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मां सरस्वती के मूर्ति विसर्जन पर इन मंत्रों का जाप जरूरी

Updated at : 04 Feb 2025 12:00 PM (IST)
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Saraswati Puja 2025 Murti Visarjan

Saraswati Puja 2025 Murti Visarjan

Saraswati Puja 2025 Murti Visarjan: सरस्वती पूजा के पश्चात मां सरस्वती की प्रतिमा का विसर्जन करने की प्रक्रिया निर्धारित है. इस संदर्भ में ज्योतिषाचार्य से हम सरस्वती विसर्जन के शुभ मुहूर्त, विधि और मंत्र के विषय में विस्तृत जानकारी प्राप्त करते हैं.

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Saraswati Puja Visarjan 2025: बसंत पंचमी के अवसर पर मां सरस्वती की पूजा-अर्चना करते है.इस साल बसंत पंचमी 03 फरवरी 2025, सोमवार के दिन पड़ रही है.साथ ही यह भी है कि सरस्वती पूजा के दिन ही शाही या अमृत स्नान का योग है. धार्मिक शास्त्रों के अनुसार , जहां एक तरफ बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की प्रतिमा को घर में स्थापित किया जाता है. वहीं, दूसरी तरफ उसके अगले दिन मां सरस्वती की प्रतिमा का विसर्जन करने का विधि माना जाता है.

सरस्वती विसर्जन शुभ मुहूर्त

ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक सरस्वती विसर्जन षष्ठी के दिन करना शुभ होता है.साथ ही ऐसे में षष्ठी तिथि का शुभारंभ 03 फरवरी 2025 को सुबह 09 बजकर 52 मिनट से होगा वहीं, इसका समापन 04 फरवरी 2025, दिन मंगलवार को रात 09 बजकर 49 मिनट पर होगा. ऐसे में सरस्वती विसर्जन के लिए शुभ मुहूर्त सुबह 10 बजकर 13 मिनट से दोपहर 12 बजकर 15 मिनट तक होगा.

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सरस्वती विसर्जन पूजा विधि

विसर्जन के दिन सबसे पहले, मां सरस्वती की प्रतिमा को अच्छे से साफ करें और उनका 16 श्रृंगार कर उन्हें नए वस्त्र दान करें, साथ ही मां सरस्वती की प्रतिमा के पास सफेद या पीला फूल माला, तिल के तेल मे दीपक, अगरबत्ती और चंदन आदि से पूरी श्रद्धा से पूजा- आराधना करें.वहीं पूजा के समय विशेष रूप से मां सरस्वती के मंत्रों का उच्चारण पूरी भक्ति भाव से करते रहें.फिर एक लाल वस्त्र में मां को थोड़े पीले चावल,दुभ,पैसे उन्हें दान करें फिर हवन आहुति पूर्ण करने के बाद प्रतिमा को रखें और पवित्र नदी में विसर्जित कर देना चाहिए.

सरस्वती विसर्जन मंत्र जाप

माता सरस्वती के विसर्जन के दौरान इन मंत्रों का जाप करना अत्यधिक शुभदायक होता है.इससे मां के जाने के बाद भी उनकी ऊर्जा और दिव्यता से घर में सकारात्मकता का वास बना रहता है.

  • मां सरस्वती का विसर्जन करते समय अपने हाथ में शुद्ध जल लेकर और श्रद्धा से बोलें से इन मंत्रों का जाप करते रहना चाहिए.
  • ओम सांग-सवाहन-सपरिवार भूर्भुवःस्वः श्रीसरस्वती पूजितासि प्रसीद प्रसन्ना.
  • माता का विसर्जन करने के बाद इस मंत्र का उच्चारण करें
  • क्षमस्व स्वस्थानं गच्छ,इसके अलावा, ‘ओम गं गणपति पूजितोसि-प्रसीद-प्रसनो-भव-क्षमस्व स्वस्थानं गच्छ.
  • , ‘ओम सूर्यादि नवग्रहाः पूजितोसि-प्रसीद-प्रसनो-भव-क्षमस्व स्वस्थानं गच्छ.
  • ‘ओम इन्द्रादि दशदिक्पालाः प्रसीद-प्रसनो-भव-क्षमस्व स्वस्थानं गच्छ. मंत्र का एक-एक कर जाप करें.
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Gitanjali Mishra

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By Gitanjali Mishra

Gitanjali Mishra is a contributor at Prabhat Khabar.

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