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होलिका दहन की अग्नि से दूर रहें ये 5 लोग

Updated at : 26 Feb 2026 2:25 PM (IST)
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Holika Dahan 2026 kin logon ko nahi dekhna chahiye

होलिका दहन की धार्मिक मान्यताएं

Holika Dahan 2026: होलिका दहन की अग्नि कुछ लोगों के लिए अशुभ मानी जाती है. जानें नई दुल्हन, गर्भवती महिला और इकलौती संतान की मां को क्यों दूर रहने की सलाह दी जाती है.

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Holika Dahan 2026: होली का पर्व दो दिन मनाया जाता है. फाल्गुन पूर्णिमा की रात होलिका दहन होता है और अगले दिन रंगों की होली खेली जाती है. होलिका दहन में लोग लकड़ियां और उपले इकट्ठा कर अग्नि जलाते हैं. यह बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है. पौराणिक कथा के अनुसार, भक्त प्रह्लाद की रक्षा के लिए भगवान विष्णु की कृपा से होलिका अग्नि में जल गई थीं, जबकि प्रह्लाद सुरक्षित बच गए थे.

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कुछ लोगों को होलिका दहन की अग्नि देखने से बचने की सलाह दी जाती है. आइए आसान भाषा में समझते हैं कि वे कौन-कौन लोग हैं.

नई दुल्हन

हिंदू परंपरा में कहा जाता है कि शादी के बाद पहली होली नई दुल्हन अपने मायके में मनाती है. मान्यता है कि उसे ससुराल में रहकर होलिका दहन नहीं देखना चाहिए. कथा के अनुसार, होलिका का विवाह इलोजी से होना था, लेकिन विवाह से पहले ही वह प्रह्लाद को लेकर अग्नि में बैठ गईं और जलकर भस्म हो गईं. इस घटना के कारण नई दुल्हन को होलिका दहन से दूर रखने की परंपरा बनी.

सास और बहू

एक मान्यता यह भी है कि सास और बहू को साथ खड़े होकर होलिका दहन नहीं देखना चाहिए. ऐसा माना जाता है कि इससे रिश्तों में तनाव या मतभेद बढ़ सकते हैं. इसलिए कई परिवारों में इस बात का ध्यान रखा जाता है कि दोनों एक साथ अग्नि दर्शन न करें.

इकलौती संतान की मां

लोक मान्यताओं के अनुसार, जिन माता-पिता की केवल एक ही संतान है, उन्हें भी होलिका दहन देखने से बचना चाहिए. इसका कारण यह बताया जाता है कि प्रह्लाद अपने पिता हिरण्यकश्यप की इकलौती संतान थे. इसी कथा से जुड़ी भावना के कारण यह परंपरा चली आ रही है.

गर्भवती महिलाएं

गर्भवती महिलाओं को भी होलिका दहन स्थल से दूर रहने की सलाह दी जाती है. धार्मिक कारणों के साथ-साथ इसका एक व्यावहारिक कारण भी है. अग्नि की तेज गर्मी और धुआं स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है, जो मां और गर्भस्थ शिशु दोनों के लिए ठीक नहीं है.

ये भी देखें: भद्रा और चंद्रग्रहण के बीच होलिका दहन

नवजात शिशु

नवजात बच्चों को भी होलिका दहन स्थल पर नहीं ले जाया जाता. मान्यता है कि वहां नकारात्मक ऊर्जा सक्रिय रहती है. साथ ही, धुआं और भीड़भाड़ छोटे बच्चों के स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकती है. इन मान्यताओं का पालन आस्था और परंपरा के आधार पर किया जाता है. हालांकि, आज के समय में लोग धार्मिक विश्वास के साथ-साथ स्वास्थ्य और सुरक्षा को भी ध्यान में रखते हैं.

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Shaurya Punj

लेखक के बारे में

By Shaurya Punj

मैंने डिजिटल मीडिया में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव हासिल किया है. पिछले 6 वर्षों से मैं विशेष रूप से धर्म और ज्योतिष विषयों पर सक्रिय रूप से लेखन कर रहा हूं. ये मेरे प्रमुख विषय हैं और इन्हीं पर किया गया काम मेरी पहचान बन चुका है. हस्तरेखा शास्त्र, राशियों के स्वभाव और उनके गुणों से जुड़ी सामग्री तैयार करने में मेरी निरंतर भागीदारी रही है. रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री प्राप्त करने के बाद. इसके साथ साथ कंटेंट राइटिंग और मीडिया से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में काम करते हुए मेरी मजबूत पकड़ बनी. इसके अलावा, एंटरटेनमेंट, लाइफस्टाइल और शिक्षा जैसे विषयों पर भी मैंने गहराई से लेखन किया है, जिससे मेरी लेखन शैली संतुलित, भरोसेमंद और पाठक-केंद्रित बनी है.

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