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फाल्गुन पूर्णिमा पर क्यों की जाती है अग्नि पूजा

Updated at : 23 Feb 2026 10:28 AM (IST)
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Falgun Purnima Agni Puja

फाल्गुन पूर्णिमा में अग्नि पूजा का धार्मिक महत्व

Falgun Purnima 2026: फाल्गुन पूर्णिमा पर अग्नि पूजा बुराई के अंत और अच्छाई की जीत का प्रतीक है. इस दिन अग्नि से नकारात्मकता दूर कर सुख-समृद्धि की कामना की जाती है.

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Falgun Purnima 2026: फाल्गुन पूर्णिमा हिंदू धर्म की सबसे पवित्र तिथियों में से एक मानी जाती है. इसी दिन होलिका दहन किया जाता है, जिसमें अग्नि की पूजा का विशेष महत्व होता है. धार्मिक मान्यता है कि यह अग्नि बुराई, नकारात्मक ऊर्जा और पापों को जलाकर जीवन में सुख और शांति लाती है. फाल्गुन पूर्णिमा सर्दी के अंत और बसंत के आगमन का भी प्रतीक है. इसलिए इस दिन अग्नि को शुद्धि और नई शुरुआत का माध्यम माना जाता है.

प्रह्लाद और होलिका की पौराणिक कथा

अग्नि पूजा के पीछे सबसे बड़ी वजह प्रह्लाद और होलिका की पौराणिक कथा है. कथा के अनुसार, प्रह्लाद भगवान विष्णु के परम भक्त थे. उनके पिता हिरण्यकश्यपु इस बात से नाराज थे और उन्होंने अपनी बहन होलिका से प्रह्लाद को आग में लेकर बैठने को कहा. होलिका को वरदान था कि अग्नि उसे जला नहीं सकती. लेकिन भगवान की कृपा से प्रह्लाद सुरक्षित बच गए और होलिका जल गई. इस घटना के बाद से अग्नि को सत्य और भक्ति की जीत का प्रतीक मानकर पूजा की जाने लगी.

अग्नि को क्यों माना जाता है शुद्ध करने वाला

धर्म में अग्नि को बहुत पवित्र माना गया है. ऐसा विश्वास है कि अग्नि हर तरह की नकारात्मकता और अशुद्धि को खत्म कर देती है. फाल्गुन पूर्णिमा पर जब अग्नि जलाई जाती है, तो लोग अपनी परेशानियों, दुख और बुरी आदतों को खत्म करने की भावना से उसकी पूजा करते हैं. यह अग्नि जीवन में नई ऊर्जा और सकारात्मक सोच लाने का प्रतीक भी होती है.

सुख-समृद्धि की कामना के लिए होती है पूजा

फाल्गुन पूर्णिमा की अग्नि पूजा केवल परंपरा नहीं, बल्कि सुख-समृद्धि की कामना का भी माध्यम है. लोग अग्नि के चारों ओर परिक्रमा करते हैं और भगवान से अपने परिवार की खुशहाली, स्वास्थ्य और सफलता की प्रार्थना करते हैं. मान्यता है कि इस दिन अग्नि पूजा करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और अच्छे दिन शुरू होते हैं.

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बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश

फाल्गुन पूर्णिमा पर अग्नि पूजा हमें एक बड़ा संदेश भी देती है. यह बताती है कि चाहे बुराई कितनी भी शक्तिशाली क्यों न हो, अंत में जीत हमेशा सच्चाई और भक्ति की ही होती है. यही कारण है कि हर साल लोग श्रद्धा और विश्वास के साथ अग्नि पूजा करते हैं और अपने जीवन में अच्छाई को अपनाने का संकल्प लेते हैं. यह पर्व धर्म, आस्था और सकारात्मक जीवन का प्रतीक माना जाता है.

ज्योतिषाचार्य संजीत कुमार मिश्रा
15+ वर्षों का अनुभव | ज्योतिष, वास्तु एवं रत्न विशेषज्ञ
Consultation: 8080426594 / 9545290847

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Shaurya Punj

लेखक के बारे में

By Shaurya Punj

मैंने डिजिटल मीडिया में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव हासिल किया है. पिछले 6 वर्षों से मैं विशेष रूप से धर्म और ज्योतिष विषयों पर सक्रिय रूप से लेखन कर रहा हूं. ये मेरे प्रमुख विषय हैं और इन्हीं पर किया गया काम मेरी पहचान बन चुका है. हस्तरेखा शास्त्र, राशियों के स्वभाव और उनके गुणों से जुड़ी सामग्री तैयार करने में मेरी निरंतर भागीदारी रही है. रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री प्राप्त करने के बाद. इसके साथ साथ कंटेंट राइटिंग और मीडिया से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में काम करते हुए मेरी मजबूत पकड़ बनी. इसके अलावा, एंटरटेनमेंट, लाइफस्टाइल और शिक्षा जैसे विषयों पर भी मैंने गहराई से लेखन किया है, जिससे मेरी लेखन शैली संतुलित, भरोसेमंद और पाठक-केंद्रित बनी है.

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