Premanand Ji Maharaj: प्रेम एक बहुत ही छोटा सा शब्द है, लेकिन इसके मायने बहुत बड़े होते हैं. किसी के लिए यह जीवन जीने की उम्मीद होता है, तो किसी के लिए सुकून. हर इंसान जीवन में एक न एक बार किसी से प्रेम जरूर करता है. हालांकि यह जरूरी नहीं कि प्रेम हमेशा पूरा हो या शादी के संबंध तक पहुँचे. कई बार प्रेम के रिश्ते बीच में ही खत्म हो जाते हैं, जिससे प्रेमी का दिल टूट जाता है और कभी-कभी उनके मन में आत्महत्या जैसे विचार भी आने लगते हैं. प्रेमानंद जी महाराज ने ऐसी स्थिति से गुजर रहे लोगों के बारे में बात करते हुए एक बहुत ही जरूरी संदेश दिया है, जिसे हर इंसान को जानना चाहिए.
प्रेमानंद जी महाराज ने क्या कहा
प्रेमानंद जी महाराज ने कहा कि, “मान लीजिए एक इंसान ने दूसरे को अपना दिल दे दिया, लेकिन बदले में उसके प्रेमी ने उसे धोखा दे दिया. यह पीड़ा वह सहन नहीं कर पाता. उसे कोई रास्ता दिखाई नहीं देता. वह समझ नहीं पाता कि अपने दिल का दर्द किससे साझा करे. माता-पिता से भी वह यह बात कह नहीं पाता. इसके बाद वह अंदर ही अंदर घुट-घुटकर जीने लगता है और नकारात्मक हो जाता है. कई बार उसके मन में अपने शरीर को त्याग देने यानी आत्महत्या का विचार भी आता है, लेकिन यह बिल्कुल सही नहीं है.”
प्रेमानंद जी कहते हैं कि मन में इस तरह के विचार लाना गलत है. यदि आपका दिल टूट गया है तो क्या हुआ, संसार का सबसे बड़ा दिलवर भगवान विराजमान हैं—उनसे मन जोड़िए. भगवान आपको उनसे भी बेहतर मित्र और प्रेमी से मिला देंगे. वे कहते हैं कि मनुष्य जन्म बहुत ही कीमती है, इसे भगवान की आराधना में लगाइए. भगवान आपको सही समय पर सब कुछ देंगे.
उन्होंने गौतम जी का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने भगवान की आराधना की और पत्नी मांगी. भगवान ने उन्हें महाराज सम्राट मनु की अहुती पुत्री के रूप में पत्नी प्रदान की. प्रेमानंद जी महाराज कहते हैं कि भगवान की आराधना करें और उनके सामने अपने दिल की बातें रखें—वह सही समय पर आपको सब कुछ अवश्य देंगे.
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