होलिका दहन पर इन लकड़ियों को जलाना माना गया है अशुभ
Published by : Shaurya Punj Updated At : 23 Feb 2026 12:48 PM
होलिका दहन में लकड़ी जलाने के नियम
Holika Dahan 2026: होलिका दहन में कुछ पवित्र पेड़ों की लकड़ी जलाना वर्जित माना गया है. धार्मिक मान्यता अनुसार ऐसा करने से दोष लग सकता है और पूजा का पूरा शुभ फल नहीं मिलता.
Holika Dahan 2026: होलिका दहन हिंदू धर्म का महत्वपूर्ण पर्व है, जिसे बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में मनाया जाता है. यह परंपरा प्रह्लाद की अटूट भक्ति और होलिका के अंत की याद दिलाती है. वर्ष 2026 में यह पर्व 03 मार्च को मनाया जाएगा. इस दिन श्रद्धालु विधि-विधान से पूजा करते हैं और अग्नि में सामग्री अर्पित कर सुख, शांति और नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति की प्रार्थना करते हैं.
होलिका दहन पर पूजा की परंपरा
होलिका दहन में लकड़ियों से अग्नि प्रज्वलित की जाती है, लेकिन धार्मिक मान्यताओं के अनुसार हर प्रकार की लकड़ी का उपयोग उचित नहीं माना गया है. सही लकड़ी का चयन करना जरूरी होता है, क्योंकि इसका संबंध आस्था के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण से भी जुड़ा हुआ है.
हरे और जीवित पेड़ों की लकड़ी का प्रयोग न करें
होलिका दहन में कभी भी हरे और जीवित पेड़ों की लकड़ी का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. हरे पेड़ जीवन का प्रतीक होते हैं और उन्हें काटना अशुभ माना जाता है. धर्म के अनुसार, जीवित पेड़ को नुकसान पहुंचाना पाप के समान माना गया है. इसलिए हमेशा सूखी और गिरी हुई लकड़ियों का ही उपयोग करना चाहिए. इससे प्रकृति की रक्षा भी होती है और पूजा का पूरा फल भी मिलता है.
| पेड़ के नाम | कारण / महत्व |
| पीपल | बहुत पवित्र पेड़ माना जाता है, इसे जलाना अशुभ समझा जाता है |
| शमी | पूजा में इस्तेमाल होने वाला पेड़ है, इसे नहीं जलाना चाहिए |
| आम | शुभ कामों में आम के पत्ते लगाए जाते हैं, इसलिए इसकी लकड़ी न जलाएं |
| आंवला | धार्मिक और औषधीय महत्व वाला पेड़ है |
| नीम | सेहत के लिए फायदेमंद और पवित्र माना जाता है |
| केला | पूजा-पाठ में काम आता है |
| अशोक | खुशहाली का प्रतीक माना जाता है |
| बेल | भगवान शिव को प्रिय है, इसलिए इसे जलाने से बचें |
फल देने वाले पेड़ों की लकड़ी से बचें
धार्मिक मान्यता के अनुसार, आम, पीपल, बरगद और नीम जैसे फल और पूजनीय पेड़ों की लकड़ी होलिका दहन में नहीं जलानी चाहिए. ये पेड़ पवित्र माने जाते हैं और लोगों को जीवन देने वाले होते हैं. खासकर पीपल और बरगद में देवी-देवताओं का वास माना जाता है. इन पेड़ों की लकड़ी जलाने से नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है और पूजा का शुभ फल कम हो सकता है.
गंदी या अशुद्ध लकड़ी का उपयोग न करें
होलिका दहन में गंदी, सड़ी-गली या कूड़े में पड़ी लकड़ियों का प्रयोग भी नहीं करना चाहिए. ऐसी लकड़ियां अशुद्ध मानी जाती हैं और पूजा की पवित्रता को कम करती हैं. प्लास्टिक, रबर, कपड़ा या किसी भी तरह का कचरा भी अग्नि में नहीं डालना चाहिए. इससे वातावरण प्रदूषित होता है और धार्मिक नियमों का भी उल्लंघन होता है.
सूखी और पवित्र लकड़ी का ही करें उपयोग
होलिका दहन के लिए हमेशा सूखी, साफ और प्राकृतिक रूप से गिरी हुई लकड़ियों का ही उपयोग करना सबसे अच्छा माना जाता है. सूखी लकड़ी आसानी से जलती है और इसे शुद्ध माना जाता है. इससे पर्यावरण को भी नुकसान नहीं होता. साथ ही, गोबर के उपले भी होलिका दहन में शुभ माने जाते हैं और इनका उपयोग करना अच्छा होता है.
प्रकृति और धर्म दोनों का रखें ध्यान
होलिका दहन केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि यह हमें प्रकृति का सम्मान करना भी सिखाता है. सही लकड़ी का चयन करना हमारी जिम्मेदारी है. अगर हम धार्मिक नियमों का पालन करते हुए सूखी और पवित्र लकड़ियों का उपयोग करेंगे, तो पूजा का पूरा फल मिलेगा और पर्यावरण भी सुरक्षित रहेगा. यही होलिका दहन का सही संदेश है.
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By Shaurya Punj
शौर्य पुंज डिजिटल मीडिया में पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर हैं. उन्हें न्यूज वर्ल्ड में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. शौर्य खबरों की नब्ज को समझकर उसे आसान और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में माहिर हैं. साल 2008 में ग्रेजुएशन के दौरान उन्होंने दैनिक हिंदुस्तान, प्रभात खबर, दैनिक जागरण और तरंग भारती (हिंदी पाक्षिक समाचार पत्र) के लिए फ्रीलांसिंग की. वर्ष 2011 में उन्होंने दैनिक जागरण के टैब्लॉइड समाचार पत्र iNext में दो महीने की इंटर्नशिप की. इसी दौरान उन्हें प्रभात खबर के डिजिटल सेक्शन में काम करने का अवसर मिला. अप्रैल 2011 से उन्होंने प्रभातखबर.कॉम के एंटरटेनमेंट सेक्शन के लिए कार्य करना शुरू किया. उस समय उन्होंने बॉलीवुड फिल्म रिव्यू, बॉक्स ऑफिस बिजनेस और एंटरटेनमेंट गॉसिप जैसी खबरों पर काम किया. साल 2020 में कोरोना काल के दौरान उन्हें लाइफस्टाइल, धर्म-कर्म, एजुकेशन और हेल्थ जैसे नॉन-न्यूज सेक्शन में काम करने का अवसर मिला. उन्होंने लाइफस्टाइल कैटेगरी के कई महत्वपूर्ण सेक्शनों में योगदान दिया. Health & Fitness सेक्शन में डाइट, योग, वेट लॉस, मानसिक स्वास्थ्य और फिटनेस टिप्स से जुड़े उपयोगी कंटेंट पर कार्य किया. Beauty & Fashion सेक्शन में स्किन केयर, हेयर केयर, मेकअप और ट्रेंडिंग फैशन विषयों पर लेख तैयार किए. Relationship & Family कैटेगरी में पति-पत्नी संबंध, डेटिंग, पैरेंटिंग और दोस्ती जैसे विषयों पर जानकारीपूर्ण कंटेंट लिखा. Food & Recipes सेक्शन में हेल्दी फूड, रेसिपी और किचन टिप्स से संबंधित सामग्री विकसित की. Travel सेक्शन के लिए घूमने की जगहों, बजट ट्रिप और ट्रैवल टिप्स पर लेखन किया. Astrology / Vastu में राशिफल, वास्तु टिप्स और ज्योतिष आधारित कंटेंट पर काम किया. Career & Motivation सेक्शन में सेल्फ-इम्प्रूवमेंट, मोटिवेशन और पर्सनैलिटी डेवलपमेंट विषयों पर योगदान दिया. Festival & Culture सेक्शन में त्योहारों की परंपराएं, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त से संबंधित कंटेंट पर कार्य किया. इसके अलावा Women Lifestyle / Men Lifestyle और Health Education & Wellness जैसे विषयों पर भी मर्यादित एवं जानकारीपूर्ण लेखन के माध्यम से योगदान दिया. साल 2023 से शौर्य ने पूरी तरह से प्रभातखबर.कॉम के धर्म-कर्म और राशिफल सेक्शन में अपना योगदान देना शुरू किया. इस दौरान उन्होंने दैनिक राशिफल, साप्ताहिक एवं मासिक भविष्यफल, पूजा-पाठ, व्रत-त्योहार, शुभ मुहूर्त, ज्योतिषीय उपाय, वास्तु टिप्स और धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी खबरों पर विशेष फोकस किया. साथ ही पाठकों की रुचि को ध्यान में रखते हुए सरल, सहज और जानकारीपूर्ण धार्मिक कंटेंट तैयार करने पर लगातार कार्य किया. रांची में जन्मे शौर्य की प्रारंभिक शिक्षा डीएवी पब्लिक स्कूल, हेहल, रांची से हुई. इसके बाद उन्होंने सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एण्ड वीडियो प्रोडक्शन में बी.ए. ऑनर्स की डिग्री प्राप्त की. यह शैक्षणिक पृष्ठभूमि उन्हें हिंदी पत्रकारिता की वह विशेषज्ञता प्रदान करती है, जो पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws और 1H — क्या, कौन, कहां, कब, क्यों और कैसे — के आधार पर प्रभावी और तथ्यपूर्ण समाचार लेखन के लिए आवश्यक मानी जाती है.
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