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Sakat Chauth Vrat Katha: गणपति बप्पा की कृपा पाने का दिन, सकट चौथ की चमत्कारी कथा

Sakat Chauth Vrat Katha: माघ मास की कृष्ण चतुर्थी पर रखा जाने वाला सकट चौथ व्रत संतान की रक्षा, सुख-समृद्धि और संकट निवारण के लिए विशेष माना गया है. इस पावन दिन गणपति बप्पा की कृपा प्राप्त होती है.

Sakat Chauth Vrat Katha: सनातन परंपरा में कुछ व्रत केवल रीति नहीं, बल्कि मां की ममता और आस्था की शक्ति के प्रतीक होते हैं. ऐसा ही एक पावन व्रत है सकट चौथ, जो माघ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है. यह दिन विशेष रूप से संतान की रक्षा, सुख-समृद्धि और लंबी आयु की कामना से जुड़ा माना गया है. आज 6 जनवरी 2026 को साल का पहला सकट चौथ है इस शुभ अवसर पर सकट चौथ की कथा सनना भी शुभफल देता है. यहां देखें सकट चौथ की व्रत कथा

सकट चौथ की व्रत कथा

सनातन परंपरा में कुछ व्रत केवल रीति नहीं, बल्कि मां की ममता और आस्था की शक्ति के प्रतीक होते हैं. ऐसा ही एक पावन व्रत है सकट चौथ, जो माघ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है. यह दिन विशेष रूप से संतान की रक्षा, सुख-समृद्धि और लंबी आयु की कामना से जुड़ा माना गया है.

पौराणिक कथा के अनुसार, एक नगर में एक कुम्हार रहता था. वह दिन-रात मेहनत कर मिट्टी के बर्तन बनाता, लेकिन जब भी भट्ठी लगाता, बर्तन पकते ही नहीं थे. परेशान होकर वह राजा के दरबार में पहुंचा. राजा ने समस्या का समाधान जानने के लिए पंडितों को बुलाया. दुर्भाग्यवश, पंडितों ने एक कठोर उपाय बताया—भट्ठी में बच्चे की बली.

राजा की आज्ञा से नगर में यह अमानवीय प्रथा चल पड़ी. जिस घर की बारी आती, वहां शोक छा जाता. इसी क्रम में एक दिन सकट चौथ के पावन अवसर पर एक गरीब बुढ़िया के इकलौते बेटे की बारी आ गई. वह बेटा ही उसकी पूरी दुनिया था. विवश होकर भी बुढ़िया का विश्वास नहीं टूटा. सकट चौथ की रात, उसने अपने बेटे को दूर्वा और सकट की सुपारी दी और कांपती आवाज में कहा— “बेटा, भगवान गणेश का नाम लेकर भट्ठी में बैठ जाना. सकट माता सब संभाल लेंगी.”

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उधर, बुढ़िया चौथ माता और भगवान गणेश की पूजा में लीन हो गई. उसकी आंखों से आंसू बह रहे थे, लेकिन मन में अटूट श्रद्धा थी. चमत्कार हुआ—जो भट्ठी कई दिनों में पकती थी, वह एक ही रात में पक गई. सुबह होते ही सभी बच्चे सुरक्षित बाहर आ गए. नगरवासियों ने इसे सकट माता और भगवान गणेश की कृपा माना. तभी से सकट चौथ व्रत को संतान सुख, संकट निवारण और मंगलकामनाओं का प्रतीक माना जाने लगा. आज भी यह व्रत मातृत्व की शक्ति और अडिग विश्वास की कथा सुनाता है.

Shaurya Punj
Shaurya Punj
रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री प्राप्त करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में 14 वर्षों से अधिक समय तक काम करने का अनुभव हासिल किया है. धर्म और ज्योतिष मेरे प्रमुख विषय रहे हैं, जिन पर लेखन मेरी विशेषता है. हस्तरेखा शास्त्र, राशियों के स्वभाव और गुणों से जुड़ी सामग्री तैयार करने में मेरी सक्रिय भागीदारी रही है. इसके अतिरिक्त, एंटरटेनमेंट, लाइफस्टाइल और शिक्षा जैसे विषयों पर भी मैंने गहराई से काम किया है. 📩 संपर्क : shaurya.punj@prabhatkhabar.in

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