क्या आज अमावस्या पर हेयर वॉश से कम होती है सकारात्मक ऊर्जा?
Published by : Shaurya Punj Updated At : 17 Feb 2026 12:08 PM
अमावस्या पर क्या न करें
Amavasya Hair Wash rule: अमावस्या के दिन बाल न धोने की परंपरा चंद्रमा, पितृ तिथि और ऊर्जा संतुलन से जुड़ी मानी जाती है। जानें ज्योतिष और धार्मिक दृष्टि से इसके पीछे का कारण।
Amavasya Hair Wash rule: आज 17 फरवरी को फाल्गुन अमावस्या है. अमावस्या हिंदू पंचांग की वह तिथि है जब चंद्रमा पूरी तरह अदृश्य हो जाता है. इस दिन सूर्य और चंद्र एक ही राशि में स्थित होते हैं, जिससे चंद्रमा की शीतल और मानसिक ऊर्जा क्षीण मानी जाती है. ज्योतिष और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अमावस्या का दिन साधना, पितृ तर्पण और आत्मचिंतन के लिए विशेष होता है. इसी कारण कई घरों में अमावस्या के दिन बाल न धोने की परंपरा निभाई जाती है. आइए इसे सरल भाषा में समझते हैं.
चंद्रमा और मन का संबंध
वैदिक ज्योतिष में चंद्रमा को मन, भावनाओं और जल तत्व का कारक माना गया है. अमावस्या के दिन चंद्रमा कमजोर स्थिति में होता है, इसलिए मानसिक स्थिरता भी कुछ हद तक प्रभावित हो सकती है. बाल धोना जल तत्व से जुड़ी क्रिया है. मान्यता है कि इस दिन अधिक जल का प्रयोग करने से मन की ऊर्जा और भी कमजोर हो सकती है, जिससे चिड़चिड़ापन या उदासी बढ़ सकती है.
ऊर्जा संतुलन का विचार
हमारे शरीर में सकारात्मक और नकारात्मक ऊर्जा का संतुलन बना रहता है. अमावस्या को नकारात्मक ऊर्जा की सक्रियता अधिक मानी जाती है. पुराने ग्रंथों में उल्लेख मिलता है कि इस दिन शरीर को स्थिर और शांत रखना चाहिए. बाल धोना शरीर को ठंडक देता है और ऊर्जा स्तर में बदलाव ला सकता है, इसलिए इसे टालने की सलाह दी जाती है.
पितृ तर्पण और धार्मिक कारण
अमावस्या को पितरों को समर्पित तिथि माना जाता है. इस दिन कई लोग श्राद्ध, तर्पण या दान-पुण्य करते हैं. धार्मिक दृष्टि से यह दिन सादगी और संयम का प्रतीक है. बाल धोना या श्रृंगार करना कुछ परंपराओं में शुभ कार्य नहीं माना जाता, क्योंकि यह दिन भोग-विलास की बजाय श्रद्धा और स्मरण का होता है.
स्वास्थ्य से जुड़ी मान्यता
पुराने समय में प्राकृतिक जल स्रोतों का उपयोग होता था. अमावस्या की रात अंधेरी होती है और वातावरण में नमी अधिक हो सकती है. ऐसे में बाल धोने से सर्दी-जुकाम या सिरदर्द का खतरा बढ़ने की आशंका रहती थी. इसलिए स्वास्थ्य सुरक्षा के रूप में भी यह नियम बनाया गया हो सकता है.

आध्यात्मिक साधना का महत्व
अमावस्या ध्यान, मंत्र जाप और साधना के लिए उत्तम मानी जाती है. इस दिन मन को भीतर की ओर केंद्रित करने की सलाह दी जाती है. बाल धोना एक बाहरी क्रिया है, जबकि अमावस्या आत्ममंथन का समय है. इसलिए बाहरी सजावट की बजाय आंतरिक शुद्धि पर जोर दिया जाता है.
क्या यह नियम सभी के लिए अनिवार्य है?
ध्यान देने वाली बात यह है कि यह एक धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा है, कोई कठोर वैज्ञानिक नियम नहीं. यदि किसी को स्वास्थ्य या स्वच्छता के कारण बाल धोना आवश्यक लगे, तो वह धो सकता है. धर्म में भी स्वच्छता को महत्वपूर्ण माना गया है. इसलिए अंधविश्वास की बजाय समझदारी से निर्णय लेना चाहिए.

आधुनिक दृष्टिकोण
आज के समय में जीवनशैली बदल चुकी है. हम शुद्ध पानी, शैंपू और ड्रायर जैसी सुविधाओं का उपयोग करते हैं. ऐसे में अमावस्या पर बाल धोने से सीधे कोई हानि नहीं होती. फिर भी जो लोग परंपरा का पालन करना चाहते हैं, वे इसे श्रद्धा के रूप में निभा सकते हैं.
अमावस्या के दिन बाल न धोने की परंपरा ज्योतिष, ऊर्जा संतुलन, पितृ श्रद्धा और पुराने समय की स्वास्थ्य सावधानियों से जुड़ी है. इसका मुख्य उद्देश्य संयम, साधना और मानसिक स्थिरता बनाए रखना है. हालांकि यह कोई बाध्यकारी नियम नहीं है, बल्कि आस्था पर आधारित परंपरा है.
यदि आप धार्मिक भाव से इसे मानते हैं तो पालन करें, अन्यथा स्वच्छता और स्वास्थ्य को प्राथमिकता दें. सबसे महत्वपूर्ण है संतुलन — न अंधविश्वास, न ही परंपराओं का अपमान. समझ के साथ चलना ही सही मार्ग है.
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By Shaurya Punj
शौर्य पुंज डिजिटल मीडिया में पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर हैं. उन्हें न्यूज वर्ल्ड में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. शौर्य खबरों की नब्ज को समझकर उसे आसान और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में माहिर हैं. साल 2008 में ग्रेजुएशन के दौरान उन्होंने दैनिक हिंदुस्तान, प्रभात खबर, दैनिक जागरण और तरंग भारती (हिंदी पाक्षिक समाचार पत्र) के लिए फ्रीलांसिंग की. वर्ष 2011 में उन्होंने दैनिक जागरण के टैब्लॉइड समाचार पत्र iNext में दो महीने की इंटर्नशिप की. इसी दौरान उन्हें प्रभात खबर के डिजिटल सेक्शन में काम करने का अवसर मिला. अप्रैल 2011 से उन्होंने प्रभातखबर.कॉम के एंटरटेनमेंट सेक्शन के लिए कार्य करना शुरू किया. उस समय उन्होंने बॉलीवुड फिल्म रिव्यू, बॉक्स ऑफिस बिजनेस और एंटरटेनमेंट गॉसिप जैसी खबरों पर काम किया. साल 2020 में कोरोना काल के दौरान उन्हें लाइफस्टाइल, धर्म-कर्म, एजुकेशन और हेल्थ जैसे नॉन-न्यूज सेक्शन में काम करने का अवसर मिला. उन्होंने लाइफस्टाइल कैटेगरी के कई महत्वपूर्ण सेक्शनों में योगदान दिया. Health & Fitness सेक्शन में डाइट, योग, वेट लॉस, मानसिक स्वास्थ्य और फिटनेस टिप्स से जुड़े उपयोगी कंटेंट पर कार्य किया. Beauty & Fashion सेक्शन में स्किन केयर, हेयर केयर, मेकअप और ट्रेंडिंग फैशन विषयों पर लेख तैयार किए. Relationship & Family कैटेगरी में पति-पत्नी संबंध, डेटिंग, पैरेंटिंग और दोस्ती जैसे विषयों पर जानकारीपूर्ण कंटेंट लिखा. Food & Recipes सेक्शन में हेल्दी फूड, रेसिपी और किचन टिप्स से संबंधित सामग्री विकसित की. Travel सेक्शन के लिए घूमने की जगहों, बजट ट्रिप और ट्रैवल टिप्स पर लेखन किया. Astrology / Vastu में राशिफल, वास्तु टिप्स और ज्योतिष आधारित कंटेंट पर काम किया. Career & Motivation सेक्शन में सेल्फ-इम्प्रूवमेंट, मोटिवेशन और पर्सनैलिटी डेवलपमेंट विषयों पर योगदान दिया. Festival & Culture सेक्शन में त्योहारों की परंपराएं, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त से संबंधित कंटेंट पर कार्य किया. इसके अलावा Women Lifestyle / Men Lifestyle और Health Education & Wellness जैसे विषयों पर भी मर्यादित एवं जानकारीपूर्ण लेखन के माध्यम से योगदान दिया. साल 2023 से शौर्य ने पूरी तरह से प्रभातखबर.कॉम के धर्म-कर्म और राशिफल सेक्शन में अपना योगदान देना शुरू किया. इस दौरान उन्होंने दैनिक राशिफल, साप्ताहिक एवं मासिक भविष्यफल, पूजा-पाठ, व्रत-त्योहार, शुभ मुहूर्त, ज्योतिषीय उपाय, वास्तु टिप्स और धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी खबरों पर विशेष फोकस किया. साथ ही पाठकों की रुचि को ध्यान में रखते हुए सरल, सहज और जानकारीपूर्ण धार्मिक कंटेंट तैयार करने पर लगातार कार्य किया. रांची में जन्मे शौर्य की प्रारंभिक शिक्षा डीएवी पब्लिक स्कूल, हेहल, रांची से हुई. इसके बाद उन्होंने सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एण्ड वीडियो प्रोडक्शन में बी.ए. ऑनर्स की डिग्री प्राप्त की. यह शैक्षणिक पृष्ठभूमि उन्हें हिंदी पत्रकारिता की वह विशेषज्ञता प्रदान करती है, जो पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws और 1H — क्या, कौन, कहां, कब, क्यों और कैसे — के आधार पर प्रभावी और तथ्यपूर्ण समाचार लेखन के लिए आवश्यक मानी जाती है.
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