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फाल्गुन शुक्ल प्रदोष व्रत कब है? जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और पारण का सही समय

Updated at : 24 Feb 2026 3:36 PM (IST)
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Pradosh Vrat 2026

प्रदोष व्रत 2026

Pradosh Vrat 2026: फाल्गुन शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि और सही समय को लेकर इस बार शिवभक्तों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है. क्योंकि त्रयोदशी तिथि के आरंभ और समापन के समय में अंतर के कारण व्रत किस दिन रखा जाए, इसे लेकर श्रद्धालु उलझन में हैं.

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Pradosh Vrat 2026: प्रदोष व्रत प्रत्येक माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है. इस बार फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि 28 फरवरी 2026 की रात 08 बजकर 05 मिनट से आरंभ होकर 1 मार्च की शाम 06 बजकर 30 मिनट तक रहेगी. प्रदोष काल की मान्यता के अनुसार 1 मार्च को फाल्गुन माह का अंतिम प्रदोष व्रत रखा जाएगा. चूंकि इस दिन रविवार है, इसलिए यह व्रत रवि प्रदोष के नाम से जाना जाएगा.

रवि प्रदोष व्रत 2026 शुभ मुहूर्त

रवि प्रदोष व्रत 01 मार्च 2026 दिन रविवार को है.
रवि प्रदोष व्रत त्रयोदशी तिथि प्रारम्भ – 28 फरवरी 2026 की रात 08 बजकर 05 मिनट पर
रवि प्रदोष व्रत त्रयोदशी तिथि समाप्त – 01 मार्च 2026 की शाम 06 बजकर 30 मिनट पर
रवि प्रदोष व्रत पूजा का शुभ समय – 01 मार्च को सुबह 07 बजकर 40 मिनट से 12 बजकर 02 मिनट तक
रवि प्रदोष काल पूजा का शुभ समय- 01 मार्च को शाम 05 बजकर 51 मिनट से 08 बजकर 56 मिनट तक

रवि प्रदोष व्रत पारण का शुभ समय

रवि प्रदोष व्रत का पारण अगले दिन सूर्योदय के बाद करना शास्त्रसम्मत माना गया है. हालांकि प्रदोष काल की पूजा करने के बाद भगवान शिव का स्मरण कर व्रत का पारण प्रसाद से कर सकते हैं. अगर आप प्रदोष व्रत का पारण अगले दिन सुबह करना चाहते है तो इस बार व्रत पारण के लिए 02 मार्च की सुबह 06 बजकर 12 मिनट से 07 बजकर 38 मिनट तक तथा पुनः 09 बजकर 07 मिनट से 10 बजकर 34 मिनट तक का समय विशेष रूप से शुभ रहेगा.

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प्रदोष व्रत पूजा विधि

1- प्रदोष काल में स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनकर पूजा का संकल्प लें.
2- साफ चौकी पर वस्त्र बिछाकर शिवलिंग या भगवान शिव की मूर्ति स्थापित करें.
3- गंगाजल या शुद्ध जल से शिवलिंग का अभिषेक कर पंचामृत से स्नान कराएं.
4- शिवलिंग पर चंदन, अक्षत, बेलपत्र, फूल, भांग-धतूरा अर्पित करें.
5- धूप और दीप जलाकर श्रद्धा भाव से भगवान शिव का पूजन करें.
6- ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का श्रद्धा और एकाग्रचित्त होकर जाप करें
7- पूजा के बाद विधि-विधान से प्रदोष व्रत का कथा सुनें या स्वयं पाठ करें.
8- पूजा के अंत में विधि-विधान से भगवान शिव की आरती करें.
9- शिव परिवार की आरती कर सुख-समृद्धि की कामना करें.
10- भगवान को फल, मिष्ठान और नैवेद्य अर्पित कर क्षमा प्रार्थना करें.

रवि प्रदोष व्रत का महत्व

रवि प्रदोष व्रत का विशेष महत्व माना गया है, क्योंकि यह दिन भगवान शिव के साथ सूर्यदेव की आराधना के लिए अत्यंत शुभ होता है. इस दिन श्रद्धापूर्वक व्रत रखकर शिव पूजा के साथ सूर्यदेव को अर्घ्य अर्पित करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, इससे करियर और कार्यक्षेत्र में उन्नति के मार्ग प्रशस्त होते हैं, आत्मविश्वास बढ़ता है और सफलता के नए अवसर प्राप्त होते हैं.

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Radheshyam Kushwaha

लेखक के बारे में

By Radheshyam Kushwaha

पत्रकारिता की क्षेत्र में 13 साल का अनुभव है. इस सफर की शुरुआत राज एक्सप्रेस न्यूज पेपर भोपाल से की. यहां से आगे बढ़ते हुए समय जगत, राजस्थान पत्रिका, हिंदुस्तान न्यूज पेपर के बाद वर्तमान में प्रभात खबर के डिजिटल विभाग में धर्म अध्यात्म एवं राशिफल डेस्क पर कार्यरत हैं. ज्योतिष शास्त्र, व्रत त्योहार, राशिफल के आलावा राजनीति, अपराध और पॉजिटिव खबरों को लिखने में रुचि हैं.

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