संत रविदास के ये 20 दोहे देते हैं भक्ति और मानवता का संदेश
Published by : Shaurya Punj Updated At : 12 Feb 2025 12:52 PM
Sant Ravidas ke Dohe
Ravidas Jayanti 2025: माघ पूर्णिमा के अवसर पर संत रविदास की जयंती मनाई जाती है. उन्होंने अपने उपदेशों के जरिए समाज में प्रेम और एकता का संदेश फैलाया, बिना किसी भेदभाव के, जिसके कारण वे भक्ति मार्ग के प्रमुख संतों में से एक माने जाते हैं.
Ravidas Jayanti 2025, Sant Ravidas ke Dohe: आज बुधवार, 12 फरवरी को रविदास जयंती मनाई जा रही है. संत रविदास ने अपने लेखन के माध्यम से अनेक आध्यात्मिक और सामाजिक संदेश प्रस्तुत किए, जो जीवन में प्रेरणा का स्रोत बनते हैं. यदि आप नए वर्ष में संत रविदास के दोहों से मिली शिक्षाओं को अपने जीवन में शामिल करेंगे, तो आप अनेक कठिनाइयों से बच सकेंगे और जीवन के वास्तविक अर्थ को समझ पाएंगे. यहां प्रस्तुत हैं रविदास के कुछ दोहे
मन चंगा तो कठौती में गंगा
अर्थ: जिस व्यक्ति का मन पवित्र और निर्मल होता है, उसके द्वारा किया गया प्रत्येक कार्य मां गंगा के समान पवित्र होता है.
Ravidas Jayanti 2025 पर यहां से देखें संत रविदास के प्रेरणादायक कोट्स
जाति-जाति में जाति हैं, जो केतन के पात,
रैदास मनुष ना जुड़ सके जब तक जाति न जात
अर्थ: जैसे केले के तने को छिलने पर पत्तों के नीचे और पत्ते मिलते हैं, अंततः कुछ भी नहीं बचता और पूरा पेड़ समाप्त हो जाता है. इसी प्रकार, मनुष्यों को जातियों में विभाजित किया गया है. यदि जातियों के आधार पर मनुष्यों को अलग किया जाए, तो वे भी केले के पत्तों की तरह समाप्त हो जाते हैं, लेकिन जाति का अस्तित्व बना रहता है. रविदास का कहना है कि जब तक जाति का अंत नहीं होगा, तब तक मनुष्य एक-दूसरे से नहीं जुड़ सकते.
कह रैदास तेरी भगति दूरि है, भाग बड़े सो पावै
तजि अभिमान मेटि आपा पर, पिपिलक हवै चुनि खावै
अर्थ: ईश्वर की आराधना भाग्य के माध्यम से प्राप्त होती है. जो व्यक्ति अभिमान से मुक्त होता है, वह जीवन में अवश्य सफल होता है. ठीक उसी प्रकार, जैसे एक बड़ा हाथी शक्कर के दानों को नहीं उठा सकता, वहीं एक छोटी चींटी उन्हें सरलता से इकट्ठा कर लेती है.
ब्राह्मण मत पूजिए जो होवे गुणहीन,
पूजिए चरण चंडाल के जो होने गुण प्रवीण
अर्थ: किसी व्यक्ति की पूजा केवल इसलिए नहीं की जानी चाहिए क्योंकि उसका जन्म उच्च जाति में हुआ है. यदि व्यक्ति में गुणों की कमी है, तो उसे किसी भी जाति का होने पर भी सम्मान नहीं मिलना चाहिए. इसके विपरीत, यदि कोई व्यक्ति गुणवान है, तो उसका सम्मान अवश्य किया जाना चाहिए, चाहे वह किसी भी जाति से संबंधित हो. रविदास इस दोहे के माध्यम से यह स्पष्ट करते हैं कि व्यक्ति के गुण ही उसे पूजनीय बनाते हैं, जाति नहीं.
संत रविदास के 20 प्रसिद्ध दोहे और उनके अर्थ नीचे दिए गए हैं:
1. मन चंगा तो कठौती में गंगा
अर्थ: यदि मन शुद्ध है, तो हर स्थान पवित्र है। बाहरी आडंबर की आवश्यकता नहीं।
2. जात-पात के फेर में, उरझि रहा संसार।
यहि कारण बाम्हन भयो, काहे न भयो सार॥
अर्थ: संसार जात-पात में उलझा हुआ है, लेकिन जाति से नहीं, बल्कि अच्छे कर्मों से महान बना जाता है।
3. ऐसी बानी बोलिए, मन का आपा खोय।
औरन को शीतल करे, आपहुं शीतल होय॥
अर्थ: मधुर वचन बोलने से न केवल दूसरों को शांति मिलती है, बल्कि हमें भी सुख मिलता है।
4. अब कैसे छूटे राम नाम रट लागी।
अवधू कौन दिशा को जाऊं॥
अर्थ: जब मैंने राम का नाम स्मरण करना शुरू कर दिया, तो अब इसे छोड़ना असंभव है।
5. रविदास जन्म के कारणे, होत न कोऊ नीच।
नर को नीच करि डारि है, ओछे करम की कीच॥
अर्थ: कोई भी व्यक्ति जन्म से नीच नहीं होता, बल्कि उसके गलत कर्म ही उसे नीच बनाते हैं।
6. काया कोरा कपड़ा, जब लग मैला न होय।
कर्म बिना जो राखिए, पावै सम्मान न कोय॥
अर्थ: जैसे साफ कपड़ा तब तक कीमती रहता है जब तक वह गंदा न हो, वैसे ही बिना कर्म के कोई सम्मान नहीं पा सकता।
7. हरि से संत संत से सब जग, कहि रविदास विचार।
संतों के संग हरि मिले, ज्यों कमल बिनु वारि॥
अर्थ: संतों का संग करने से भगवान की प्राप्ति होती है, जैसे कमल को पानी की जरूरत होती है।
8. जब मैं था तब हरि नहीं, अब हरि है मैं नाहीं।
सब अंधियारा मिट गया, दीपक देखा माहीं॥
अर्थ: जब तक अहंकार था, तब तक ईश्वर की प्राप्ति नहीं हुई। जब अहंकार मिटा, तब ईश्वर की रोशनी मिल गई।
9. गरीब निवाज गुसाईंया, मोरे दुखिया पर दया करो।
जैसे पतित पावन हरि, पापी को उद्धार करो॥
अर्थ: हे भगवान, जैसे आपने पापियों का उद्धार किया, वैसे ही मुझ पर भी कृपा करें।
10. साधो सहज समाधि भली।
जहाँ न सुरति, न असुरति, न हर्ष न विषाद गली॥
अर्थ: सरल और स्वाभाविक ध्यान सबसे अच्छा है, जहाँ न खुशी है, न दुख, बस शांति है।
11. रामानंद संतन सो कहियो, राम सनेही होय।
अन्य छाड़ि हरि भजिए, तऊ काज सफ़ल होय॥
अर्थ: सच्ची भक्ति में केवल भगवान से प्रेम करना चाहिए, तभी जीवन सफल होगा।
12. मोको कहाँ ढूंढे रे बंदे, मैं तो तेरे पास में।
ना तीरथ में, ना मूरत में, ना एकांत निवास में॥
अर्थ: भगवान को बाहर मत खोजो, वे तुम्हारे भीतर ही हैं।
13. कह रविदास खलास चमारा, राम भजे सो पार उतारा।
हमरे राम रहीम करीमा, सब संतन के संगी सारा॥
अर्थ: जो भी राम का भजन करता है, वह भवसागर से पार हो जाता है।
14. जो तू बाम्हन बाम्हनी जाया, तेरो रक्त नीर नाया।
जो मैं शूद्र शूद्रनी जाया, मोरो रक्त नीर नाया॥
अर्थ: ब्राह्मण और शूद्र दोनों का खून और शरीर एक जैसा होता है, फिर भेदभाव क्यों?
15. राम नाम उर में बसा, कहि रविदास विचार।
अब कैसे छूटे रामजी, प्रेम गाढ़ियो सार॥
अर्थ: जब से मैंने भगवान राम का नाम हृदय में बसा लिया, अब उसे छोड़ना असंभव है।
16. परधन परस्त्री की निंदा, नहि भलो मन लेई।
कह रविदास करम की गति, पंडित नहीं कहि देई॥
अर्थ: दूसरों के धन और स्त्री की बुरी बात नहीं करनी चाहिए।
17. जाति-पांति पूछे नहीं कोई, हरि को भजे सो हरि का होई॥
अर्थ: भगवान के भक्त के लिए जाति कोई मायने नहीं रखती।
18. जो भरसे राम के, ताके काज सवारी।
पथ में कंकर होई, तो भी नंगे पग जाई॥
अर्थ: जो ईश्वर पर विश्वास करता है, उसके सभी कार्य पूरे होते हैं, चाहे कितनी भी कठिनाइयाँ आएं।
19. संत के संग लहीये, साधु के संग बैठिये।
चोर बेईमान से रहीये, तापस के निकट रहीये॥
अर्थ: सज्जनों का साथ करना चाहिए और बुरे लोगों से दूर रहना चाहिए।
20. जिन हरि का रूप निहारा, तिन की मिटे न माया।
अर्थ: जो लोग भगवान के स्वरूप को देख लेते हैं, उन्हें माया नहीं बांध सकती।
संत रविदास के ये दोहे भक्ति, मानवता और समानता पर आधारित हैं।
क्या आपको इनसे जुड़ा कोई विशेष दोहा चाहिए?
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By Shaurya Punj
शौर्य पुंज डिजिटल मीडिया में पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर हैं. उन्हें न्यूज वर्ल्ड में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. शौर्य खबरों की नब्ज को समझकर उसे आसान और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में माहिर हैं. साल 2008 में ग्रेजुएशन के दौरान उन्होंने दैनिक हिंदुस्तान, प्रभात खबर, दैनिक जागरण और तरंग भारती (हिंदी पाक्षिक समाचार पत्र) के लिए फ्रीलांसिंग की. वर्ष 2011 में उन्होंने दैनिक जागरण के टैब्लॉइड समाचार पत्र iNext में दो महीने की इंटर्नशिप की. इसी दौरान उन्हें प्रभात खबर के डिजिटल सेक्शन में काम करने का अवसर मिला. अप्रैल 2011 से उन्होंने प्रभातखबर.कॉम के एंटरटेनमेंट सेक्शन के लिए कार्य करना शुरू किया. उस समय उन्होंने बॉलीवुड फिल्म रिव्यू, बॉक्स ऑफिस बिजनेस और एंटरटेनमेंट गॉसिप जैसी खबरों पर काम किया. साल 2020 में कोरोना काल के दौरान उन्हें लाइफस्टाइल, धर्म-कर्म, एजुकेशन और हेल्थ जैसे नॉन-न्यूज सेक्शन में काम करने का अवसर मिला. उन्होंने लाइफस्टाइल कैटेगरी के कई महत्वपूर्ण सेक्शनों में योगदान दिया. Health & Fitness सेक्शन में डाइट, योग, वेट लॉस, मानसिक स्वास्थ्य और फिटनेस टिप्स से जुड़े उपयोगी कंटेंट पर कार्य किया. Beauty & Fashion सेक्शन में स्किन केयर, हेयर केयर, मेकअप और ट्रेंडिंग फैशन विषयों पर लेख तैयार किए. Relationship & Family कैटेगरी में पति-पत्नी संबंध, डेटिंग, पैरेंटिंग और दोस्ती जैसे विषयों पर जानकारीपूर्ण कंटेंट लिखा. Food & Recipes सेक्शन में हेल्दी फूड, रेसिपी और किचन टिप्स से संबंधित सामग्री विकसित की. Travel सेक्शन के लिए घूमने की जगहों, बजट ट्रिप और ट्रैवल टिप्स पर लेखन किया. Astrology / Vastu में राशिफल, वास्तु टिप्स और ज्योतिष आधारित कंटेंट पर काम किया. Career & Motivation सेक्शन में सेल्फ-इम्प्रूवमेंट, मोटिवेशन और पर्सनैलिटी डेवलपमेंट विषयों पर योगदान दिया. Festival & Culture सेक्शन में त्योहारों की परंपराएं, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त से संबंधित कंटेंट पर कार्य किया. इसके अलावा Women Lifestyle / Men Lifestyle और Health Education & Wellness जैसे विषयों पर भी मर्यादित एवं जानकारीपूर्ण लेखन के माध्यम से योगदान दिया. साल 2023 से शौर्य ने पूरी तरह से प्रभातखबर.कॉम के धर्म-कर्म और राशिफल सेक्शन में अपना योगदान देना शुरू किया. इस दौरान उन्होंने दैनिक राशिफल, साप्ताहिक एवं मासिक भविष्यफल, पूजा-पाठ, व्रत-त्योहार, शुभ मुहूर्त, ज्योतिषीय उपाय, वास्तु टिप्स और धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी खबरों पर विशेष फोकस किया. साथ ही पाठकों की रुचि को ध्यान में रखते हुए सरल, सहज और जानकारीपूर्ण धार्मिक कंटेंट तैयार करने पर लगातार कार्य किया. रांची में जन्मे शौर्य की प्रारंभिक शिक्षा डीएवी पब्लिक स्कूल, हेहल, रांची से हुई. इसके बाद उन्होंने सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एण्ड वीडियो प्रोडक्शन में बी.ए. ऑनर्स की डिग्री प्राप्त की. यह शैक्षणिक पृष्ठभूमि उन्हें हिंदी पत्रकारिता की वह विशेषज्ञता प्रदान करती है, जो पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws और 1H — क्या, कौन, कहां, कब, क्यों और कैसे — के आधार पर प्रभावी और तथ्यपूर्ण समाचार लेखन के लिए आवश्यक मानी जाती है.
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