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Shiv Ke 12 Jyotirling: कैसे प्रकट हुए 12 ज्योतिर्लिंग? जानें उत्पत्ति की अद्भुत कथा

Updated at : 03 Feb 2026 8:11 AM (IST)
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Shiv Ke 12 Jyotirling

12 ज्योतिर्लिंग की उत्पत्ति का रहस्य

Shiv Ke 12 Jyotirling: शिव पुराण में वर्णित अद्भुत कथा के अनुसार भगवान शिव ने ज्योति स्वरूप धारण कर 12 ज्योतिर्लिंग प्रकट किए, जो आज भी आस्था, भक्ति और मोक्ष का प्रतीक हैं.

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Shiv Ke 12 Jyotirling: सनातन धर्म में भगवान शिव को परमेश्वर, संहारक, आदि योगी और करुणा के सागर के रूप में पूजा जाता है. माना जाता है कि संपूर्ण सृष्टि की ऊर्जा का मूल स्रोत शिव हैं. भगवान शिव के अनेक रूप हैं, लेकिन ज्योतिर्लिंग का स्वरूप सबसे पवित्र और विशेष माना जाता है. ‘ज्योतिर्लिंग’ का अर्थ है — प्रकाश स्वरूप शिवलिंग, जहां भगवान शिव स्वयं दिव्य प्रकाश के रूप में प्रकट हुए. भारत में ऐसे 12 पवित्र ज्योतिर्लिंग हैं, जिनके दर्शन मात्र से पुण्य की प्राप्ति मानी जाती है.

ज्योतिर्लिंग की उत्पत्ति की कथा

पुराणों के अनुसार एक बार ब्रह्मा और विष्णु में यह विवाद हो गया कि कौन श्रेष्ठ है. तब भगवान शिव एक अनंत अग्नि-स्तंभ के रूप में प्रकट हुए. ब्रह्मा उसका ऊपरी सिरा और विष्णु निचला सिरा खोजने लगे, लेकिन दोनों असफल रहे. तब शिव ने बताया कि जो तत्व हर जगह समान है, वही शिव है. इसी दिव्य प्रकाश की स्मृति में पृथ्वी पर 12 ज्योतिर्लिंग प्रकट हुए.

सोमनाथ ज्योतिर्लिंग – गुजरात

सोमनाथ मंदिर अरब सागर के तट पर स्थित है और इसे पहला ज्योतिर्लिंग माना जाता है. कथा के अनुसार चंद्रदेव को श्राप से मुक्त करने के लिए भगवान शिव यहां प्रकट हुए. यह मंदिर कई बार नष्ट हुआ, फिर भी हर बार पुनर्निर्मित हुआ.
मंदिर समय: सुबह 6 से रात 10 बजे

मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग – आंध्र प्रदेश

यह ज्योतिर्लिंग श्रीशैलम पर्वत पर स्थित है. यहां भगवान शिव और माता पार्वती दोनों की पूजा होती है. कहा जाता है कि शिव अपने पुत्र कार्तिकेय को मनाने यहां आए थे.
मंदिर समय: सुबह 4:30 से रात 10 बजे

महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग – मध्य प्रदेश

उज्जैन में स्थित यह एकमात्र ज्योतिर्लिंग है जो दक्षिणमुखी है. यहां की भस्म आरती बहुत प्रसिद्ध है. मान्यता है कि शिव ने यहां राक्षस दुशान का वध किया था.
मंदिर समय: सुबह 3 से दोपहर 11 बजे

ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग – मध्य प्रदेश

नर्मदा नदी के बीच ओम आकार के द्वीप पर स्थित यह ज्योतिर्लिंग ओंकारेश्वर और ममलेश्वर दो रूपों में पूजित है. विंध्य पर्वत और राजा मान्धाता से जुड़ी कथाएं प्रसिद्ध हैं.
मंदिर समय: सुबह 5 से रात 10 बजे

बैद्यनाथ धाम – झारखंड

बाबाधाम यानी बैद्यनाथ धाम यह ज्योतिर्लिंग देवघर में स्थित है और शक्ति पीठ भी है. कथा के अनुसार रावण ने यहां शिव की तपस्या की थी. यहां पूजा से रोगों से मुक्ति मिलती है.
मंदिर समय: सुबह 4 से रात 9 बजे

ये भी पढ़ें: बैद्यनाथधाम में बाबा का तिलकोत्सव

भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग – महाराष्ट्र

सह्याद्री पर्वतों में स्थित यह मंदिर त्रिपुरासुर वध से जुड़ा है. यहां से भीमा नदी का उद्गम माना जाता है.
मंदिर समय: सुबह 5 से रात 9 बजे

रामनाथस्वामी ज्योतिर्लिंग – तमिलनाडु

रामेश्वरम में स्थित यह ज्योतिर्लिंग चार धाम में शामिल है. भगवान राम ने रावण वध के बाद यहां शिव की पूजा की थी.
मंदिर समय: सुबह 4:30 से रात 8:30 बजे

नागेश्वर ज्योतिर्लिंग – गुजरात

द्वारका के पास स्थित यह ज्योतिर्लिंग नाग देवता से जुड़ा है. यहां भगवान शिव ने भक्त सुप्रिया की रक्षा की थी.
मंदिर समय: सुबह 5 से रात 9 बजे

काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग – उत्तर प्रदेश

काशी को मोक्ष की नगरी कहा जाता है. यहां स्थित ज्योतिर्लिंग को अत्यंत पवित्र माना जाता है. मान्यता है कि यहां मृत्यु मोक्ष देती है.
मंदिर समय: सुबह 3 से दोपहर 11 बजे

त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग – महाराष्ट्र

यहां तीन मुखी शिवलिंग है जो ब्रह्मा, विष्णु और महेश का प्रतीक है. गोदावरी नदी का उद्गम स्थल भी यहीं है.
मंदिर समय: सुबह 5:30 से रात 9 बजे

केदारनाथ ज्योतिर्लिंग – उत्तराखंड

हिमालय में स्थित यह सबसे ऊंचा ज्योतिर्लिंग है. पांडवों और आदि शंकराचार्य से जुड़ी मान्यताएं प्रसिद्ध हैं.
मंदिर समय: मई से नवंबर तक (मौसम अनुसार)

घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग – महाराष्ट्र

यह सबसे छोटा ज्योतिर्लिंग मंदिर है. घुश्मा नामक भक्त महिला की भक्ति से प्रसन्न होकर शिव यहां प्रकट हुए.
मंदिर समय: सुबह 5 से रात 9 बजे

12 ज्योतिर्लिंग केवल मंदिर नहीं, बल्कि आस्था, भक्ति और मोक्ष का मार्ग हैं. इनका दर्शन मन को शांति, जीवन को दिशा और आत्मा को शिव से जोड़ता है.

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Shaurya Punj

लेखक के बारे में

By Shaurya Punj

मैंने डिजिटल मीडिया में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव हासिल किया है. पिछले 6 वर्षों से मैं विशेष रूप से धर्म और ज्योतिष विषयों पर सक्रिय रूप से लेखन कर रहा हूं. ये मेरे प्रमुख विषय हैं और इन्हीं पर किया गया काम मेरी पहचान बन चुका है. हस्तरेखा शास्त्र, राशियों के स्वभाव और उनके गुणों से जुड़ी सामग्री तैयार करने में मेरी निरंतर भागीदारी रही है. रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री प्राप्त करने के बाद. इसके साथ साथ कंटेंट राइटिंग और मीडिया से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में काम करते हुए मेरी मजबूत पकड़ बनी. इसके अलावा, एंटरटेनमेंट, लाइफस्टाइल और शिक्षा जैसे विषयों पर भी मैंने गहराई से लेखन किया है, जिससे मेरी लेखन शैली संतुलित, भरोसेमंद और पाठक-केंद्रित बनी है.

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