Pradosh Vrat 2026 Date: माघ शुक्ल प्रदोष व्रत कब है 30 या 31 जनवरी? जानें सही तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

प्रदोष व्रत 2026
Pradosh Vrat 2026 Date: प्रदोष व्रत भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए रखा जाता है, इस व्रत से सुख-समृद्धि, रोग नाश और मनोकामनाओं की पूर्ति होती है. प्रदोष व्रत में सबसे महत्वपूर्ण शाम का समय होता है.
Pradosh Vrat 2026 Date: माघ शुक्ल प्रदोष व्रत 30 जनवरी 2026 दिन शुक्रवार को रखा जाएगा. शुक्रवार के शुभ संयोग में पड़ने के कारण इसे शुक्र प्रदोष व्रत कहा जाता है. यह व्रत वैवाहिक जीवन में प्रेम और मधुरता बढ़ाता है, सौंदर्य व आकर्षण में वृद्धि करता है तथा जीवन में सुख-समृद्धि और सौभाग्य का विशेष आशीर्वाद प्रदान करता है.
Pradosh Vrat 2026: प्रदोष व्रत की पूजा का शुभ मुहूर्त
माघ मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि 30 जनवरी को सुबह 09 बजकर 21 मिनट पर शुरू होगी और इस तिथि का समापन 31 जनवरी को सुबह 07 बजकर 14 मिनट पर होगा. ऐसे में 30 जनवरी को प्रदोष व्रत किया जाएगा. इस दिन पूजा करने का समय शाम को 05 बजकर 30 मिनट से रात 10 बजकर 25 मिनट तक है. चौघड़िया के अनुसार पूजा का सबसे शुभ समय रात 8 बजकर 47 से लेकर रात 10 बजकर 25 मिनट तक होगा.
Pradosh Vrat Evening Puja Time: प्रदोष काल का समय
प्रदोष व्रत में सबसे महत्वपूर्ण प्रदोष काल होता है यानी शाम का समय, क्योंकि इसी समय भगवान शिव कैलाश पर्वत से पृथ्वी पर अवतरित होकर अपने भक्तों को आशीर्वाद देते हैं. प्रदोष काल का शुभ समय सूर्यास्त के बाद शाम 05.30 बजे से रात 09 बजे तक होगा. सूर्यास्त के बाद शिव-पार्वती की पूजा करना अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है.
Pradosh Vrat 2026 Puja Vidhi: प्रदोष व्रत की सरल पूजा विधि
सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में ही शिव-पार्वती की पूजा करें.
सूर्यास्त से पूर्व स्नान कर स्वच्छ एवं हल्के रंग के वस्त्र धारण करें.
भगवान शिव का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें.
घर या मंदिर में शिवलिंग का जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा और सफेद पुष्पों से अभिषेक करें.
श्रद्धा भाव से “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का अधिकाधिक जाप करें.
शिव चालीसा और प्रदोष व्रत कथा का पाठ या श्रवण करें.
भगवान शिव के साथ माता पार्वती की भी पूजा अवश्य करें.
प्रदोष काल में दीपक जलाकर शिव-पार्वती की आरती करें.
व्रत में सात्विक भोजन या फलाहार करें. कई भक्त पूरे दिन निराहार रहकर रात में पारण करते हैं.
अंत में सफेद वस्तुओं जैसे दूध, चावल, सफेद वस्त्र या मिठाई का दान करें.
शुक्र प्रदोष व्रत का आध्यात्मिक महत्व
शुक्र प्रदोष व्रत भगवान शिव और माता पार्वती की संयुक्त आराधना का अत्यंत पावन अवसर माना जाता है, जब प्रदोष व्रत शुक्रवार के दिन पड़ता है, तब यह शुक्र प्रदोष व्रत कहलाता है और इसका आध्यात्मिक प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है. शुक्रवार शुक्र ग्रह से संबंधित होता है, जो प्रेम, सौंदर्य, भोग, ऐश्वर्य और वैवाहिक सुख का कारक है. इस दिन प्रदोष व्रत करने से शुक्र दोष शांत होता है और दांपत्य जीवन में सामंजस्य, प्रेम और मधुरता आती है. शुक्र प्रदोष व्रत करने से उत्तम विवाह योग बनते हैं और योग्य जीवनसाथी की प्राप्ति में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं.
ज्योतिषाचार्य चंद्रशेखर सहस्त्रबाहु:
ज्योतिष एवं हस्तरेखा विशेषज्ञ | 12 वर्षों का अनुभव
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लेखक के बारे में
By Radheshyam Kushwaha
पत्रकारिता की क्षेत्र में 13 साल का अनुभव है. इस सफर की शुरुआत राज एक्सप्रेस न्यूज पेपर भोपाल से की. यहां से आगे बढ़ते हुए समय जगत, राजस्थान पत्रिका, हिंदुस्तान न्यूज पेपर के बाद वर्तमान में प्रभात खबर के डिजिटल विभाग में धर्म अध्यात्म एवं राशिफल डेस्क पर कार्यरत हैं. ज्योतिष शास्त्र, व्रत त्योहार, राशिफल के आलावा राजनीति, अपराध और पॉजिटिव खबरों को लिखने में रुचि हैं.
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