मरे हुए इंसान के जूते-चप्पल पहनने चाहिए या नहीं? जानें क्या कहता है गरुड़ पुराण

मृतक के जूते-चप्पल और श्राद्ध कर्म से जुड़ा सांकेतिक तस्वीर (AI)
Garud Puran: शास्त्रों में मृत व्यक्ति के जूते-चप्पल पहनना वर्जित माना गया है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इनमें मृत व्यक्ति से जुड़ी ऊर्जा का प्रभाव बना रह सकता है. ऐसा करने से नकारात्मकता और पितृदोष का खतरा बढ़ने की आशंका रहती है. ऐसे में प्रश्न उठता है कि मृत्यु के बाद इन वस्तुओं का क्या करना चाहिए? आइए जानते हैं इस बारे में शास्त्रों में क्या बताया गया है.
Garud Puran: सनातन धर्म में मृत्यु को जीवन का अंत नहीं, बल्कि आत्मा की एक नई यात्रा की शुरुआत माना गया है. इस यात्रा और मृत्यु के बाद होने वाली परंपराओं का विस्तृत वर्णन गरुड़ पुराण में मिलता है. अक्सर किसी प्रियजन के निधन के बाद परिवार के लोग उनकी वस्तुओं को लेकर असमंजस में पड़ जाते हैं. कई लोग उनकी याद में जूते-चप्पल या अन्य सामान अपने पास रख लेते हैं या उनका उपयोग करने लगते हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या मृत व्यक्ति के जूते-चप्पल पहनना उचित है? आइए जानते हैं कि इस विषय में गरुड़ पुराण और धार्मिक मान्यताएं क्या कहती हैं.
क्या मृत व्यक्ति के जूते-चप्पल पहनने चाहिए?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मृत व्यक्ति के जूते-चप्पल पहनने से बचना चाहिए. शास्त्रों में इसे उचित नहीं माना गया है. मान्यता है कि व्यक्ति के जूते-चप्पलों में उसकी शारीरिक ऊर्जा और जीवन से जुड़ी सूक्ष्म तरंगों का प्रभाव रहता है. ऐसे में उनका उपयोग करने से मृत व्यक्ति के प्रति मोह और स्मृतियां और अधिक गहरी हो सकती हैं, जो आत्मा की शांति और आगे की यात्रा में बाधा मानी जाती हैं.
क्यों नहीं पहनने चाहिए मृत व्यक्ति के जूते-चप्पल?
धार्मिक ग्रंथों और लोक मान्यताओं में इसके पीछे कई कारण बताए गए हैं:
1. नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव
मान्यता है कि मृत्यु के बाद भी व्यक्ति की कुछ सूक्ष्म ऊर्जाएं उसकी उपयोग की गई वस्तुओं से जुड़ी रह सकती हैं. ऐसे में जूते-चप्पल पहनने से उस ऊर्जा का प्रभाव नए उपयोगकर्ता पर पड़ सकता है, जिससे मानसिक अशांति या कार्यों में बाधा आने की आशंका मानी जाती है.
2. पितृ दोष
कुछ धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मृत व्यक्ति की वस्तुओं का अनुचित उपयोग करने से पितरों की नाराजगी का सामना करना पड़ सकता है. इससे परिवार में पितृ दोष जैसी स्थितियां उत्पन्न होने की आशंका बताई जाती है.
3. आत्मा का सांसारिक मोह
मान्यता है कि यदि परिवार के सदस्य मृत व्यक्ति की वस्तुओं का लगातार उपयोग करते रहें, तो आत्मा का सांसारिक मोह पूरी तरह समाप्त नहीं हो पाता. इससे आत्मा की परलोक यात्रा प्रभावित हो सकती है और उसे शांति प्राप्त करने में विलंब हो सकता है.
मृत व्यक्ति की वस्तुओं का क्या करना चाहिए?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, किसी व्यक्ति के निधन के बाद उसके जूते-चप्पल, सामान्य कपड़े और दैनिक उपयोग की वस्तुएं जरूरतमंदों या गरीब लोगों को दान कर देना शुभ माना जाता है. ऐसा करने से मृतात्मा को शांति मिलने, पुण्य की प्राप्ति होने और परिवार पर सकारात्मक प्रभाव पड़ने की मान्यता है.
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By नेहा कुमारी
नेहा कुमारी वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में धर्म बीट पर कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. वह व्रत-त्योहार, राशिफल, पंचांग, ज्योतिष, शुभ मुहूर्त, पौराणिक कथाओं और भारतीय संस्कृति से जुड़े विषयों पर लेख लिखती हैं. उन्होंने वेस्ट बंगाल स्टेट यूनिवर्सिटी से मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन की डिग्री प्राप्त की है.
डिजिटल पत्रकारिता में उन्होंने धर्म, ज्योतिष और भारतीय परंपराओं से जुड़े विषयों पर विशेष अनुभव हासिल किया है. उनका उद्देश्य पाठकों तक सरल भाषा में सटीक, विश्वसनीय और उपयोगी जानकारी पहुंचाना है, ताकि वे धार्मिक और सांस्कृतिक विषयों को आसानी से समझ सकें.
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