karwa Chauth 2023: महिलाएं पति की लंबी आयु के लिए रखेंगी करवा चौथ का व्रत,जानें शुभ मुहूर्त-पूजा विधि और महत्व
Karwa Chauth 2023 Puja Vidhi: एक नवंबर बुधवार को करक चतुर्थी (करवा चौथ) व्रत है. इस तिथि को चन्द्रोदय रात 8 बजे के बाद हो रहा है, इस तिथि को पति की दीर्घायु व अच्छे स्वास्थ्य की कामना से व्रत करके चंद्रमा को अर्घ्य देने का विधान है.

सुहागिने अपने अखंड सौभाग्य की कामना से स्वामी कार्तिकेय सहित शिव-पार्वती की पूजा करती हैं. करवा चौथ व्रत का समय सुबह 06 बजकर 36 से रात 08 बजकर 26 मिनट तक है. इस दिन चांद निकलने का समय रात आठ बजे है. रात्रि आठ बजे ही महिलाएं चांद का दीदार करेंगी. महिलाएं बुधवार को पूरे दिन पति की लंबी आयु के लिए व्रत रखेंगी और चांद का दीदार करने के बाद ही व्रत तोड़ेगी. बता दें कि पति की दीघायु के लिए यह व्रत किया जाता है महिलाएं दिन भर व्रत करती है, पंजाबी व सिंधी समाज में प्रमुखता से करवा चौथ व्रत मनाया जाता है. धार्मिक मान्यता है कि पांडवों के वनवास काल में श्रीकृष्ण के निर्देश पर इस व्रत को सर्वप्रथम द्रौपदी ने किया था. करवा थौथ व्रत उसी समय से प्रचलित है.

करवा चौथ का व्रत हर साल कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को रखा जाता है. उस दिन कार्तिक संकष्टी चतुर्थी होती है, जिसे वक्रतुंड संकष्टी चतुर्थी कहते हैं. वैदिक पंचांग के अनुसार, इस बार कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि 31 अक्तूबर मंगलवार को रात 09 बजकर 30 मिनट से प्रारंभ हो रही है. यह तिथि 01 नवंबर बुधवार को रात 09 बज कर 19 मिनट पर खत्म होगी.

उदयातिथि और चतुर्थी के चंद्रोदय के आधार पर करवा चौथ व्रत एक नवंबर दिन बुधवार को रखा जायेगा. इस दिन व्रती को 13 घंटे 42 मिनट तक निर्जला व्रत रखना होगा. व्रत सुबह 06 बज कर 33 मिनट से रात 08 बज कर 15 मिनट तक होगा, जो महिलाएं 01 नवंबर बुधवार को करवा चौथ का व्रत रखेंगी, उनको शाम में पूजा के लिए 1 घंटा 18 मिनट का शुभ समय है. करवा चौथ पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 05 बजकर 36 मिनट से शाम 06 बजकर 54 मिनट तक है. करवा चौथ के दिन चंद्रोदय रात 08 बजकर 15 मिनट पर होगा. इस समय से आप चंद्रमा पूजन के साथ अर्घ दे सकते हैं.

इस साल करवा चौथ पर तीन योग बन रहे है. इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह 06 बजकर 33 मिनट से प्रारंभ हो रहा है, जो अगले दिन प्रात: 04 बजकर 36 मिनट तक रहेगा. सर्वार्थ सिद्धि को शुभ योग माना जाता है. उस दिन प्रात: काल से दोपहर 02 बजकर 07 मिनट तक परिध योग है, उसके बाद से शिव योग प्रारंभ होगा, जो अगले दिन तक रहेगा.

व्रती शिवांगी ने बताया कि शरद पूर्णिमा की चौथी तिथि पर हरेक वर्ष यह व्रत किया जाता है. शादी का पहला करवा चौथ का खास महत्व होता है. कोई भी व्रती हो, वह सुबह चार बजे सरगी अर्थात कुछ मीठा व फल खाती है और दिन भर उपवास करती है. लखनऊ के प्रियंका कुमारी ने बताया कि पति की लंबी आयु के लिए चलनी के छेद से चाद और अपने पति को देखने का रिवाज है.
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By Radheshyam Kushwaha
राधेश्याम कुशवाहा ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से MJ (मास्टर ऑफ जर्नलिज्म) की शिक्षा प्राप्त करने के बाद अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत भोपाल से प्रकाशित राज एक्सप्रेस समाचार पत्र से की. इसके बाद उन्होंने समय जगत, राजस्थान पत्रिका और हिंदुस्तान जैसे प्रतिष्ठित समाचार संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं. वर्तमान में वे प्रभात खबर के डिजिटल विभाग में धर्म, अध्यात्म एवं राशिफल डेस्क पर कार्यरत हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में 13 वर्षों का अनुभव रखने वाले राधेश्याम कुशवाहा को ज्योतिष शास्त्र, पंचांग गणना, ग्रह गोचर, नक्षत्र परिवर्तन, व्रत-त्योहारों की तिथियों तथा शुभ मुहूर्तों का गहन ज्ञान है. अपनी विशेषज्ञता के आधार पर वे धर्म-अध्यात्म और राशिफल से जुड़ी सटीक, तथ्यपरक एवं विश्वसनीय खबरें लिखते हैं. धार्मिक ग्रंथों के अध्ययन में उनकी विशेष रुचि है. इसके अलावा राजनीति, अपराध और प्रेरणादायक (पॉजिटिव) विषयों पर लेखन में भी उनकी गहरी रुचि है.
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