Premanand Ji Maharaj: हिंदू धर्म में तीर्थ यात्रा, भजन-कीर्तन, पूजा-पाठ और मंदिरों के दर्शन का विशेष महत्व है. माना जाता है कि जो भी व्यक्ति मन से भगवान की उपासना, नाम-जप और मंदिरों के दर्शन करता है, उसे सुख और शांति की प्राप्ति होती है. लेकिन यह फल सभी को समान रूप से नहीं मिलता. व्यक्ति के कर्म और विचार इन फलों को प्रभावित करते हैं. प्रेमानंद महाराज ने इस विषय पर चर्चा करते हुए कुछ ऐसे लोगों के बारे में बताया है, जो यदि पूजा-पाठ करें और मंदिरों के दर्शन करें, तब भी उन्हें पुण्य की प्राप्ति नहीं होती. आइए जानते हैं ये लोग कौन हैं.
किन लोगों को नहीं मिलता मंदिरों के दर्शन का पुण्य?
प्रेमानंद महाराज के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति व्यभिचारी हो, गलत कार्य करता हो, गंदे विचार रखता हो, स्त्रियों पर बुरी नजर डालता हो और दूसरों को कष्ट देता हो, तो ऐसे लोगों को पूजा करने का लाभ नहीं मिलता. जब मन में छल-कपट होता है, तो मंदिरों के दर्शन का कोई फल नहीं होता.
हर कर्म को देखते हैं भगवान
प्रेमानंद जी कहते हैं कि हर जीव के हृदय में भगवान का वास होता है. वे हर समय हमें देख रहे होते हैं. आप बाहर से दिखावा कर लें, लेकिन भगवान से कुछ भी छिपा नहीं सकता. यदि आपके कर्म खराब हैं, तो लाखों पूजा-पाठ और मंदिरों के दर्शन करने के बाद भी दंड अवश्य मिलेगा. वहीं, यदि किसी व्यक्ति के कर्म और विचार अच्छे हैं, लेकिन वह मंदिर नहीं भी जाता है, तब भी उसे पुण्य की प्राप्ति होती है. हृदय में वास करने वाले भगवान सब कुछ देखते हैं.
मंदिरों के दर्शन का पुण्य
प्रेमानंद जी ने लोगों को संदेश दिया कि उन्हें अपने कर्म अच्छे रखने चाहिए और विचारों को शुद्ध करना चाहिए. हर भक्त को प्रभु के नाम का जाप करना चाहिए. इससे उसका कल्याण होगा और सभी तीर्थों व मंदिरों के दर्शन का पूर्ण पुण्य प्राप्त होगा.

