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Shani Ka Paya: ऐसे बनता है शनि का पाया, जानें स्थिति कब होती है शुभ

Updated at : 11 Aug 2025 11:53 AM (IST)
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Shani Ka Paya positive effects

Shani Ka Paya positive effects in hindi (PC: Freepik)

Shani Ka Paya: ज्योतिष शास्त्र में शनि का पाया व्यक्ति के जीवन में कई महत्वपूर्ण प्रभाव डालता है. यह जन्म के समय ग्रहों की स्थिति से निर्धारित होता है और जीवन के विभिन्न क्षेत्रों जैसे करियर, स्वास्थ्य, और रिश्तों पर असर डालता है. आइए जानते हैं, शनि का पाया कैसे बनता है और इसका प्रभाव कैसा रहता है.

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ज्योतिषशास्त्र में शनि का पाया एक महत्वपूर्ण विषय है, जिस पर अक्सर लोग ध्यान नहीं देते. जन्मकुंडली देखने पर जहां ग्रह-नक्षत्र की स्थिति का विश्लेषण किया जाता है, वहीं शनि के पाया को अनदेखा कर दिया जाता है, जिसके कारण व्यक्ति जीवन में अनावश्यक परेशानियों का सामना कर सकता है.

“पाया” का अर्थ हिंदी में स्तंभ होता है. किसी व्यक्ति की जन्म राशि और चंद्रकुंडली के आधार पर, शनि की स्थिति के अनुसार पाया तय होता है. शनि का पाया निर्धारण चंद्रमा और शनि की स्थिति के आधार पर किया जाता है, और यह दर्शाता है कि जन्म के समय शनि किस भाव में स्थित था.

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ज्योतिष के अनुसार, शनि का पाया चार प्रकार का होता है—

शनि के पाया के प्रकार और उनके प्रभावशनि के पाया के प्रकार और उनके प्रभाव

स्वर्ण (सोना) का पाया

यदि शनि, जन्म राशि (चंद्रकुंडली) से 1, 6 या 11वें भाव में स्थित हो, तो इसे सोने का पाया कहा जाता है. यह पाया शुभ माना जाता है और व्यापार, नौकरी तथा जीवन में उन्नति लाता है. हालांकि, परिणाम पूरी तरह सकारात्मक नहीं होते—कुछ स्थितियों में मिलाजुला असर भी दे सकता है.

चांदी का पाया

जब शनि 2, 5 या 9वें भाव में स्थित हो, तो यह चांदी का पाया कहलाता है. यह स्थिति बहुत शुभ मानी जाती है. व्यक्ति को धन लाभ, स्थिर आय और उच्च जीवनशैली प्राप्त होती है.

तांबे का पाया

यदि शनि 3, 7 या 10वें भाव में हो, तो इसे तांबे का पाया कहते हैं. यह पाया सामान्य परिणाम देता है. व्यक्ति को कार्यक्षेत्र में मेहनत करनी पड़ती है, लेकिन पारिवारिक जीवन सामान्य और संतोषजनक रहता है.

लोहा का पाया

जब शनि 4, 8 या 12वें भाव में स्थित हो, तो इसे लोहे का पाया कहा जाता है. यह कम शुभ माना जाता है. इसमें व्यक्ति पर कर्ज बढ़ सकता है, मानसिक तनाव रह सकता है, और कार्यक्षेत्र में विशेष अनुशासन व सतर्कता की आवश्यकता होती है.

जन्मकुंडली, वास्तु, तथा व्रत त्यौहार से सम्बंधित किसी भी तरह से जानकारी प्राप्त करने हेतु दिए गए नंबर पर फोन करके जानकारी प्राप्त कर सकते है .

ज्योतिषाचार्य संजीत कुमार मिश्रा
ज्योतिष वास्तु एवं रत्न विशेषज्ञ
8080426594/9545290847

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Shaurya Punj

लेखक के बारे में

By Shaurya Punj

मैंने डिजिटल मीडिया में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव हासिल किया है. पिछले 6 वर्षों से मैं विशेष रूप से धर्म और ज्योतिष विषयों पर सक्रिय रूप से लेखन कर रहा हूं. ये मेरे प्रमुख विषय हैं और इन्हीं पर किया गया काम मेरी पहचान बन चुका है. हस्तरेखा शास्त्र, राशियों के स्वभाव और उनके गुणों से जुड़ी सामग्री तैयार करने में मेरी निरंतर भागीदारी रही है. रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री प्राप्त करने के बाद. इसके साथ साथ कंटेंट राइटिंग और मीडिया से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में काम करते हुए मेरी मजबूत पकड़ बनी. इसके अलावा, एंटरटेनमेंट, लाइफस्टाइल और शिक्षा जैसे विषयों पर भी मैंने गहराई से लेखन किया है, जिससे मेरी लेखन शैली संतुलित, भरोसेमंद और पाठक-केंद्रित बनी है.

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