8.8 C
Ranchi

लेटेस्ट वीडियो

Premanand Ji Maharaj: क्या सच में पर्व के दिन परिवार में मृत्यु होने पर त्योहार नहीं मनाना चाहिए? जानें प्रेमानंद जी महाराज का जवाब

Premanand Ji Maharaj: कहा जाता है कि यदि किसी पर्व के दिन घर में किसी सदस्य की मृत्यु हो जाए, तो उस त्योहार को दोबारा नहीं मनाना चाहिए. लेकिन क्या यह धारणा सही है? क्या शास्त्रों में सचमुच मृत्यु के बाद त्योहार मनाने पर रोक लगाई गई है? आइए जानते हैं, इस विषय पर प्रेमानंद जी महाराज का क्या कहना है.

Premanand Ji Maharaj: कई बार ऐसा होता है कि पर्व–त्योहार के दौरान घर में किसी सदस्य की मृत्यु हो जाती है, जिससे पूरे परिवार में शोक का माहौल छा जाता है. ऐसे समय में आपने अक्सर लोगों को कहते सुना होगा कि जिस पर्व के दिन घर के किसी सदस्य की मृत्यु हुई हो, वह त्योहार दोबारा नहीं मनाया जाता. कहा जाता है कि मृत्यु के बाद जब तक उसी तिथि पर घर में किसी का जन्म न हो जाए, तब तक वह पर्व नहीं मनाया जाता. आइए, प्रेमानंद जी महाराज के माध्यम से इस धारणा से जुड़ी जरूरी बातों को जानते हैं.

पर्व के दिन मृत्यु होने पर क्या करना चाहिए?

प्रेमानंद जी महाराज से पूछा गया कि यदि किसी पर्व के दिन घर में किसी सदस्य की मृत्यु हो जाए, तो क्या करना चाहिए? इस पर प्रेमानंद जी महाराज ने कहा कि जब परिवार में त्योहार के समय किसी की मृत्यु हो जाती है, तो स्वाभाविक रूप से शोक का वातावरण बन जाता है. उस समय त्योहार का आनंद लेने की स्थिति नहीं रहती. इसलिए जिस दिन मृत्यु होती है, उस दिन त्योहार नहीं मनाया जाता. हालांकि, उस दिन शांत भाव से प्रभु का नाम जप, कथा-पाठ और कीर्तन किया जा सकता है.

मृत्यु होने के बाद क्या उस पर्व को जीवनभर नहीं मनाना चाहिए?

इसी से संबंधित एक और प्रश्न उनसे पूछा गया. प्रश्न में कहा गया कि बड़े-बुजुर्गों से हम हमेशा सुनते आए हैं और अपने घरों में भी देखते हैं कि जब किसी पर्व के दिन घर के सदस्य की मृत्यु हो जाती है, तो वह त्योहार दोबारा नहीं मनाया जाता. यह सिलसिला तब तक चलता है, जब तक घर में किसी का जन्म न हो जाए. क्या यह सही है?

प्रेमानंद जी महाराज ने बताया शास्त्रों का मत

इस प्रश्न के उत्तर में प्रेमानंद जी महाराज ने मुस्कुराते हुए कहा कि यह धारणा पूरी तरह गलत है. शास्त्रों में इसका कहीं भी वर्णन नहीं मिलता. यह समाज द्वारा स्वयं बनाए गए नियम हैं, जिनका शास्त्रों और धर्म से कोई संबंध नहीं है. उनका कहना है कि प्रतिदिन हजारों लोगों की मृत्यु होती है. ऐसे में यदि इन बातों को मान लिया जाए, तो कोई भी त्योहार कभी नहीं मनाया जा सकेगा.

मृत्यु के कारण किसी भी पर्व या त्योहार रोक नहीं 

प्रेमानंद जी महाराज का कहना है कि जब किसी की मृत्यु होती है, तो उस दिन शोक मनाया जाए और शास्त्रों में बताए गए 11 दिनों के शोक का पालन किया जाए. इसके बाद सामान्य दिनों की तरह फिर से सभी पर्व-त्योहार मनाए जा सकते हैं. मृत्यु के कारण किसी भी पर्व या त्योहार पर रोक नहीं है.

यह भी पढ़ें: Premanand Ji Maharaj: क्या पति-पत्नी को मिलता है एक-दूसरे के कर्मों का फल? प्रेमानंद महाराज ने बताया रहस्य

Neha Kumari
Neha Kumari
प्रभात खबर डिजिटल के जरिए मैंने पत्रकारिता की दुनिया में अपना पहला कदम रखा है. यहां मैं धर्म और राशिफल बीट पर बतौर जूनियर कंटेंट राइटर के तौर पर काम कर रही हूं. इसके अलावा मुझे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों से जुड़े विषयों पर लिखने में रुचि है.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

संबंधित ख़बरें

Trending News

जरूर पढ़ें

वायरल खबरें

ऐप पर पढें
होम आप का शहर
News Snap News Reel