Premanand Ji Maharaj: क्या सच में पर्व के दिन परिवार में मृत्यु होने पर त्योहार नहीं मनाना चाहिए? जानें प्रेमानंद जी महाराज का जवाब

Published by : Neha Kumari Updated At : 05 Jan 2026 2:55 PM

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प्रेमानंद जी महाराज

Premanand Ji Maharaj: कहा जाता है कि यदि किसी पर्व के दिन घर में किसी सदस्य की मृत्यु हो जाए, तो उस त्योहार को दोबारा नहीं मनाना चाहिए. लेकिन क्या यह धारणा सही है? क्या शास्त्रों में सचमुच मृत्यु के बाद त्योहार मनाने पर रोक लगाई गई है? आइए जानते हैं, इस विषय पर प्रेमानंद जी महाराज का क्या कहना है.

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Premanand Ji Maharaj: कई बार ऐसा होता है कि पर्व–त्योहार के दौरान घर में किसी सदस्य की मृत्यु हो जाती है, जिससे पूरे परिवार में शोक का माहौल छा जाता है. ऐसे समय में आपने अक्सर लोगों को कहते सुना होगा कि जिस पर्व के दिन घर के किसी सदस्य की मृत्यु हुई हो, वह त्योहार दोबारा नहीं मनाया जाता. कहा जाता है कि मृत्यु के बाद जब तक उसी तिथि पर घर में किसी का जन्म न हो जाए, तब तक वह पर्व नहीं मनाया जाता. आइए, प्रेमानंद जी महाराज के माध्यम से इस धारणा से जुड़ी जरूरी बातों को जानते हैं.

पर्व के दिन मृत्यु होने पर क्या करना चाहिए?

प्रेमानंद जी महाराज से पूछा गया कि यदि किसी पर्व के दिन घर में किसी सदस्य की मृत्यु हो जाए, तो क्या करना चाहिए? इस पर प्रेमानंद जी महाराज ने कहा कि जब परिवार में त्योहार के समय किसी की मृत्यु हो जाती है, तो स्वाभाविक रूप से शोक का वातावरण बन जाता है. उस समय त्योहार का आनंद लेने की स्थिति नहीं रहती. इसलिए जिस दिन मृत्यु होती है, उस दिन त्योहार नहीं मनाया जाता. हालांकि, उस दिन शांत भाव से प्रभु का नाम जप, कथा-पाठ और कीर्तन किया जा सकता है.

मृत्यु होने के बाद क्या उस पर्व को जीवनभर नहीं मनाना चाहिए?

इसी से संबंधित एक और प्रश्न उनसे पूछा गया. प्रश्न में कहा गया कि बड़े-बुजुर्गों से हम हमेशा सुनते आए हैं और अपने घरों में भी देखते हैं कि जब किसी पर्व के दिन घर के सदस्य की मृत्यु हो जाती है, तो वह त्योहार दोबारा नहीं मनाया जाता. यह सिलसिला तब तक चलता है, जब तक घर में किसी का जन्म न हो जाए. क्या यह सही है?

प्रेमानंद जी महाराज ने बताया शास्त्रों का मत

इस प्रश्न के उत्तर में प्रेमानंद जी महाराज ने मुस्कुराते हुए कहा कि यह धारणा पूरी तरह गलत है. शास्त्रों में इसका कहीं भी वर्णन नहीं मिलता. यह समाज द्वारा स्वयं बनाए गए नियम हैं, जिनका शास्त्रों और धर्म से कोई संबंध नहीं है. उनका कहना है कि प्रतिदिन हजारों लोगों की मृत्यु होती है. ऐसे में यदि इन बातों को मान लिया जाए, तो कोई भी त्योहार कभी नहीं मनाया जा सकेगा.

मृत्यु के कारण किसी भी पर्व या त्योहार रोक नहीं 

प्रेमानंद जी महाराज का कहना है कि जब किसी की मृत्यु होती है, तो उस दिन शोक मनाया जाए और शास्त्रों में बताए गए 11 दिनों के शोक का पालन किया जाए. इसके बाद सामान्य दिनों की तरह फिर से सभी पर्व-त्योहार मनाए जा सकते हैं. मृत्यु के कारण किसी भी पर्व या त्योहार पर रोक नहीं है.

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लेखक के बारे में

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नेहा कुमारी प्रभात खबर डिजिटल में जूनियर कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं. उन्हें लेखन के क्षेत्र में एक वर्ष से अधिक का अनुभव है. पिछले छह महीनों से वे राशिफल और धर्म से जुड़ी खबरों पर काम कर रही हैं. उनका मुख्य कार्य व्रत-त्योहारों, पौराणिक कथाओं और भारतीय रीति-रिवाजों से जुड़ी जानकारी को सरल भाषा में लोगों तक पहुंचाना है. नेहा का हमेशा यह प्रयास रहता है कि वे कठिन से कठिन विषय को भी इतना आसान और रोचक बना दें कि हर कोई उसे सहजता से पढ़ और समझ सके. उनका मानना है कि यदि धर्म और संस्कृति से जुड़ी जानकारी सरल शब्दों में मिले, तो लोग अपनी परंपराओं से बेहतर तरीके से जुड़ पाते हैं. डिजिटल मीडिया में अपने करियर की शुरुआत उन्होंने प्रभात खबर में ही ‘नेशनल’ और ‘वर्ल्ड’ डेस्क पर छह महीने की इंटर्नशिप के साथ की थी. इस दौरान उन्होंने रियल-टाइम खबरों पर काम करना, तेजी और सटीकता के साथ कंटेंट लिखना, ट्रेंडिंग विषयों की पहचान करना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को करीब से समझा. इस अनुभव ने उनकी न्यूज़ सेंस, लेखन क्षमता और खबरों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने की समझ को और अधिक मजबूत बनाया.

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