मुस्लिम देश से लड़ने निकला दुनिया का सबसे बड़ा न्यूक्लियर वॉरशिप, अब टॉयलेट के लिए आपस में ही लड़ रहे सैनिक

दुनिया के सबसे महंगे अमेरिकी विमानवाहक पोत USS जेराल्ड आर. फोर्ड
USS Gerald R Ford: दुनिया के सबसे महंगे 13.3 बिलियन डॉलर के अमेरिकी विमानवाहक पोत USS जेराल्ड आर. फोर्ड पर अजीब संकट खड़ा हो गया है. ईरान से युद्ध की धमकियों के बीच जहाज का सीवेज सिस्टम फेल होने से 4,500 सैनिक टॉयलेट के लिए घंटों लाइन में लग रहे हैं. 8 महीने से समुद्र में तैनात युवा सैनिकों में थकान और भारी गुस्सा है.
दुनिया का सबसे महंगा और आधुनिक परमाणु ऊर्जा (न्यूक्लियर एनर्जी) से चलने वाला अमेरिकी युद्धपोत ‘USS जेराल्ड आर फोर्ड’ इन दिनों एक अजीब मुसीबत से जूझ रहा है. मिडिल ईस्ट में ईरान ((दुनिया का सबसे बड़ा शिया मुस्लिम देश) के साथ बढ़ते तनाव के बीच इस $13.3 बिलियन (करीब 1.10 लाख करोड़ रुपये) के जहाज का सीवेज सिस्टम फेल हो गया है. वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, जहाज के 650 में से ज्यादातर टॉयलेट खराब हैं. हालत यह है कि 4,500 से ज्यादा सैनिकों को टॉयलेट इस्तेमाल करने के लिए रोज 45-45 मिनट तक लाइन में लगना पड़ रहा है और और वे आपस में ही लड़ रहे हैं.
वैक्यूम सिस्टम ने बढ़ाई टेंशन, टी-शर्ट और रस्सियों से फंसे पाइप
NPR की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस जहाज में लगा अत्याधुनिक वैक्यूम-आधारित सीवेज सिस्टम ही इसकी सबसे बड़ी कमजोरी बन गया है. अगर एक भी वॉल्व खराब होता है, तो पूरे विभाग के टॉयलेट काम करना बंद कर देते हैं. मरम्मत करने वाले कर्मचारी 19-19 घंटे काम कर रहे हैं, क्योंकि पाइपों में कभी टी-शर्ट तो कभी 4 फीट लंबी रस्सी फंसी मिलती है. सबसे बड़ी समस्या पाइपों में जमने वाला कैल्शियम है, जिसे साफ करने के लिए अमेरिकी नेवी को हर बार $400,000 (करीब 3.32 करोड़ रुपये) खर्च करने पड़ते हैं.
8 महीने से समुद्र में तैनात
यह युद्धपोत (वॉरशिप) जून 2025 से ही समुद्र में है. जनवरी 2025 में इसने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़ने में बड़ी भूमिका निभाई थी. अब डोनाल्ड ट्रंप की ईरान को चेतावनी के बाद इसकी तैनाती और बढ़ा दी गई है. रिटायर रियर एडमिरल मार्क मोंटगोमरी ने वॉल स्ट्रीट जर्नल को बताया कि आमतौर पर ड्यूटी 6 महीने की होती है, लेकिन ये सैनिक 8 महीने से घर नहीं गए हैं और यह समय 11 महीने तक खिंच सकता है. यह अमेरिकी नेवी के इतिहास का एक रिकॉर्ड होगा.
थकान और परिवार से दूरी ने तोड़ा हौसला
जहाज पर तैनात ज्यादातर सैनिक 20-22 साल के युवा (Gen Z) हैं. लंबे समय तक ‘घोस्ट मोड’ (सीक्रेट मिशन) पर रहने के कारण वे अपने परिवार से बात भी नहीं कर पा रहे हैं. कई सैनिक अपने बच्चों का जन्म, शादियां और अपनों के जनाजे तक में शामिल नहीं हो पाए हैं. डेली मेल के पास मौजूद एक लेटर में कैप्टन डेविड स्कारोसी ने सैनिकों के गुस्से को स्वीकार किया है. हालत यह है कि कई सैनिकों ने मिशन खत्म होते ही नेवी छोड़ने का मन बना लिया है.
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पिछली गलतियों से सहमा अमेरिका
जहाज और क्रू पर बढ़ते दबाव का असर खतरनाक हो सकता है. लेख के अनुसार, अप्रैल-मई 2025 में USS हैरी एस ट्रूमैन ने हूती विद्रोहियों के खिलाफ लड़ाई में अपने कई फाइटर जेट खो दिए थे. जांच में पता चला कि इसका कारण क्रू की थकान और जरूरत से ज्यादा काम का दबाव था. फिलहाल मिडिल ईस्ट में अमेरिका के 12 से ज्यादा युद्धपोत तैनात हैं, जिनमें USS अब्राहम लिंकन और USS जेराल्ड आर फोर्ड जैसे दो बड़े एयरक्राफ्ट कैरियर शामिल हैं.
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लेखक के बारे में
By Govind Jee
गोविन्द जी ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय भोपाल से की है. वे वर्तमान में प्रभात खबर में कंटेंट राइटर (डिजिटल) के पद पर कार्यरत हैं. वे पिछले आठ महीनों से इस संस्थान से जुड़े हुए हैं. गोविंद जी को साहित्य पढ़ने और लिखने में भी रुचि है.
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