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Gopashtami 2025: गोपाष्टमी आज, बन रहा है रवि योग, इस शुभ मुहूर्त में करें पूजा

Updated at : 30 Oct 2025 9:47 AM (IST)
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Gopashtami 2025

आज मनाया जा रहा है गोपाष्टमी

Gopashtami 2025: आज कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि पर गोपाष्टमी का पावन पर्व मनाया जा रहा है. इस दिन भगवान श्रीकृष्ण और गौमाता की पूजा का विशेष महत्व है. रवि योग और शिववास योग जैसे शुभ संयोग बन रहे हैं, जिनमें पूजा करने से अक्षय पुण्य और आरोग्यता प्राप्त होती है.

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Gopashtami 2025: आज कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि है, और इसी दिन गोपाष्टमी का पावन पर्व मनाया जाता है. यह दिन भगवान श्रीकृष्ण और गौमाता की पूजा के लिए विशेष माना जाता है. धार्मिक मान्यता है कि यह पर्व उस घटना से जुड़ा है जब भगवान कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत उठाकर गोकुलवासियों की रक्षा की थी. इस दिन गौमाता की पूजा करने से जीवन में सुख, समृद्धि और आरोग्यता प्राप्त होती है.

गोपाष्टमी तिथि और शुभ मुहूर्त

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, कार्तिक मास की अष्टमी तिथि पर इस वर्ष रवि योग और शिववास योग जैसे दो शुभ संयोग बन रहे हैं. रवि योग का आरंभ 30 अक्टूबर की सुबह 6 बजकर 33 मिनट से होगा और यह 31 अक्टूबर की सुबह 6 बजकर 32 मिनट तक रहेगा. रवि योग को बहुत शुभ माना गया है, और इस योग में भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करने से मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं और आरोग्यता का वरदान मिलता है.

गोपाष्टमी की पौराणिक कथा

मान्यता है कि जब भगवान श्रीकृष्ण छह वर्ष के हुए, तो उन्होंने माता यशोदा से गाय चराने की अनुमति मांगी. माता यशोदा ने उन्हें नंद बाबा से पूछने को कहा. नंद बाबा ने पहले कहा कि वे अभी छोटे हैं, इसलिए केवल बछड़े ही चराएं. लेकिन कृष्ण ने जिद की, तब नंद बाबा ने शांडिल्य ऋषि से शुभ मुहूर्त पूछा. ऋषि ने उसी दिन को गोचारण के लिए सर्वोत्तम बताया. यही दिन कार्तिक शुक्ल अष्टमी था, और इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण ने पहली बार गाय चराई. तब से यह दिन गोपाष्टमी के रूप में मनाया जाने लगा.

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गोपाष्टमी पूजा विधि

  • सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और शुद्ध वस्त्र पहनें.
  • गौमाता को स्नान कराकर उनकी वंदना करें.
  • गौशाला या पूजा स्थान को गोबर से लीपकर साफ करें और दीपक, फूल और रंगोली से सजाएं.
  • घर के मंदिर में गौमाता, राधा और कृष्ण की प्रतिमा स्थापित करें और विधि-विधान से पूजा करें.
  • गाय के खुरों पर हल्दी और तेल लगाकर आरती उतारें.
  • गाय के माथे पर रोली और चंदन लगाएं और उन्हें गुड़, हरा चारा या रोटी का प्रसाद खिलाएं.
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Shaurya Punj

लेखक के बारे में

By Shaurya Punj

मैंने डिजिटल मीडिया में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव हासिल किया है. पिछले 6 वर्षों से मैं विशेष रूप से धर्म और ज्योतिष विषयों पर सक्रिय रूप से लेखन कर रहा हूं. ये मेरे प्रमुख विषय हैं और इन्हीं पर किया गया काम मेरी पहचान बन चुका है. हस्तरेखा शास्त्र, राशियों के स्वभाव और उनके गुणों से जुड़ी सामग्री तैयार करने में मेरी निरंतर भागीदारी रही है. रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री प्राप्त करने के बाद. इसके साथ साथ कंटेंट राइटिंग और मीडिया से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में काम करते हुए मेरी मजबूत पकड़ बनी. इसके अलावा, एंटरटेनमेंट, लाइफस्टाइल और शिक्षा जैसे विषयों पर भी मैंने गहराई से लेखन किया है, जिससे मेरी लेखन शैली संतुलित, भरोसेमंद और पाठक-केंद्रित बनी है.

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