शनिदेव पर क्यों चढ़ाते हैं सरसों का तेल, जानिए रोचक कहानियां

Published by : Shaurya Punj Updated At : 22 Feb 2025 10:23 AM

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Shani Dev interesting story on oil pouring

Shani Dev: शनि देव की साढ़ेसाती और ढैय्या का प्रभाव प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन में अनुभव करना पड़ता है. इसके साथ ही, शनि देव का संबंध शनिवार से स्थापित किया गया है. इस कारण, लोग शनि देव को सरसों का तेल और काले तिल अर्पित करते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि शनिदेव पर सरसों का तेल चढ़ाने का कारण क्या है? आइए, इस विषय में जानकारी प्राप्त करते हैं.

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Shani Dev: ग्रहों में शनिदेव को कर्मों का फल देने वाला ग्रह माना जाता है. शनिदेव एकमात्र ऐसे देवता हैं जिनकी पूजा लोग भय के कारण करते हैं. हालांकि, यह समझना आवश्यक है कि शनिदेव न्याय के देवता हैं, जो मनुष्य को उसके कर्मों के अनुसार फल प्रदान करते हैं. प्रायः देखा जाता है कि शनिवार के दिन शनिदेव पर तेल चढ़ाया जाता है और सरसों के तेल का दीपक भी जलाया जाता है. तेल और शनिदेव के बीच क्या संबंध है? शनिदेव को तेल चढ़ाने का कारण क्या है? शनिदेव को तेल चढ़ाने के पीछे दो प्रमुख पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं.

जब हनुमानजी और शनिदेव के बीच हुआ भयंकर संघर्ष

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, एक समय शनिदेव को अपनी शक्तियों पर अत्यधिक गर्व हो गया था और उन्हें यह विश्वास हो गया था कि पूरे ब्रह्मांड में उनसे अधिक शक्तिशाली कोई नहीं है. इसी समय, हनुमानजी की प्रसिद्धि भी तेजी से बढ़ रही थी. बजरंगबली के अद्भुत कार्यों को देखकर सभी लोग आश्चर्यचकित थे और उनकी वीरता की कहानियाँ गा रहे थे. यह सब देखकर शनिदेव को अत्यधिक क्रोध आया और उन्होंने सोचा कि हनुमानजी से अधिक शक्तिशाली और कौन हो सकता है.

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इसलिए शनिदेव ने हनुमानजी को आमने-सामने की लड़ाई के लिए चुनौती दी और इस राम भक्त के पास युद्ध के लिए आए. जब शनिदेव ने हनुमानजी को ललकारा, उस समय हनुमानजी अपने प्रभु श्रीराम की भक्ति में मग्न थे. उन्होंने शनिदेव को युद्ध न करने के लिए कई बार समझाया, लेकिन शनिदेव ने उनकी बात नहीं मानी. इसके परिणामस्वरूप, दोनों के बीच एक भयंकर युद्ध हुआ. जब इस युद्ध के दौरान शनिदेव गंभीर रूप से घायल हुए और उन्हें अत्यधिक पीड़ा का अनुभव हुआ, तब हनुमानजी ने युद्ध को रोककर उनके घावों पर सरसों का तेल लगाना प्रारंभ किया. इससे शनिदेव को राहत मिलने लगी और धीरे-धीरे उनका समस्त दर्द समाप्त हो गया. तभी से सरसों का तेल शनिदेव की प्रिय वस्तुओं में से एक बन गया. शनिदेव ने कहा कि जो भी भक्त सच्चे मन से उन्हें तेल अर्पित करेगा, उसके जीवन से सभी कष्ट और संकट दूर हो जाएंगे. इस युद्ध के पश्चात शनिदेव और हनुमानजी के बीच मित्रता का संबंध स्थापित हो गया. इसलिए, जो भक्त हनुमानजी की पूजा करते हैं, शनि उन्हें सभी कष्टों से मुक्त रखते हैं.

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हनुमान जी ने शनिदेव को मुक्त कराया था

रावण ने सभी नवग्रहों को अपने दरबार में बंदी बना रखा था, जिसमें शनिदेव को उल्टा लटका दिया गया था. जब हनुमान जी सीता माता की खोज में लंका पहुंचे, तो उन्होंने अशोक वाटिका को नष्ट कर दिया. इसके परिणामस्वरूप इंद्रजीत ने हनुमान जी को पकड़ लिया और उन्हें रावण के समक्ष पेश किया. रावण ने क्रोधित होकर अपने सैनिकों को हनुमान जी की पूंछ में आग लगाने का आदेश दिया. जब हनुमान जी की पूंछ में आग लगाई गई, तो इससे लंका में भी आग लग गई और सभी ग्रह वहां से भाग गए. लेकिन शनिदेव उल्टे लटके होने के कारण नहीं जा सके.

हनुमान जी की नजर शनि देव पर पड़ी. शनि देव अत्यधिक पीड़ा में थे और उनका दर्द असहनीय था. हनुमान जी ने उनके शरीर पर तेल लगाया, जिससे शनिदेव का दर्द समाप्त हो गया. इसके बाद शनिदेव ने कहा कि जो भी व्यक्ति श्रद्धा और भक्ति से उन पर तेल चढ़ाएगा, उसकी सभी समस्याएं हल हो जाएंगी. इसी कारण से शनिदेव पर सरसों का तेल चढ़ाया जाता है. इसके अतिरिक्त, शनि देव ने यह भी कहा कि जो व्यक्ति शनिवार के दिन हनुमान जी की पूजा करेगा, उस पर उनकी बुरी दृष्टि कभी नहीं पड़ेगी और साढ़ेसाती तथा ढैय्या भी उसे परेशान नहीं करेंगी.

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लेखक के बारे में

By Shaurya Punj

शौर्य पुंज डिजिटल मीडिया में पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर हैं. उन्हें न्यूज वर्ल्ड में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. शौर्य खबरों की नब्ज को समझकर उसे आसान और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में माहिर हैं. साल 2008 में ग्रेजुएशन के दौरान उन्होंने दैनिक हिंदुस्तान, प्रभात खबर, दैनिक जागरण और तरंग भारती (हिंदी पाक्षिक समाचार पत्र) के लिए फ्रीलांसिंग की. वर्ष 2011 में उन्होंने दैनिक जागरण के टैब्लॉइड समाचार पत्र iNext में दो महीने की इंटर्नशिप की. इसी दौरान उन्हें प्रभात खबर के डिजिटल सेक्शन में काम करने का अवसर मिला. अप्रैल 2011 से उन्होंने प्रभातखबर.कॉम के एंटरटेनमेंट सेक्शन के लिए कार्य करना शुरू किया. उस समय उन्होंने बॉलीवुड फिल्म रिव्यू, बॉक्स ऑफिस बिजनेस और एंटरटेनमेंट गॉसिप जैसी खबरों पर काम किया. साल 2020 में कोरोना काल के दौरान उन्हें लाइफस्टाइल, धर्म-कर्म, एजुकेशन और हेल्थ जैसे नॉन-न्यूज सेक्शन में काम करने का अवसर मिला. उन्होंने लाइफस्टाइल कैटेगरी के कई महत्वपूर्ण सेक्शनों में योगदान दिया. Health & Fitness सेक्शन में डाइट, योग, वेट लॉस, मानसिक स्वास्थ्य और फिटनेस टिप्स से जुड़े उपयोगी कंटेंट पर कार्य किया. Beauty & Fashion सेक्शन में स्किन केयर, हेयर केयर, मेकअप और ट्रेंडिंग फैशन विषयों पर लेख तैयार किए. Relationship & Family कैटेगरी में पति-पत्नी संबंध, डेटिंग, पैरेंटिंग और दोस्ती जैसे विषयों पर जानकारीपूर्ण कंटेंट लिखा. Food & Recipes सेक्शन में हेल्दी फूड, रेसिपी और किचन टिप्स से संबंधित सामग्री विकसित की. Travel सेक्शन के लिए घूमने की जगहों, बजट ट्रिप और ट्रैवल टिप्स पर लेखन किया. Astrology / Vastu में राशिफल, वास्तु टिप्स और ज्योतिष आधारित कंटेंट पर काम किया. Career & Motivation सेक्शन में सेल्फ-इम्प्रूवमेंट, मोटिवेशन और पर्सनैलिटी डेवलपमेंट विषयों पर योगदान दिया. Festival & Culture सेक्शन में त्योहारों की परंपराएं, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त से संबंधित कंटेंट पर कार्य किया. इसके अलावा Women Lifestyle / Men Lifestyle और Health Education & Wellness जैसे विषयों पर भी मर्यादित एवं जानकारीपूर्ण लेखन के माध्यम से योगदान दिया. साल 2023 से शौर्य ने पूरी तरह से प्रभातखबर.कॉम के धर्म-कर्म और राशिफल सेक्शन में अपना योगदान देना शुरू किया. इस दौरान उन्होंने दैनिक राशिफल, साप्ताहिक एवं मासिक भविष्यफल, पूजा-पाठ, व्रत-त्योहार, शुभ मुहूर्त, ज्योतिषीय उपाय, वास्तु टिप्स और धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी खबरों पर विशेष फोकस किया. साथ ही पाठकों की रुचि को ध्यान में रखते हुए सरल, सहज और जानकारीपूर्ण धार्मिक कंटेंट तैयार करने पर लगातार कार्य किया. रांची में जन्मे शौर्य की प्रारंभिक शिक्षा डीएवी पब्लिक स्कूल, हेहल, रांची से हुई. इसके बाद उन्होंने सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एण्ड वीडियो प्रोडक्शन में बी.ए. ऑनर्स की डिग्री प्राप्त की. यह शैक्षणिक पृष्ठभूमि उन्हें हिंदी पत्रकारिता की वह विशेषज्ञता प्रदान करती है, जो पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws और 1H — क्या, कौन, कहां, कब, क्यों और कैसे — के आधार पर प्रभावी और तथ्यपूर्ण समाचार लेखन के लिए आवश्यक मानी जाती है.

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