आज है मासिक कृष्ण जन्माष्टमी, नोट करें पूजा का शुभ मुहूर्त, विधि और महत्व

Updated at : 11 Mar 2026 11:03 AM (IST)
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Masik Krishna Janmashtami

बाल कृष्ण (एआई निर्मित तस्वीर)

Masik Krishna Janmashtami 2026: मासिक जन्माष्टमी व्रत भगवान कृष्ण को समर्पित है. कहा जाता है कि जो भी भक्त इस व्रत को पूरी निष्ठा के साथ करता है, उसके जीवन में सदा खुशहाली बनी रहती है. यहां जानें पूजा की विधि और शुभ मुहूर्त.

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Masik Krishna Janmashtami 2026: हिंदू पंचांग के अनुसार प्रत्येक माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मासिक जन्माष्टमी का व्रत किया जाता है. साल 2026 में 11 मार्च 2026, बुधवार को मासिक कृष्ण जन्माष्टमी मनाई जा रही है. इस दिन भगवान श्री कृष्ण की पूजा की जाती है.मान्यता है कि इस दिन भगवान कृष्ण की पूजा करने और व्रत रखने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है. साथ ही जीवन से नकारात्मकता का नाश होता है और शांति की प्राप्ति होती है.

मासिक कृष्ण जन्माष्टमी: तिथि और शुभ मुहूर्त

  • अष्टमी तिथि प्रारंभ – 11 मार्च 2026 को रात 01:55 बजे से.
  • अष्टमी तिथि समाप्त – 12 मार्च 2026 को सुबह 04:18 बजे तक.
  • ब्रह्म मुहूर्त – सुबह 04:58 बजे से 05:47 बजे तक.
  • अमृत काल – दोपहर 12:08 बजे से 01:55 बजे तक.
  • विजय मुहूर्त – दोपहर 02:30 बजे से 03:17 बजे तक.
  • गोधूलि मुहूर्त – शाम 06:25 बजे से 06:49 बजे तक.

पूजा विधि

  • कृष्ण अष्टमी के दिन रात के समय पूजा करने का विधान है, लेकिन पूजा के नियमों का पालन सुबह से करना भी शुभ माना जाता है.
  • सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और भगवान कृष्ण के सामने व्रत का संकल्प लें.
  • मंदिर की सफाई करें. बाल कृष्ण को पंचामृत और गंगाजल से स्नान कराएं. इसके बाद बाल गोपाल को स्वच्छ वस्त्र और आभूषण पहनाएं और चंदन का तिलक लगाकर उनका श्रृंगार करें.
  • लड्डू गोपाल को माखन और मिश्री का भोग लगाएं. भोग में तुलसी दल जरूर डालें, ऐसा करना शुभ माना जाता है.
  • मुख्य पूजा आधी रात को होती है, लेकिन व्रत सुबह से ही रखा जाता है. भक्त पूरे दिन मानसिक रूप से भजन-कीर्तन करते हैं.
  • रात के समय भगवान कृष्ण के सामने धूप-बत्ती और दीपक जलाएं. इसके बाद भगवान कृष्ण के मंत्रों का जाप करें और चालीसा का पाठ करें.
  • अंत में भगवान कृष्ण की आरती करें.
  • अगले दिन सुबह व्रत का पारण करें.

मासिक जन्माष्टमी का महत्व

धार्मिक मान्यता है कि इस व्रत को करने से जीवन में स्थिरता और सुख-शांति आती है. साथ ही मानसिक और शारीरिक कष्ट दूर होते हैं. कई माताएं इस व्रत को संतान सुख की प्राप्ति के लिए भी करती हैं.

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Neha Kumari

लेखक के बारे में

By Neha Kumari

प्रभात खबर डिजिटल के जरिए मैंने पत्रकारिता की दुनिया में अपना पहला कदम रखा है. यहां मैं धर्म और राशिफल बीट पर बतौर जूनियर कंटेंट राइटर के तौर पर काम कर रही हूं. इसके अलावा मुझे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों से जुड़े विषयों पर लिखने में रुचि है.

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