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Hariyali Amavasya 2025: जब झूले पर चढ़ती हैं दुआएं, जानें हरियाली अमावस्या की छिपी परंपरा के बारे में

Updated at : 23 Jul 2025 8:10 AM (IST)
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hariyali amavasya 2025 women swing prayer rituals

hariyali amavasya 2025 women swing prayer rituals

Hariyali Amavasya 2025: हरियाली अमावस्या पर महिलाएं झूले की पूजा कर न केवल प्रकृति को नमन करती हैं, बल्कि जीवन की स्थिरता और सौभाग्य की कामना भी करती हैं. यह परंपरा केवल रीति नहीं, स्त्री के भावनात्मक और सांस्कृतिक जुड़ाव का प्रतीक है. जानिए इस छिपी परंपरा का गहरा अर्थ.

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Hariyali Amavasya 2025: श्रावण मास की अमावस्या तिथि, जिसे हम हरियाली अमावस्या के नाम से जानते हैं, नारी, प्रकृति और आस्था का अद्भुत संगम है. जहां एक ओर यह दिन पेड़ों की हरियाली और पर्यावरण के प्रति सम्मान का प्रतीक बनता है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण अंचलों में महिलाओं के लिए यह दिन एक विशेष लोक परंपरा से जुड़ा होता है—झूले की पूजा.

हरियाली अमावस्या 2025: प्रकृति, पूजा और परंपरा का पर्व

यह परंपरा सिर्फ सावन की रचनात्मक मस्ती या मौसमी उल्लास का हिस्सा नहीं है. इसके पीछे छिपा है गहरा आध्यात्मिक और सांस्कृतिक संदेश. झूला यहां केवल खेल या शौक नहीं, बल्कि जीवन की चढ़ाव-उतार वाली लय का प्रतीक है. महिलाएं जब झूले की पूजा करती हैं, तो वे असल में अपने जीवन में संतुलन, सौभाग्य और शांति की कामना करती हैं.

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वृक्षों पर झूला नहीं, संस्कार की डोर बांधी जाती है

विशेष बात यह है कि झूला आमतौर पर पीपल, नीम या आम जैसे पवित्र वृक्षों पर बांधा जाता है, जिन्हें ‘जीवित देवता’ माना जाता है. इन वृक्षों की पूजा केवल धार्मिक कारणों से नहीं, बल्कि प्रकृति के साथ जुड़ाव और संरक्षण की भावना से भी होती है. झूले पर बैठकर स्त्रियां पारंपरिक गीत गाती हैं, जो नारी मन की भावनाओं, ऋतुओं की रचनात्मकता और लोक-संस्कृति की मधुरता से ओतप्रोत होते हैं.

  • पुरानी मान्यताओं के अनुसार, हरियाली अमावस्या पर झूले की पूजा करने से वैवाहिक जीवन में मधुरता आती है, संतान सुख प्राप्त होता है और घर-परिवार में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है. यह पूजा स्त्री के आत्मबल और प्रकृति के प्रति आभार का सामूहिक उत्सव है.
  • आज जबकि शहरी जीवन में ये परंपराएं धूमिल होती जा रही हैं, गांवों में आज भी यह झूला हरियाली, स्त्रीत्व और श्रद्धा की डोर को एक साथ बांधकर सहेजता है.
  • हरियाली अमावस्या का यह झूला दरअसल वह कड़ी है जो स्त्री के मन, मौसम और माटी को एक लय में बांधता है.

इस साल 2025 में हरियाली अमावस्या कब है?

पंचांग के अनुसार, श्रावण मास की अमावस्या तिथि की शुरुआत 24 जुलाई 2025 को तड़के 2:28 बजे से हो रही है और इसका समापन 25 जुलाई 2025 को दोपहर 12:40 बजे होगा. उदया तिथि के मान से हरियाली अमावस्या का पर्व 24 जुलाई को ही मनाया जाएगा. इस दिन स्नान, दान और पितृ पूजा जैसे धार्मिक कार्यों के लिए यही तिथि श्रेष्ठ मानी गई है.

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Shaurya Punj

लेखक के बारे में

By Shaurya Punj

मैंने डिजिटल मीडिया में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव हासिल किया है. पिछले 6 वर्षों से मैं विशेष रूप से धर्म और ज्योतिष विषयों पर सक्रिय रूप से लेखन कर रहा हूं. ये मेरे प्रमुख विषय हैं और इन्हीं पर किया गया काम मेरी पहचान बन चुका है. हस्तरेखा शास्त्र, राशियों के स्वभाव और उनके गुणों से जुड़ी सामग्री तैयार करने में मेरी निरंतर भागीदारी रही है. रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री प्राप्त करने के बाद. इसके साथ साथ कंटेंट राइटिंग और मीडिया से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में काम करते हुए मेरी मजबूत पकड़ बनी. इसके अलावा, एंटरटेनमेंट, लाइफस्टाइल और शिक्षा जैसे विषयों पर भी मैंने गहराई से लेखन किया है, जिससे मेरी लेखन शैली संतुलित, भरोसेमंद और पाठक-केंद्रित बनी है.

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