Chhath Puja 2025 Mehndi Design: छठ पूजा में मेहंदी लगाएं या नहीं, जानें क्या है परंपरा

Published by : Shaurya Punj Updated At : 25 Oct 2025 6:38 AM

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छठ पूजा में मेहंदी लगाएं या नहीं

Chhath Puja 2025 Mehndi Design: छठ पूजा में महिलाएं पारंपरिक रूप से हाथ-पैर सजाती हैं, लेकिन मेहंदी लगाने को लेकर अक्सर सवाल उठते हैं. परंपरा और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मेहंदी लगाना शुभ माना जाता है, लेकिन क्या इसे छठ पूजा में लगाना सही है, जानते हैं ज्योतिषाचार्य डॉ एन के बेरा से

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Chhath Puja 2025 Mehndi Design: छठ पूजा का आरंभ कल 25 अक्तूबर 2025 से हो रहा है. बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में ये पर्व बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाने वाला एक पवित्र पर्व है. यह त्योहार सूर्य देव और छठी मैया की उपासना का प्रतीक है. इस पूजा में सादगी और नियमों का विशेष ध्यान रखा जाता है. लेकिन साथ ही इस पर्व में महिलाओं के मन में कई सवाल भी उठते हैं. जैसे, क्या छठ पूजा में सज-धज करना चाहिए? क्या मेहंदी लगाई जा सकती है? हमने ज्योतिषाचार्य डॉ एन के बेरा से जानना चाहा

छठ पूजा में मेहंदी लगाना चाहिए या नहीं?

छठ पूजा के दिन महिलाएं पारंपरिक रूप से साफ-सुथरे कपड़े पहनती हैं और सज-धज कर पूजा में शामिल होती हैं. मेहंदी इस सजावट का एक अहम हिस्सा बन चुकी है. यह न केवल हाथों को खूबसूरत बनाती है, बल्कि धार्मिक दृष्टिकोण से भी इसका महत्व माना जाता है. मेहंदी लगाने से महिलाएं अपने आपको त्योहार के अनुसार तैयार करती हैं और यह पवित्र माहौल को और खास बना देती है.

मेहंदी लगाने का महत्व

सौंदर्य के लिए

मेहंदी हाथों और पैरों को सजाती है और महिलाओं को और अधिक खूबसूरत बनाती है. यह छठ पूजा की पारंपरिक सजावट में एक खास भूमिका निभाती है.

शुभ मान्यता

मेहंदी को हमेशा शुभ माना गया है. इसे लगाने से सौभाग्य, खुशी और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है. यही वजह है कि लोग इसे पवित्र त्योहारों पर जरूर लगाते हैं.

पारंपरिक प्रथा

छठ पूजा में मेहंदी लगाने की परंपरा सदियों से चली आ रही है. यह परंपरा पूजा को और भी धार्मिक और पारंपरिक बनाती है.

धार्मिक महत्व

कुछ लोगों का मानना है कि मेहंदी लगाने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और सकारात्मक ऊर्जा का आगमन होता है. इस दृष्टि से यह पूजा का एक छोटा लेकिन महत्वपूर्ण हिस्सा बन जाती है.

छठ पूजा के लिए मेहंदी के डिजाइन

छठ पूजा पर लगाई जाने वाली मेहंदी के डिजाइन विशेष होते हैं. इनमें आमतौर पर सूर्य देव और छठी मैया के प्रतीक शामिल होते हैं. इसके अलावा फूल-पत्तियों वाले डिजाइन भी बहुत लोकप्रिय हैं. मोर, बिंदी, चंदा और अन्य पारंपरिक डिजाइन भी छठ पूजा में खूब इस्तेमाल किए जाते हैं. यह डिजाइन न केवल हाथों को सजाते हैं, बल्कि त्योहार की पवित्रता और भक्ति को भी दर्शाते हैं.

  • मेहंदी लगाने से पहले हाथों को अच्छी तरह धो लें और साफ-सुथरा रखें.
  • प्राकृतिक मेहंदी का उपयोग करने की कोशिश करें. इससे रंग लंबे समय तक टिकता है और त्वचा को कोई हानि नहीं होती.
  • अपने मनपसंद डिजाइन का चयन करें. आप पारंपरिक या आधुनिक, दोनों तरह के डिज़ाइन चुन सकती हैं.
  • मेहंदी को सूखने और अच्छे रंग देने के लिए पर्याप्त समय दें. इसे छूने या धोने से बचें.

छठ पूजा में मेहंदी का अनुभव

छठ पूजा के दौरान मेहंदी लगाने से सिर्फ हाथ-पैर ही नहीं सजते, बल्कि मन में भी उत्साह और भक्ति का अनुभव होता है. महिलाएं यह काम अपने परिवार के साथ मिलकर करती हैं, जिससे परिवार में एकता और प्यार भी बढ़ता है. बच्चों और युवाओं के लिए भी यह एक सुंदर परंपरा और उत्सव का अनुभव बन जाता है.

छठ पूजा सादगी, भक्ति और परंपरा का त्योहार है. इसमें नियमों और पूजा के तरीकों का विशेष ध्यान रखा जाता है. हालांकि, मेहंदी लगाना इस त्योहार में एक खुशियों और सुंदरता का प्रतीक बन गया है. यह पूजा को और भी खास बनाता है. अगर आप भी छठ पूजा में मेहंदी लगाना चाहती हैं, तो प्राकृतिक मेहंदी का उपयोग करें, डिजाइन सोच-समझकर चुनें और इसे सूखने का पूरा समय दें.

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Shaurya Punj

लेखक के बारे में

By Shaurya Punj

शौर्य पुंज डिजिटल मीडिया में पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर हैं. उन्हें न्यूज वर्ल्ड में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. शौर्य खबरों की नब्ज को समझकर उसे आसान और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में माहिर हैं. साल 2008 में ग्रेजुएशन के दौरान उन्होंने दैनिक हिंदुस्तान, प्रभात खबर, दैनिक जागरण और तरंग भारती (हिंदी पाक्षिक समाचार पत्र) के लिए फ्रीलांसिंग की. वर्ष 2011 में उन्होंने दैनिक जागरण के टैब्लॉइड समाचार पत्र iNext में दो महीने की इंटर्नशिप की. इसी दौरान उन्हें प्रभात खबर के डिजिटल सेक्शन में काम करने का अवसर मिला. अप्रैल 2011 से उन्होंने प्रभातखबर.कॉम के एंटरटेनमेंट सेक्शन के लिए कार्य करना शुरू किया. उस समय उन्होंने बॉलीवुड फिल्म रिव्यू, बॉक्स ऑफिस बिजनेस और एंटरटेनमेंट गॉसिप जैसी खबरों पर काम किया. साल 2020 में कोरोना काल के दौरान उन्हें लाइफस्टाइल, धर्म-कर्म, एजुकेशन और हेल्थ जैसे नॉन-न्यूज सेक्शन में काम करने का अवसर मिला. उन्होंने लाइफस्टाइल कैटेगरी के कई महत्वपूर्ण सेक्शनों में योगदान दिया. Health & Fitness सेक्शन में डाइट, योग, वेट लॉस, मानसिक स्वास्थ्य और फिटनेस टिप्स से जुड़े उपयोगी कंटेंट पर कार्य किया. Beauty & Fashion सेक्शन में स्किन केयर, हेयर केयर, मेकअप और ट्रेंडिंग फैशन विषयों पर लेख तैयार किए. Relationship & Family कैटेगरी में पति-पत्नी संबंध, डेटिंग, पैरेंटिंग और दोस्ती जैसे विषयों पर जानकारीपूर्ण कंटेंट लिखा. Food & Recipes सेक्शन में हेल्दी फूड, रेसिपी और किचन टिप्स से संबंधित सामग्री विकसित की. Travel सेक्शन के लिए घूमने की जगहों, बजट ट्रिप और ट्रैवल टिप्स पर लेखन किया. Astrology / Vastu में राशिफल, वास्तु टिप्स और ज्योतिष आधारित कंटेंट पर काम किया. Career & Motivation सेक्शन में सेल्फ-इम्प्रूवमेंट, मोटिवेशन और पर्सनैलिटी डेवलपमेंट विषयों पर योगदान दिया. Festival & Culture सेक्शन में त्योहारों की परंपराएं, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त से संबंधित कंटेंट पर कार्य किया. इसके अलावा Women Lifestyle / Men Lifestyle और Health Education & Wellness जैसे विषयों पर भी मर्यादित एवं जानकारीपूर्ण लेखन के माध्यम से योगदान दिया. साल 2023 से शौर्य ने पूरी तरह से प्रभातखबर.कॉम के धर्म-कर्म और राशिफल सेक्शन में अपना योगदान देना शुरू किया. इस दौरान उन्होंने दैनिक राशिफल, साप्ताहिक एवं मासिक भविष्यफल, पूजा-पाठ, व्रत-त्योहार, शुभ मुहूर्त, ज्योतिषीय उपाय, वास्तु टिप्स और धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी खबरों पर विशेष फोकस किया. साथ ही पाठकों की रुचि को ध्यान में रखते हुए सरल, सहज और जानकारीपूर्ण धार्मिक कंटेंट तैयार करने पर लगातार कार्य किया. रांची में जन्मे शौर्य की प्रारंभिक शिक्षा डीएवी पब्लिक स्कूल, हेहल, रांची से हुई. इसके बाद उन्होंने सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एण्ड वीडियो प्रोडक्शन में बी.ए. ऑनर्स की डिग्री प्राप्त की. यह शैक्षणिक पृष्ठभूमि उन्हें हिंदी पत्रकारिता की वह विशेषज्ञता प्रदान करती है, जो पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws और 1H — क्या, कौन, कहां, कब, क्यों और कैसे — के आधार पर प्रभावी और तथ्यपूर्ण समाचार लेखन के लिए आवश्यक मानी जाती है.

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