रात में भजन-कीर्तन करते हुए जागरण करें.
- पारण: अगले दिन यानी द्वादशी को किसी ब्राह्मण या जरूरतमंद को भोजन कराएं, दान-दक्षिणा दें और शुभ मुहूर्त में स्वयं भोजन कर व्रत खोलें.
सावधानियां
- एकादशी के दिन चावल खाना पूरी तरह वर्जित माना जाता है.
- व्रत के दौरान किसी की निंदा न करें और मन को शांत व सात्त्विक रखें.
- इस दिन अपशब्दों का प्रयोग न करें और क्रोध से बचें.
- भगवान विष्णु की पूजा में तुलसी का इस्तेमाल शुभ माना जाता है, लेकिन एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ने चाहिए. पूजा के एक दिन पहले तुलसी के पत्ते तोड़कर रख लें.
विजया एकादशी का महत्व
मान्यता है कि लंका जाने से पहले भगवान श्रीराम ने विजया एकादशी व्रत किया था, जिसके बाद उन्होंने लंकापति रावण का वध कर विजय प्राप्त की थी. ऐसा माना जाता है कि जो भक्त इस व्रत को निष्ठापूर्वक करते हैं, उन्हें शत्रुओं पर विजय और कार्यों में सफलता प्राप्त होती है.
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नेहा कुमारी प्रभात खबर डिजिटल में जूनियर कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं. उन्हें लेखन के क्षेत्र में एक वर्ष से अधिक का अनुभव है. पिछले छह महीनों से वे राशिफल और धर्म से जुड़ी खबरों पर काम कर रही हैं. उनका मुख्य कार्य व्रत-त्योहारों, पौराणिक कथाओं और भारतीय रीति-रिवाजों से जुड़ी जानकारी को सरल भाषा में लोगों तक पहुंचाना है. नेहा का हमेशा यह प्रयास रहता है कि वे कठिन से कठिन विषय को भी इतना आसान और रोचक बना दें कि हर कोई उसे सहजता से पढ़ और समझ सके. उनका मानना है कि यदि धर्म और संस्कृति से जुड़ी जानकारी सरल शब्दों में मिले, तो लोग अपनी परंपराओं से बेहतर तरीके से जुड़ पाते हैं. डिजिटल मीडिया में अपने करियर की शुरुआत उन्होंने प्रभात खबर में ही ‘नेशनल’ और ‘वर्ल्ड’ डेस्क पर छह महीने की इंटर्नशिप के साथ की थी. इस दौरान उन्होंने रियल-टाइम खबरों पर काम करना, तेजी और सटीकता के साथ कंटेंट लिखना, ट्रेंडिंग विषयों की पहचान करना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को करीब से समझा. इस अनुभव ने उनकी न्यूज़ सेंस, लेखन क्षमता और खबरों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने की समझ को और अधिक मजबूत बनाया.
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